UNICEF Child Marriage: बाल विवाह एक अपराध है जो बच्चों के अधिकारों का अतिक्रमण करता है। बाल विवाह के कारण हिंसा, शोषण और यौन शोषण का खतरा बढ़ जाता है। लड़कियों और लड़कों दोनों पर ही बाल विवाह का दुष्प्रभाव होता है। हालांकि लड़कियों पर बाल विवाह का अधिक प्रभाव होता है। सबसे पहले तो हमें ये पता होना चाहिए कि लड़के या लड़की का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले होना बाल विवाह की श्रेणी में आता है। बाल विवाह के अंतर्गत औपचारिक विवाह और अनौपचारिक संबंध भी आते हैं, जिसमें 18 साल से कम उम्र के बच्चे शादीशुदा जोड़े की तरह रहते हैं।
UNICEF: कम उम्र में लड़की की शादी करने की न करें गलती, बेटी के जीवन पर पड़ेगा ऐसा असर
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बाल विवाह का दुष्प्रभाव
बाल विवाह आपके बच्चे का बचपन खत्म कर देता है। उम्र से पहले शादी होने पर बच्चा शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से वंचित रह जाता है और इसका नकारात्मक असर होने लगता है। इस नकारात्मकता का सीधा असर लड़के-लड़कियों के साथ ही परिवार और समुदाय पर भी होता है। बाल विवाह का असर आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ्य तीनों पर ही होता है, जो लड़का-लड़की, उनके परिवार, समाज और देश सभी को प्रभावित करता है। ये रहे कम उम्र में बच्चों की शादी करने के दुष्प्रभाव।
शिक्षा से वंचित
कम उम्र में बेटी की शादी करने से वह स्कूल से दूर हो जाती हैं। बच्चे पर परिवार की जिम्मेदारियां आ जाती है। अशिक्षा से अज्ञानता बढ़ती है और बच्चों के मस्तिष्क का विकास भी गलत तरीके से होने की संभावना बढ़ती है। वह स्वास्थ्य के प्रति भी लापरवाह हो जाते हैं।
स्वास्थ्य पर असर
नाबालिग होते हुए उनके गर्भवती होने और बच्चे को जन्म देने की स्थिति आ जाती है। इसका असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है और शिशु के स्वास्थ्य पर भी। अशिक्षा और अज्ञानता के कारण गर्भावस्था और प्रसव के दौरान गंभीर समस्याओं के चलते अक्सर नाबालिग लड़कियों की मृत्यु हो जाती है। एड्स और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी बढ़ जाता है।
आर्थिक असर
बाल विवाह के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ता है और पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों को गरीबी की ओर धकेलता है। जिन लड़कों या लड़कियों की शादी कम उम्र में हो जाती है, उनके पास अपने परिवार की गरीबी दूर करने और देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देने का कौशल नहीं होता। ज्ञान की कमी के कारण नौकरी करने की क्षमता उनमें कम होती है। जल्द शादी से बच्चे भी जल्दी ही होते हैं और घरेलू खर्च का बोझ बढ़ता है।