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Dussehra 2019: इन खास कारणों से मशहूर है मैसूर और कुल्लू का दशहरा

Tue, 08 Oct 2019 08:32 AM IST
ललित फुलारा लाइफस्टाइल डेस्क,अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क,अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Tue, 08 Oct 2019 08:32 AM IST
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Dussehra 2019 Why Mysore and Kullu Dusshera is special
रावण का पुतला - फोटो : amar ujala

दशहरा का त्योहार पूरे देश में बड़े जोरो -शोरो से मनाया जाता है। इस त्योहार के रंग में हर शहर अपनी तरह से रंग जाता है। हर शहर का दशहरा किसी बात का प्रतीक है। जहां दिल्ली और उत्तर प्रदेश में दशहरा के दिन लोग रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद का पुतला जलाते हैं , वहीं कुल्लू और मैसूर शहर के दशहरा का महत्व और तरीका दोनों ही अलग है। इसलिए यहां का दशहरा दुनियाभर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। कुल्लू और मैसूर शहर का दशहरा देखने के लिए  देश-विदेश से लोग आते हैं। 

Dussehra 2019 Why Mysore and Kullu Dusshera is special
- फोटो : social media

मैसूर
कर्नाटक के मैसूर शहर में दशहरा का त्योहार बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता है। इस त्योहार को यहां के लोग दसरा या नबाबबा कहते हैं। इस त्योहार में मैसूर के सबसे मशहूर शाही वोडेयार परिवार सहित पूरा शहर शामिल होता है। मैसूर पैलेस को 10 दिनों तक सजा कर रखा जाता है। साथ ही यहां सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा महल के मैदान के सामने एक दसारा प्रदर्शन का भी आयोजन किया जाता है।

Dussehra 2019 Why Mysore and Kullu Dusshera is special
- फोटो : social media

ऐसा माना जाता है कि मैसूर में दशहरा का आयोजन सबसे पहले 15वीं शताब्दी में हुआ था। दशहरा त्योहार का यह आयोजन विजयनगर साम्राज्य के शासकों द्वारा किया गया था। दशहरा के दिन यहां देवी चामुंडेश्वरी की पूजा की जाती है। मैसूर के दशहरे की खासियत यहां का जुलूस है जो अंबा महल से शुरू होता है और मैसूर से होते हुए करीब पांच किलोमीटर और दूर जाता है। इस जुलूस में पंद्रह हाथी लाए जाते हैं जिनके ऊपर देवी चामुंडेश्वरी की मूर्ति को रखा जाता है। इस मूर्ति को बेहद ही खूबसूरत तरीके से सजाया जाता है। इसके साथ नृत्य , संगीत और कई सजाए हुए जानवरों की झांकी भी इस जुलूस में शामिल होती है। 

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Dussehra 2019 Why Mysore and Kullu Dusshera is special
- फोटो : social media

सिर्फ इतना ही नहीं  इस त्योहार के आखिरी दिन सड़कों पर एक जंबो सवारी का जुलूस भी निकाला जाता है। बच्चे-बड़े सभी इस जुलूस का हिस्सा बनते हैं। हर कोई इस पर्व के रंग में रंग जाता है और माता चामुंडेश्वरी की भक्ति में लीन रहता है। तरह-तरह की झाकियां और पूरे मैसूर को दशहरे के रंग में इस तरह रंगा जाता है , जिसकी वजह से यह सभी लोगों के आकर्षण का केन्द्र बन चुका है। 

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Dussehra 2019 Why Mysore and Kullu Dusshera is special
- फोटो : social media
कुल्लू 

जहां एक तरफ हिमाचल प्रदेश का कुल्लू शहर शांति और अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है। वहीं दशहरा के दिन इस शहर का भव्य आयोजन सभी लोगों के आकर्षण का केन्द्र बन जाता है। कुल्लू में दशहरा  का त्योहार भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। जब पूरे देश में दशहरा खत्म होता है , उसी दिन कुल्लू में दशहरे का उत्सव शुरू होता है। कुल्लू में दशहरे का पर्व सात दिनों तक मनाया जाता है। जहां पूरे देश में दशहरा असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है वहीं कुल्लू में काम, क्रोध, मोह, लोभ और अहंकार के नाश के तौर पर पांच जानवरों की बलि देकर इसे मनाते हैं।

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