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सात्विक, संतुलित, कुछ अलग है केरल की ये मशहूर डिश ‘अवियल’
पुष्पेश पंत
Updated Mon, 09 Jul 2018 09:17 AM IST
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रेस्तरां और ढाबों में मिक्स्ड वेजिटेबल के नाम पर जो सब्जियां परोसी जाती हैं, अवियल उससे एकदम अलग और स्वादिष्ट होता है। यह केरल के पारंपरिक भोज साद्या का अभिन्न अंग है। यह पूरी तरह से सात्विक व्यंजन है। इसमें पड़ने वाली सामग्री इसे एक संतुलित आहार बनाती है।
आयुर्वेद के जानकार, हमारे एक मलयाली मित्र ने हमें इस विषय पर नए सिरे से सोचने का मौका दिया। उनका कहना है कि चूंकि गर्मी के मौसम में भूख कम लगती है। अपच और पेट की बीमारियां पैदा करने वाले विषाणु नमी और गर्मी के माफिक माहौल में तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए स्वस्थ रहने के लिए पके खाने का तापमान अधिक होना बेहतर समझा जाता है। पर इससे भी महत्वपूर्ण जिस बात को उन्होंने रेखांकित किया, वह यह थी कि आयुर्वेद के अनुसार, बाहर के तापमान की तुलना में कही अधिक क्लेश आंतरिक दाह पैदा करता है और इसलिए गर्मियों की खुराक में हमारे पुरखे उन खाद्य पदार्थों को शामिल करते थे, जिनकी तासीर ठंडी होती है। इन्हीं महाशय ने हमें यह राय दी कि हम इस बार झुलसाने वाली गर्मी के महीनों में दोपहर के भोजन में केरल के प्रसिद्ध व्यंजन ‘अवियल’ को शामिल करके देखें।
अवियल केरल के पारंपरिक भोज साद्या का अभिन्न अंग है और इसे आप मिली-जुली सब्जी यानी चालू मुहावरे में ‘मिक्सड वेजिटेबल’ कह सकते हैं, पर नाम से गलतफहमी पैदा हो सकती है। आमतौर पर उत्तर-भारत में रेस्तरों या ढाबे में जो सब्जियां पंचमेल में नजर आती हैं, उन्हें ‘अवियल’ में जगह नहीं मिलती। जो सब्जियां इसमें अनिवार्यतः पड़ती हैं, उनमें कच्चा केला, जिमीकंद, सहजन की फली, बीन की फली, चिचिंडा, सीताफल या पेठा शामिल है। आजकल कुछ लोग गाजर भी डालने लगे हैं।
इन सब्जियों को नाममात्र तेल में राई, जीरे और करी पत्ते से बघारा जाता है और पकाने की पूरी प्रक्रिया उबालकर ही संपन्न होती है। मसाले बहुत कम मात्रा में प्रयोग में लाए जाते हैं। हल्की खटास के लिए या तो तीन-चार चम्मच फेंटी हुई दही का इस्तेमाल होता है या फिर कच्चे आम के कुछ टुकड़ों का। सब्जियों को खौलते पानी में एक निश्चित क्रम से डाला जाता है- देर में पकने वाली सब्जियां पहले और शेष बाद में। जब सब्जियां लगभग पक जाएं, तो उनके बीच में थोड़ी-सी जगह बना उसमें दही, नारियल का बुरादा और करी पत्ता डाल दिए जाते हैं और इसके बाद अवियल को कुछ देर और पकाया जाता है।
इन सब्जियों को नाममात्र तेल में राई, जीरे और करी पत्ते से बघारा जाता है और पकाने की पूरी प्रक्रिया उबालकर ही संपन्न होती है। मसाले बहुत कम मात्रा में प्रयोग में लाए जाते हैं। हल्की खटास के लिए या तो तीन-चार चम्मच फेंटी हुई दही का इस्तेमाल होता है या फिर कच्चे आम के कुछ टुकड़ों का। सब्जियों को खौलते पानी में एक निश्चित क्रम से डाला जाता है- देर में पकने वाली सब्जियां पहले और शेष बाद में। जब सब्जियां लगभग पक जाएं, तो उनके बीच में थोड़ी-सी जगह बना उसमें दही, नारियल का बुरादा और करी पत्ता डाल दिए जाते हैं और इसके बाद अवियल को कुछ देर और पकाया जाता है।
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यह बात स्पष्ट है कि अवियल पूरी तरह सात्विक व्यंजन है और इसमें पड़ने वाली सामग्री इसे एक संतुलित आहार बनाती है, सुपाच्य और स्वादिष्ट। हर सब्जी का कुदरती जायका बरकरार रहता है और दही और कच्चे आम की खटास अजीर्ण को दूर करती है और पाचन शक्ति को सशक्त बनाती है। साद्या में अवियल को चावल के साथ खाया जाता है, पर आप इसका आनंद रोटी के साथ भी ले सकते हैं।
केरल में घरों में बनाया जाने वाला ‘अवियल’ लटपटा रहता है, पर हम उत्तर भारत की खुश्क गर्मी में इसे थोड़ा तरी वाला पसंद करते हैं। सबसे मजेदार बात यह है कि यदि इसे आप ठंडा होने पर भी खाएं, तो भी कोई कमी महसूस नहीं होती। यही बात केरल के खानपान में शाकाहारी स्टू के बारे में भी कही जा सकती है, जिसकी पतली तरी नारियल के दूध के कारण और भी तरावट प्रदान करने वाली बन जाती है। यदि आप मिश्रित सब्जियां न खाना चाहें, तो आप केरल की ही पुलिनकरी, एरीसरी या इंजिपुलीकरी को अजमा सकते हैं, जिनको क्रमशः कद्दू पेठा और अदरक से बनाया जाता है। इन सभी में गर्मियों के दाग के कष्ट से निवारण वाले जीरे, धनिए आदि का प्रयोग किया जाता है।
केरल में घरों में बनाया जाने वाला ‘अवियल’ लटपटा रहता है, पर हम उत्तर भारत की खुश्क गर्मी में इसे थोड़ा तरी वाला पसंद करते हैं। सबसे मजेदार बात यह है कि यदि इसे आप ठंडा होने पर भी खाएं, तो भी कोई कमी महसूस नहीं होती। यही बात केरल के खानपान में शाकाहारी स्टू के बारे में भी कही जा सकती है, जिसकी पतली तरी नारियल के दूध के कारण और भी तरावट प्रदान करने वाली बन जाती है। यदि आप मिश्रित सब्जियां न खाना चाहें, तो आप केरल की ही पुलिनकरी, एरीसरी या इंजिपुलीकरी को अजमा सकते हैं, जिनको क्रमशः कद्दू पेठा और अदरक से बनाया जाता है। इन सभी में गर्मियों के दाग के कष्ट से निवारण वाले जीरे, धनिए आदि का प्रयोग किया जाता है।