दीपा श्रीवास्तव
पति-पत्नी के रिश्ते में हंसी-मजाक जरूरी है। यह संबंधों में मजबूती लाता है, लेकिन कहीं आप का या उनका यह मजाक तंज का रूप तो नहीं ले रहा?
नवीन और राधिका शादी के बाद से ही एक-दूसरे के हंसी-मजाक भरे व्यवहार के मुरीद थे। मगर शादी के दस साल बाद अब राधिका को नवीन का यह रवैया अच्छा नहीं लगता है। दरअसल, नवीन कई बार मजाकिया अंदाज में राधिका को ताने मार देता है, जो उसे पसंद नहीं आता और देखते-देखते दोनों के बीच बहस हो जाती है। नवीन और राधिका की तरह कहीं आपके रिश्ते में भी तो यह परेशानी नहीं आ रही?
मजाक के मायने
रिश्तों में हंसी-मजाक का बहुत महत्व है, क्योंकि इससे रिश्तों की दूरी कम होती है। मगर कई बार हंसी-मजाक गलतफहमी का कारण भी बन सकता है, खासकर तब, जब एक साथी भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस कर रहा हो। मजाक करना एक भाव है, जिसके कई मायने हैं। इसलिए किसी को अपमानित करना, किसी की बेबसी पर हंसी उड़ाना या किसी पर मनचाहा तंज करना कभी भी मुस्कुराहट की वजह नहीं बन सकता।
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वाद हो, विवाद नहीं
अक्सर हम अपने इर्द-गिर्द ऐसे लोगों को देखते हैं, जो अपनी बात को किसी भी तरह से कह देते हैं और जब सामने वाले को बुरा लगता है तो उसे मजाक का नाम दे देते हैं। हमेशा ध्यान रखें कि मजाक ऐसा हो, जिसमें बोलने और सुनने वाला, दोनों हंसें। ऐसा न हो कि सामने वाला आहत हो रहा हो। यह स्थिति रिश्तों में दरार लाती है और मजाक विवाद का कारण बन जाता है।
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पर्सनल अटैक नहीं
सोनाली की पुरानी सहेली टीना के घर में पार्टी थी। टीना का पति रोहन पार्टी में लेट आया। डिनर टेबल पर आते ही सोनाली ने कहा, “रोहन, तुम लेट हो।” इतने में टीना ने तपाक से कहा, “इनका तो रोज का है।” बात छोटी-सी थी, मगर दोनों की डिनर टेबल पर ही लड़ाई हो गई। टीना बोली, “मैंने मजाक किया था”, लेकिन रोहन को वह बेइज्जती लगी। पति-पत्नी का संबध थोड़ा हंसी-मजाक तो एक-दूसरे को समझने-समझाने का भी है। ऐसे में कई बातें पर्सनल अटैक की तरह लगती हैं, इसलिए आपको समय और जगह का ध्यान रखना चाहिए।
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संवेदनशील मुद्दे
कभी-कभी मजाक ऐसी बातों पर होता है, जो व्यक्ति के लिए संवेदनशील या व्यक्तिगत होती हैं, जैसै कि माता-पिता, भाई-बहन या फिर कोई करीबी। ऐसे में एक बार के लिए सामने वाला आपकी बातों को मजाक में उड़ा सकता है, लेकिन बार-बार कहना विवाद उत्पन्न करता है, जिससे रिश्ते पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साथी को ठेस पहुंचती है और यह नोक-झोंक लड़ाई का रूप ले सकती है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें।
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स्पष्ट और ईमानदार संवाद
मनोवैज्ञानिक सीमा रहमान कहती हैं, पति-पत्नी का संबध हंसी-मजाक, नोक-झोंक और एक-दूसरे को समझने-समझाने का है। मगर इस रिश्ते में अक्सर हम बहुत-सी बातें, जो मन में चल रही होती हैं, जिनको हम कह नहीं पाते है, उनको मजाक में बोल देते हैं। वहीं अगर सामने वाले को बुरा लग जाता है तो कह देते हैं, “अरे मैं तो मजाक कर रहा था या कर रही थी।” लेकिन किसी भी रिश्ते में संवाद जितना स्पष्ट और ईमानदारी भरा होगा, वह रिश्ता उतना ही बेहतर रहेगा। इसलिए जो बातें आपको परेशान करती हैं, उन पर स्पष्ट बातचीत कीजिए, लेकिन घुमा-फिराकर या हंसी-मजाक का परदा डालकर बात मत कीजिए। आप दोनों के इस प्यार भरे बंधन में हंसी-मजाक रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए होना चाहिए, बातों या भावनाओं पर पर्दा डालने के लिए नहीं।