Relationship Tips For Mother in law: परिवार में किसी न किसी बात पर विवाद होना स्वाभाविक है।। पति-पत्नी के विवाद के अलावा सबसे प्रचलित सास-बहू का रिश्ता है जो काफी नाजुक भी होता है और खास भी। हर सास अपनी बहू को बेटे के साथ अपने अधिकार, अपनी जिम्मेदारियां सौंप देती है और इस बात की उम्मीद करती है कि उनकी बहू परिवार को संभाले।
सास मां बनकर बहू को ये सिखाने और समझाने की कोशिश करती हैं कि परिवार कैसे संभालना है, लेकिन कई बार बहू इसे सास का अधिकार जमाना समझ उनकी बातों को अनदेखा कर जाती है। सास को लगता है कि बहू उनकी बात नहीं मानती या उनका सम्मान नहीं करती। ऐसे में सास-बहू के बीच अनबन होना सामान्य है।
स्वाभाविक है कि जिस महिला ने सालों घर-परिवार को संभाला, वह बेटे की शादी के बाद बहू से भी उसी ढंग से परिवार और रिश्ते संभालने की उम्मीद रखती है। लेकिन बहू जिसकी अपनी अलग जीवनशैली, पसंद और विचार होते हैं, उनका घर परिवार को संभालने का तरीका भी सास से अलग हो सकता है।
ऐसे में सास और बहू के बीच खटपट होने लगती है। कई बार तो झगड़े और विवाद इतने बढ़ जाते हैं कि बहू ससुराल में रहना ही नहीं चाहतीं। अगर आपकी बहू ससुराल में रहना नहीं चाहती है या सास ससुर की आपकी बात नहीं मानती है तो कुछ तरीके अपनाकर रिश्ते टूटने से बचाए जा सकते हैं और बहू को खुशी -खुशी ससुराल वालों के साथ रहना सिखा सकते हैं।
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बातचीत करें
सास को चाहिए कि वह बहू से खुलकर बात करें। साथ बैठकर बात करने से गलतफहमी दूर हो सकती है। ये समझने की कोशिश करें कि बहू की नराजगी और अकड़ू रवैए की वजह क्या है। हो सकता है कि बहू को सिखाने और समझाने का जो तरीका आप अपना रही हों, वो उन्हें पसंद नहीं आ रहा या बहू आपके नियम कायदों के कारण खुद को परिवार से अलग महसूस कर रही हो।
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बहू का नजरिया समझें
आपकी बहू के अपने विचार और नजरिया हो सकते हैं। खासकर अगर पढ़ी लिखी नौकरी पेशा बहू है तो उनसे आपके वैचारिक मतभेद होना सामान्य है। ऐसे में बहू क्या चाहती है, परिवार और रिश्तों को लेकर उनका क्या नजरिया है, ये समझने की कोशिश करें और साथ ही उनके विचारों और जीवन जीने के तरीके का सम्मान करें।
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बहू को बेटी बनाएं
एक सास के तौर पर आप बहू से ये उम्मीद करती हैं कि वह आपको अपनी मां की तरह मानें। शादी के बाद बहू की प्राथमिकता आपका बेटा और ससुराल हो। इसके लिए जरूरी है कि आप बहू को बेटी की तरह मान और सम्मान दें। बेटी के लिए अलग नियम कायदे और बहू के लिए आपका अलग व्यवहार उन्हें आपसे दूर कर देगा। ऐसे में बहू सास को न तो मां मानती हैं और न ही उनकी बातें मानती हैं।
बहू को फैसलों का समर्थन
अधिकतर मामलों में बहू ससुराल में इसलिए नहीं रहना चाहती क्योंकि वह स्वतंत्रता चाहती हैं। अपने पति, बच्चों या घर के लिए वह फैसले लेना चाहती हैं लेकिन सास ससुर के होते, फैसले लेने का अधिकार उन्हें मिलना मुश्किल होता है। ऐसे में बहू को परिवार से जुड़े फैसले लेने दें। उनके फैसलों में समर्थन दें।