Relationship Tips: शादी महज दो लोगों का रिश्ता नहीं है, बल्कि दो अलग संस्कृतियों, आदतों, विचारों और अपेक्षाओं का मिलन भी है। शादी के शुरुआती समय को कपल के लिए हनीमून पीरियड माना जाता है, लेकिन प्यार और नएपन के अहसास के साथ ही शादी के पहले साल में कई छोटे-बड़े झगड़ें और गलतफहमियां भी हो सकती हैं। यही वजह है कि शादी का पहला साल "Adjustment Year " कहलाता है, यानी सामंज्य व समन्वय बनाने का साल होता है। शादी से पहले भावी दूल्हा और दुल्हन कई सारे सपने देख लेते हैं। उन्हें लगता है कि शादी के बाद वह अपने जीवनशाथी के साथ एक प्यारभरा वक्त बिताएंगे। अपने हनीमून पीरियड को एन्जाॅय करेंगे। लेकिन उन्हें उन ये पता होना चाहिए कि प्यार के साथ ही पहले साल में चुनौतियां भी आएंगी।
Relationship Tips: कपल्स ध्यान दें! शादी के पहले साल इन पांच बड़ी समस्याओं से होगा आपका सामना
Relationship Tips : इस लेख में ऐसी उन पांच सबसे आम चुनौतियों के बारे में बताया जा रहा है, जिनका सामना लगभग हर नवविवाहित जोड़ा करता है। इन समस्याओं को समझकर पहले से ही मानसिक तौर पर इनके लिए तैयार रहें और साथ ही आसान समाधान जानकर आने वाली चुनौतियों का सामना करें।
अपेक्षा बनाम वास्तविकता का टकराव
शादी के बाद सबसे पहली चुनौती यह होती है कि हर पार्टनर से पहले से ही कुछ सपने बुन लिए होते हैं। लेकिन जब रोजमर्रा की जिंदगी शुरू होती है तो ये कल्पनाएं टूटने लगती हैं। ग्वालियर की पूनम कहती हैं कि उनकी शादी दिल्ली में नौकरी कर रहे हिमांशु के साथ तय हुई तो उन्होंने सोचा कि वह पूरा दिल्ली घूम लेंगी। इंस्टा रील पर दिखने वाले खूबसूरत कैफे जाएंगी। लेकिन जब वह दिल्ली आईं तो ससुराल और घर की जिम्मेदारी में उलझ गईं। शादी के पहले दो महीने तो उनके मन के मुताबिक रहे लेकिन धीरे-धीरे महीने में एक बार भी पति के साथ बाहर घूमने जाना मुश्किल होने लगा। उन्हें लगने लगा कि ऐसा कुछ तो उन्होंने अपनी शादी को लेकर सोचा ही नहीं था।
शादी को लेकर सपने बुनना, उम्मीद रखना गलत नहीं ,लेकिन उन अपेक्षाओं का टकराव जब वास्तविकता से होता है तो रिश्ते में तनाव आना स्वाभाविक है। अगर ऐसी स्थिति से आपका सामना हो तो परेशान होने के बजाय पार्टनर से खुलकर बात करें। हर चीज की सहमति जरूरी नहीं लेकिन समझदारी जरूरी है।
घर के काम और जिम्मेदारियों का बंटवारा
शादी के बाद पति और पत्नी दोनों के जीवन में बदलाव आता है। उनके ऊपर घर-परिवार की जिम्मेदारी आ जाती है, साथ ही काम भी बढ़ जाता है। अभी तक घर के बच्चों की तरह रह रहे दो लोग जब मिलकर जिम्मेदारियां और काम का बंटवारा करते हैं तो कुछ मनमुटाव संभव है। लड़के को लगता है कि वह परिवार की पूरी जिम्मेदारी उठा रहा है और वहीं पत्नी को लगता है कि वह घर के सारे काम अकेले कर रही है। इस तरह के विचारों के कारण अक्सर कुछ डायलाॅग आम हो जाते हैं, जैसे तुमने क्यों नहीं किया?, मैं ही हमेशा क्यों करूं।
शादी से पहले मानसिक तौर पर तैयार रहें कि आपको जीवनसाथी के प्यार और समर्थन के साथ ही जिम्मेदारियां और काम भी संभालने होंगे। वह भी बिना इस अपेक्षा कि पार्टनर आपसे कम या ज्यादा जिम्मेदारी उठाए। इस तरह की समस्या का सामना करने के लिए कपल को हर हफ्ते अपने कामों का बंटवारा प्लान कर लेना चाहिए और टीम की तरह काम करना चाहिए।
ससुराल या माता-पिता के साथ तालमेल
शादी के बाद अपने पार्टनर के परिवार से तालमेल बैठाना आसान नहीं होता। कपल एक दूसरे के करीब तो आ जाते हैं लेकिन एक-दूसरे के माता-पिता को अपने परिवार की तरह समझने में वक्त लगाते हैं। जीवनसाथी के माता-पिता और अपने अभिभावक दोनों को समान सम्मान और प्रेम देना लड़का और लड़की दोनों के लिए चुनौती बन जाता है। उनके तालमेल न बैठा पाने का असर जीवनसाथी के विचारों पर भी होता है और शिकायतें जन्म लेती हैं। विवाद की स्थिति से बचने के लिए सहनशील बनें। जीवनसाथी अगर ये उम्मीद करे कि आप उनके माता पिता को अपनाएं लेकिन आपके लिए यह आसान नहीं है तो अपने पक्ष को प्यार से समझाएं। परिवारों को एक करने की कोशिश करें और पार्टनर के साथ उनके परिवार को अपनाने के लिए भी तैयार रहें।
पैसे और खर्चों को लेकर बहस
दोनों नौकरीपेशा हों या कपल में कोई एक कामकाजी हो, दोनों ही स्थिति में पैसों और खर्च को लेकर बहस स्वाभाविक है। अक्सर शादी के कुछ महीनों बाद झगड़ों का एक कारण इस तरह के सवाल होते हैं, पैसे कहां गए?, इतना क्यों खर्च किया? अब क्या पूछ कर खर्च करूं?, मेरी भी कुछ जरूरतें हैं? आदि। इन मुद्दों पर होने वाले झगड़े रिश्ते में दूरी ला सकते हैं। पैसों और घर खर्च को लेकर आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए बजट बनाएं और वित्तीय लक्ष्य मिलकर तय करें, ताकि उसी के अनुरूप खर्च कर पाएं।