Famous Gurudwara in Delhi: आज गुरु नानक देव जी का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन सिखों के पहले गुरु नानक देव का जन्म हुआ था। उन्होंने ही सिख धर्म की नींव रखी और सत्कर्म का मार्ग दिखाया। इस वर्ष गुरु नानक देव की जयंती 8 नवंबर को मनाई जा रही है। गुरु नानक देव के जन्मोत्सव को प्रकाश पर्व के तौर पर मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष गुरु नानक जयंती पर प्रात: प्रभात फेरी निकाली जाती है। गुरुद्वारे में पाठ होते हैं। कीर्तन और लंगर का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर लोग गुरुद्वारा जाते हैं। अगर आप भी गुरु नानक देव का जन्मोत्सव मना रहे हैं तो आज के दिन परिवार, बच्चों या दोस्तों के साथ गुरुद्वारा जा सकते हैं। दिल्ली में रहते हैं तो यहां कई प्रसिद्ध और ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं, जहां की शांति और खूबसूरती आपका मन मोह लेगी। यह रहे दिल्ली के प्रसिद्ध गुरुद्वारे।
Famous Gurudwara in Delhi: दिल्ली के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक गुरुद्वारे, गुरु नानक देव की जयंती पर जा सकते हैं आप
गुरुद्वारा बंगला साहिब
दिल्ली में प्रसिद्ध बंगला साहिब गुरुद्वारा स्थित है। बंगला साहिब को लेकर कई मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि यह गुरुद्वारा जयपुर के महाराज जय सिंह का बंगला हुआ करता था। सिखों के आठवें गुरु हर किशन सिंह इस बंगले में रहा करते थे। सिख जनरल सरदार भगेल सिंह ने 1783 में इसे बनाया था। दिल्ली के सबसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक गुरुद्वारा बंगला साहिब पूरे 24 घंटे के लिए संचालित होता है और पूरे साल यहां लंगर चलता रहता है। मान्यता है कि यहां का पानी रोगनाशक है और बहुत पवित्र माना जाता है।
गुरुद्वारा शीशगंज साहिब
पुरानी दिल्ली के चंडी चौक क्षेत्र में गुरुद्वारा शीश गंज साहिब स्थित है। 1783 में पंजाब छावनी के सैन्य जनरल रहे बघेल सिंह ने इसका निर्माण कराया था। यह सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर की शहादत स्थल है। जब गुरु ने इस्लाम धर्म कबूल करने से इंकार कर दिया था तो मुगल सम्राट औरंगजेब के आदेश पर उनको मार दिया गया था। गुरु तेज बहादुर की शहादत की याद में गुरुद्वारा का निर्माण कराया गया था।
गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर
दिल्ली के प्रसिद्ध गुरुद्वारों में तीसरा कुतुब मीनार के पास महरौली में स्थित है। 1719 में मुगलों ने बाबा बंदा सिंह बहादुर और उनके बेटों समेत 40 अन्य सिखों को असहनीय तरीके से मौत के घाट उतार दिया था। उनकी वीरता और शहादत की याद में गुरुद्वारा बनाया गया, जिसका नाम सिख शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर के नाम पर है। यहां हर साल वैषाखी का मेला लगता है।
गुरुद्वारा माता सुंदरी
गुरु गोबिंद सिंह की पत्नी के नाम पर एक गुरुद्वारा का नाम है। गुरुद्वारा माता सुंदरी वह जगह है, जहां माता सुंदरी ने 1747 में अंतिम सांस ली थी। उनकी याद में इस जगह को तीर्थ स्थल बना दिया गया। गुरु गोबिंद जी के निधन के बाद करीब 40 वर्षों तक माता सुंदरी ने सिखों का नेतृत्व किया था। सिख धर्म के लोग उनका बहुत सम्मान करते हैं और उन्हें अपना गुरु मानते हैं।