सोचिए कि आपसे दिनभर काम कराया जाए और फिर आपको उस काम के पैसे न दिए जाए, तो आप क्या सोचेंगे? ठीक ऐसा ही गृहणी यानी घर पर काम करने वाली महिलाओं के साथ होता है। महिलाएं जब घर पर काम करती हैं, जैसे- खाना बनाना, घर की सफाई, बच्चों की देखरेख आदि। तो उन्हें इसके बदले कोई वेतन नहीं मिलता। बल्कि हर गृहणी बिना किसी शिकायत, बिना किसी नाराजगी के ये काम करती हैं। तो क्या ऐसी महिलाओं के लिए कोई वेतन नहीं होना चाहिए? आखिर महिलाओं को वेतन मिले तो कितना मिलना चाहिए? चलिए इस पर नजर डालते हैं।
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क्या घर में गृहणी को मिलना चाहिए वेतन? जानें इस बारे में सबकुछ
Wed, 03 Mar 2021 02:16 PM IST
प्रकाश चंद जोशी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रकाश चंद जोशी
Updated Wed, 03 Mar 2021 02:16 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कितने घंटे करती हैं काम?
- दरअसल, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन यानी ओईसीडी की साल 2011 में एक रिपोर्ट आई। इस रिपोर्ट के मुताबिक, एक औसत भारतीय महिला दिन में लगभग छह घंटे ऐसे काम करती हैं, जिसके लिए उन्हें कोई मेहनताना नहीं मिलता। लेकिन अगर यही काम बाहर से करवाए जाएं, तो इन कामों की एक निश्चित कीमत होगी। लेकिन असल जिंदगी में ऐसा नहीं होता है। जब घर पर महिलाएं काम करती हैं, तो उन्हें कोई वेतन नहीं दिया जाता है।
रुपये
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कितनी सैलरी होनी चाहिए?
- सवाल ये भी है कि आखिर एक गृहणी को कितनी तनख्वाह यानी सैलरी मिलनी चाहिए। इसको लेकर कई साल पहले तत्कालीन महिला एवं बाल कल्याण मंत्री कृष्णा तीरथ ने कहा था कि, महिलाओं द्वारा किए जाने वाले घर के काम का मौद्रिक आंकलन किया जाना चाहिए। साथ ही इसके बराबर का मूल्य उन्हें अपने पतियों से मिलना चाहिए। हालांकि, ये बात मौजूदा समय में सिर्फ एक बात ही बनी हुई है, और इस पर कोई विचार नहीं हुआ है।
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कई काम करती हैं गृहणी
- एक महिला को कितनी सैलरी मिलनी चाहिए? इस सवाल के जवाब में मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में मानुषी छिल्लर ने कहा था कि दुनिया की सभी मां सबसे ज्यादा सैलरी की हकदार हैं। महिलाएं घर पर खाना बनाने, कपड़े धोने, बच्चों की देखभाल, घर-बच्चों की देखरेख, घर के खर्चों को देखना, घर के लिए सामान खरीदना, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई करवाना, सास-ससुर का ध्यान रखना, घर के बजट का ध्यान रखने जैसे कई अन्य काम महिलाएं करती हैं।
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होनी चाहिए महिलाओं की हिस्सेदारी?
- अर्थशास्त्रियों की मानें तो, गृहणी घर में जो भी काम करती हैं, उसका मेहनताना उन्हें नहीं दिया जाता है, लेकिन उनका काम आर्थिक गतिविधियों में शामिल जरूर होता है। यही नहीं, इसे राष्ट्रीय आय में भी जोड़ा जाना चाहिए। लेकिन ऐसा न करके हम आर्थिक विकास में महिलाओं की हिस्सेदारी कम कर रहे हैं। बदलते समय में हम महिलाओं के बराबरी के हक की बात करते हैं, लेकिन बात जब गृहणी को मिलने वाले वेतन की होती है, तो इस पर कोई सटीक जवाब नजर नहीं आता है। लेकिन उनके काम और मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।