Hartalika Teej 2025: हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का काफी महत्व है, जिसे भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें व्रती महिलाओं को पूरे 24 घंटे निर्जल रहकर उपवास करना होता है।
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Hartalika Teej 2025: शिव-पार्वती के रिश्ते से हर विवाहित जोड़े को सीखनी चाहिए ये बातें
Sun, 17 Aug 2025 11:01 AM IST
श्रुति गौड़
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रुति गौड़
Updated Sun, 17 Aug 2025 11:01 AM IST
सार
Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि ये शिव और पार्वती के अटूट प्रेम, समर्पण और संयम की प्रतीक भी है। ऐसे में हम आपको बताएंगे ऐसी कुछ बातें, जो हर कपल को उनसे सीखनी चाहिए।
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शिव-पार्वती के प्रेम से हर विवाहित जोड़े को सीखने चाहिए ये बातें
- फोटो : Adobe stock
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समर्पण और धैर्य की परीक्षा
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समर्पण और धैर्य की परीक्षा
किसी भी रिश्ते में समर्पण और धैर्य सबसे अहम होता है। ये चीज हर कपल को माता पार्वती और भोलेनाथ से सीखनी चाहिए। जैसे कि पार्वती जी ने भगवान शिव को पाने के लिए वर्षों तक कठोर तप किया। इसीलिए ध्यान रखें कि सच्चे प्रेम में समय, धैर्य और समर्पण की अहम भूमिका होती है। कोई भी रिश्ता जल्दी में नहीं, बल्कि समझ और इंतजार से मजबूत बनता है।
किसी भी रिश्ते में समर्पण और धैर्य सबसे अहम होता है। ये चीज हर कपल को माता पार्वती और भोलेनाथ से सीखनी चाहिए। जैसे कि पार्वती जी ने भगवान शिव को पाने के लिए वर्षों तक कठोर तप किया। इसीलिए ध्यान रखें कि सच्चे प्रेम में समय, धैर्य और समर्पण की अहम भूमिका होती है। कोई भी रिश्ता जल्दी में नहीं, बल्कि समझ और इंतजार से मजबूत बनता है।
एक-दूसरे के सच को अपनाना
- फोटो : adobe stock
एक-दूसरे के सच को अपनाना
किसी भी कपल को अपने पार्टनर की जिंदगी के सच को झुठलाना नहीं चाहिए। ठीक वैसे ही जैसे माता पार्वती ने भोलेनाथ को स्वीकार किया। भगवान शिव तपस्वी, औघड़, और भौतिक सुखों से दूर रहने वाले देवता थे। फिर भी पार्वती जी उनके रूप, जीवनशैली और आदतों के साथ उन्हें स्वीकारा। जीवनसाथी को जैसे वो हैं, वैसे ही अपनाना चाहिए।
किसी भी कपल को अपने पार्टनर की जिंदगी के सच को झुठलाना नहीं चाहिए। ठीक वैसे ही जैसे माता पार्वती ने भोलेनाथ को स्वीकार किया। भगवान शिव तपस्वी, औघड़, और भौतिक सुखों से दूर रहने वाले देवता थे। फिर भी पार्वती जी उनके रूप, जीवनशैली और आदतों के साथ उन्हें स्वीकारा। जीवनसाथी को जैसे वो हैं, वैसे ही अपनाना चाहिए।
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समानता और सम्मान का रिश्ता
- फोटो : adobe stock
समानता और सम्मान का रिश्ता
हर कपल को सीखना चाहिए कि रिश्ता समानता और सम्मान का होता है। ठीक वैसे ही, जैसे कि शिव-पार्वती का रिश्ता बराबरी का है। वे एक-दूसरे की सलाह लेते हैं, संवाद करते हैं और हर निर्णय में भागीदारी निभाते हैं। पति-पत्नी का रिश्ता मालिक-नौकर जैसा नहीं, बल्कि दो बराबर आत्माओं का मेल होता है।
हर कपल को सीखना चाहिए कि रिश्ता समानता और सम्मान का होता है। ठीक वैसे ही, जैसे कि शिव-पार्वती का रिश्ता बराबरी का है। वे एक-दूसरे की सलाह लेते हैं, संवाद करते हैं और हर निर्णय में भागीदारी निभाते हैं। पति-पत्नी का रिश्ता मालिक-नौकर जैसा नहीं, बल्कि दो बराबर आत्माओं का मेल होता है।
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मतभेदों में भी प्रेम बनाए रखना
- फोटो : adobe stock
मतभेदों में भी प्रेम बनाए रखना
कपल को ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी रिश्ते मे मतभेद होना गलत नहीं है, लेकिन मनभेद का होना बेहद गलत है। ठीक वैसे जैसे कि भगवान शिव और माता पार्वती के बीच भी कभी-कभी मतभेद हुए लेकिन उन्होंने कभी रिश्ते को खत्म नहीं किया, बल्कि संवाद और प्रेम से सुलझाया। हर रिश्ते में मतभेद होंगे, लेकिन इन्हें कभी अहमियत नहीं देनी चाहिए। हमेशा समझदारी और प्रेम बड़ा होना चाहिए।
कपल को ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी रिश्ते मे मतभेद होना गलत नहीं है, लेकिन मनभेद का होना बेहद गलत है। ठीक वैसे जैसे कि भगवान शिव और माता पार्वती के बीच भी कभी-कभी मतभेद हुए लेकिन उन्होंने कभी रिश्ते को खत्म नहीं किया, बल्कि संवाद और प्रेम से सुलझाया। हर रिश्ते में मतभेद होंगे, लेकिन इन्हें कभी अहमियत नहीं देनी चाहिए। हमेशा समझदारी और प्रेम बड़ा होना चाहिए।