दशहरे का त्योहार पूरे दस दिन तक मनाया जाने वाला त्योहार है। पूरे भारत में इस त्योहार को बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। लेकिेन केवल उत्तर भारत ही नहीं दशहरे के त्योहार को मध्य भारत से लेकर दक्षिण भारत तक में अलग-अलग नामों के साथ मनाया जाता है। तो आइए जानें कुल्लु और हैदराबाद जैसे शहरों के अलावा कहां और कैसे मनाया जाता है दशहरा।
Dussehra 2019: बस्तर से लेकर चेन्नई तक यहां होने वाले दशहरे के बारे में नहीं सुना होगा आपने
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बस्तर जिले में दशहरे का त्योहार बड़े ही उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस आदिवासी क्षेत्र में ये त्योहार पूरे 75 दिन तक मनाया जाता है। दशहरे का मतलब यहां पर परंपरा, प्रकृति और मां दांतेश्वरी देवी की पूजा से है। आदिवासी लोगों का मानना है कि 13वीं शताब्दी में बस्तर के राजा ने पुरुषोत्तम देव ने इस त्योहार की परंपरा शुरु की थी।
इस त्योहार में लकड़ी की पूजा, कलश स्थापना, पत्थर की स्थापना और बहुत से परंपरागत तरीकों से दशहरे का उत्सव मनाया जाता है।
दशहरे के आते ही चेन्नई की सड़कों पर लकड़ी की बनी मूर्ति या गुड़िया दिखने लगती हैं। रंग-बिरंगे कपड़ों से सजी इन गुड़िया के माध्यम से मां दुर्गा और महिषासुर के युद्ध को दर्शाया जाता है।
कोटा में दशहरे के समय बहुत ही भव्य मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, कास्ट्यूम नाटक, तरह-तरह की आतिशबाजियां होती हैं। इस मेले की शुरूआत महाराजा दुर्जशाल ने करीब 1723 में की थी। यह मेला करीब 25 दिन तक चलता है।
तमिलनाडु में कुलसेकपट्टिनम में दस दिन तक दशहरे का त्योहार मनाया जाता है जिसे कुलासाई फेस्टिवल भी कहते हैं। मुतरम्मन मंदिर में मनाया जाने वाला यह त्योहार बहुत ही प्रसिद्ध है। इस त्योहार में दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं और बहुत से लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।