प्रज्ञा पाण्डेय
दोस्ती एक भावनात्मक बंधन है। इसमें एक लगाव होता है, लेकिन सोशल मीडिया के दौर ने दोस्ती की परिभाषा को थोड़ा बदल दिया है। अब आपको दोस्तों से मिलने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं, बल्कि वे फोन या लैपटॉप के जरिये आपके घर में हो सकते हैं। आज के दौर में सोशल मीडिया पर दोस्ती बहुत आसान हो गई है, वहीं वास्तविक दोस्ती करना हमेशा से कठिन रहा है और आज भी है। लेकिन क्या सोशल मीडिया मित्र, वास्तविक जीवन मित्र के विकल्प हो सकते हैं?
असली दोस्ती, विश्वास और गहरे जुड़ाव पर आधारित होती है। सोशल मीडिया फ्रेंडशिप आमतौर पर लाइक और कमेंट पर टिकी होती है।
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संतुष्टि और लगाव
वास्तविक जीवन में मौजूद दोस्तों से बेहद लगाव होता है। ऐसे में उन दोस्तों के भौतिक रूप से मौजूद होने से गहरा भावनात्मक जुड़ाव और अपने अनुभव साझा करने से संतुष्टि मिलती है। इसका आपके स्वास्थ्य पर भी अच्छा असर पड़ता है। करीबी मित्र कठिन समय में आपका सहारा बनते हैं तो आपके साथ खुशियां भी बांटते हैं। उदास होने पर न केवल आपके दिल का हाल सुनते हैं, बल्कि आपका मनोरंजन भी करते हैं। इसके अलावा वास्तविक दोस्त एक साथ किसी कार्यक्रम में सम्मिलित हो सकते हैं, जैसे कि पार्टी, संगीत समारोह, यात्रा या सिर्फ घूमना। सोशल मीडिया के मित्र विचार में आते तो जरूर हैं, लेकिन उनके साथ अनुभवों को साझा करने के लिए वैकल्पिक संभावनाएं नहीं होती हैं।
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सोशल मीडिया पर चुनाव क्यों
सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफार्म है, जहां किसी से दोस्ती करना बहुत आसान है। आप न केवल दोस्ती करती हैं, बल्कि अपने मन की बातें भी कह सकती हैं। लेकिन वास्तविक जिंदगी में मित्रता करने से पहले आप कई बार सोचती हैं कि आप जिसकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रही हैं, वह आपके बारे में क्या सोचती है
जरूरत के समय सहारा
वास्तविक दोस्त जरूरत के समय मदद के लिए पहुंच जाते हैं। वे समर्थन, सहानुभूति या मुश्किल समय में बातचीत करके मन को शांति प्रदान कर सकते हैं। सोशल मीडिया के मित्र इस प्रकार की मुश्किलों में आपकी न तो सहायता कर सकते हैं और न ही भावनात्मक सहयोग कर सकते हैं।
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धोखे की आशंका
सोशल मीडिया के मित्रों से धोखा मिलने की आशंका वास्तविक मित्रों की तुलना में अधिक होती है। वास्तविक दोस्त को आपके इर्द-गिर्द जानने वालों की संख्या अधिक होती है और आप समय रहते कोई भी जानकारी प्राप्त होने पर उसकी जांच कर सकती हैं। लेकिन ऑनलाइन दोस्ती में सहेली या दोस्त को जानने वाले आपके अलावा कम लोग होते हैं। ऐसे में उनकी जांच करना मुश्किल होता है।
फिर मुश्किल कहां है
सोशल मीडिया पर दिखावा अधिक है, मगर वहां आसानी से दोस्ती हो जाती है। इसलिए सोशल मीडिया फ्रेंड की संख्या वास्तविक मित्रों से अधिक होती है।