ऐसा कभी लगा कि जब भी सुपरमार्केट जाते हैं, जरूरत से ज्यादा ही खर्च करके आते हैं? जानिए एक्सपर्ट से कि आखिर किस तरह के ट्रिक अपनाकर लोगों की जेब ढीली करवाई जाती है।
सुपरमार्केट ट्रिक
अब हर मॉल में शॉपिंग कार्ट का साइज बड़ा ही होता है। कभी सोचा है ऐसा क्यों? मार्केटिंग कंसलटेंट मार्टिन लिंडस्टॉर्म बताते हैं कि शॉपिंग कार्ट को जानबूझकर बड़ा किया गया था। देखा जाना था कि इनका साइज बढ़ाकर क्या वाकई लोग ज्यादा खरीदने लगते हैं? उनकी उम्मीदें सच तब साबित हुईं जब उन्होंने पाया कि जितना बड़ा कार्ट होता है लोग उतना ही भरकर सामान खरीदते हैं। इससे सेल में तुरंत इजाफा हुआ।
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कभी सोचा है कि खाने-पीने की चीजों को आप ज्यादातर पैक में क्यों पाते हैं? वेस्टकॉम के पूर्व सुपरमार्केट एग्जीक्यूटिव और वाइस प्रेसिडेंट जेफ वीडोर ने बताया कि लोग चाहें कितने भी पैक उठाए, घर ले जाकर उन चीजों का इस्तेमाल करने की आदत बिल्कुल नहीं बदलती। उन्हें ऐसा लगता है कि वो धीरे-धीरे पूरे पैक को खत्म करेंगे, लेकिन वो उसे उतनी ही तेजी से खत्म कर फिर से मॉल पहुंच जाते हैं।
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मार्टिन लिंडस्टॉर्म ने बताया कि औसतन उपभोक्ता को चार चीजों से ज्यादा आइटम के दाम याद नहीं रहते। उन्हें आइडिया ही नहीं रहता कि बाजार के मुकाबले वो चीजों को महंगा या सस्ता खरीद रहे हैं, बस खरीदते ही चले जते हैं।
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मॉल्स में जाते ही एक अजब सी भीनी खुशबू आने लगती है। जानते हैं ऐसा किस लिए? ऐसा जानबूझकर किया जाता है ताकि कंज्यूमर को ज्यादा देर तक रोका जा सके। खरीदारी करते हुए अगर भीनी खुशबू आती रहे तो उपभोक्ता जितना सोचकर आया रहता है उससे ज्यादा ही खरीद लेता है।