वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज (1 फरवरी 2020 को) साल 2020 का बजट पेश किया। बजट के अंतर्गत सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विकास पर 2500 करोड़ रुपए खर्च करने का एलान किया है। भारत सरकार देश में पांच पुरातात्विक जगहों पर म्यूजियम बनाने की चर्चा की है। यह म्यूजियम उत्तर प्रदेश के हस्तिनापुर, असम के शिवसागर, गुजरात के धौलाविरा, हरियाणा के राखीगढ़ी और रांची में ट्राइबल म्यूजियम बनेगा। आइए जानते हैं इन पांच पुरातात्विक जगहों के बारे में विस्तार से...
खास हैं धौलावीरा, राखीगढ़ी, हस्तिनापुर, शिवसागर और आदिचेल्लूर, इसलिए सरकार करेगी इन्हें विकसित?
हस्तिनापुर, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में मेरठ के नजदीक स्थित हस्तिनापुर को पांडवों की राजधानी माना जाता है। हस्तिनापुर महाभारत काल का सबसे प्रसिद्ध एवं चर्चित महानगर था। मान्यता ये भी है कि इस जगह पर कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध लड़ा गया था। जैन समुदाय के लोगों के लिए भी हस्तिनापुर एक पवित्र स्थल है। जैन धर्म के 24 तीर्थांकरों में से 16, 17 और 18 वें तीर्थांकर का जन्म यहीं हुआ था। हस्तिनापुर में हर वर्ष भारी संख्या में जैन श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। भारत सरकार बजट 2020 में इस पुरातात्विक जगह के विकास के लिए एक म्यूजियम बनाने की चर्चा की है।
शिवसागर, असम
असम की राजधानी गुवाहाटी से करीब 360 किमी की दूरी पर स्थित सिबसागर जिला स्थित है। इस जगह को अब शिवसागर के नाम से भी जाना जाता है। यह शहर करीब 100 सालों तक अहोम सम्राज्य की राजधानी था। यहां पर 129 एकड़ का एक मानव निर्मित सिबसागर तालाब है, जिसके चारों ओर यह शहर बसा हुआ है। इस शहर में आपको अहोम सम्राज्य से जुड़ी कई ऐतिहासिक चीजें देखने को मिलेंगी। इसके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए भारत सरकार एक म्यूजियम बनाएगी।
धौलाविरा, गुजरात
धौलाविरा गुजरात का हड़प्पाकालीन सभ्यता का प्राचीन शहर है। यगह जगह कच्छ के रण में खदिर बेट द्वीप पर स्थित है। धोलाविरा हमेशा से इतिहासकारों के लिए खोज की जगह रही है। भारत सरकार इसके ऐतिहासिक महत्व को बढ़ावा देने के लिए बजट 2020 में म्यूजियम बनाने की बात की है।
राखीगढ़ी, हरियाणा
राखीगढ़ी सिंधु घाटी सभ्यता का शहर है। इस शहर का इतिहास ही इसकी खूबसूरती को बढ़ाता है। वैसे तो यह बहुत ही छोटा शहर है लेकिन पर्यटचों का हमेशा आना-जाना लगा रहता है। विश्व की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी सिंधु घाटी सभ्यता, राखीगढ़ी की खोज 1963 ई. में कुछ इतिहासकारों ने की थी। तेज़ी से विकास होने की वजह से ये नगर-क्षेत्र अब विलुप्ति की कगार पर है। भारत सरकार इस शहर के महत्व को बरकरार रखने के लिए एक म्यूजियम बनाएगी।