आंखें हमारे शरीर का आईना होती हैं, ये कहना गलत नहीं होगा। कई अध्ययनों से पहले से साबित हो चुका है कि आंखों में दिखने वाले बदलाव सेहत की असली कहानी बताते हैं। आंखों में लालिमा, दर्द, पीलापन या फिर दृष्टि में किसी तरह के बदलाव से आप काफी हद तक ये जान सकते हैं कि शरीर में सबकुछ सही चल रहा है या नहीं?
जानना जरूरी: आंखों के आगे धुंध क्यों छा रही है? ये डायबिटीज का संकेत है या कोई और दिक्कत
धुंधला दिखना हमेशा डायबिटीज का संकेत नहीं होता। ब्लड शुगर बढ़ने से अस्थायी धुंधलापन हो सकता है, लेकिन डायबिटिक रेटिनोपैथी, डायबिटिक मैक्युलर एडिमा, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा भी नजर प्रभावित कर सकते हैं। लगातार या बार-बार धुंधला दिखने पर आंखों की जांच कराना जरूरी है।
आंखों की समस्याओं का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं आंखों की कई समस्याओं के अलावा कुछ बीमारियों का भी आंखों की रोशनी पर असर पड़ सकता है।
- मोतियाबिंद में आंख का लेंस धीरे-धीरे धुंधला होने लगता है, जिससे चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं। रोशनी में चकाचौंध, रात में गाड़ी चलाते समय हेडलाइट से ज्यादा परेशानी और रंगों का फीका दिखना भी इसके संकेत हो सकते हैं।
- वहीं ग्लूकोमा आंख के अंदर ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण बहुत कम या बिल्कुल नहीं हो सकते हैं, लेकिन बीमारी बढ़ने पर दिखाई देना कम हो सकता है और गंभीर स्थिति में स्थायी तौर पर भी रोशनी जाने का खतरा रहता है।
बार-बार या लगातार धुंधला दिख रहा है तो केवल चश्मा बदलने या डायबिटीज मान लेने के बजाय आंखों की जांच जरूरी है।
डायबिटीज के कारण होने वाली समस्या
ब्लड शुगर बहुत बढ़ने पर आंख के लेंस में मौजूद तरल और उसके आकार में बदलाव हो सकता है। इससे आंख कुछ समय के लिए सही तरीके से फोकस नहीं कर पाती और धुंधला दिखाई दे सकता है। यह धुंधलापन ब्लड शुगर नियंत्रित होने के बाद ठीक हो सकता है।
- लेकिन लंबे समय तक बढ़ा रहने वाला ब्लड शुगर आंख की रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचाता है।
- इससे डायबिटिक रेटिनोपैथी हो सकती है। शुरुआत में इसके लक्षण नहीं दिखते, लेकिन आगे चलकर इससे नजर धुंधली होने, आंखों के सामने तैरते धब्बे जैसी समस्याएं हो सकती है।
- डायबिटीज के मरीजों को अपने शुगर लेवल को कंट्रोल रखने पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए।
कहीं ये मोतियाबिंद तो नहीं
उम्र के साथ नजर धुंधली होने की बड़ी वजह मोतियाबिंद हो सकती है। इसमें आंख का पारदर्शी लेंस धीरे-धीरे धुंधला हो जाता है। इसका असर बढ़ने पर चीजें धुंधली दिखाई देने लगती हैं और रंग भी स्प्टट नहीं दिखते। मोतियाबिंद के कारण तेज रोशनी या रात में सामने से आती गाड़ी की हेडलाइट से चकाचौंध की शिकायत भी हो सकती है। डायबिटीज इसके खतरे को बढ़ा सकती है और कम उम्र में भी यह समस्या हो सकती है।
ग्लूकोमा की समस्या
ग्लूकोमा आंख से जुड़ी ऐसी बीमारी है जिसमें ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है। यह नर्व आंख से मिलने वाली जानकारी को दिमाग तक पहुंचाती है। ग्लूकोमा की शुरुआती चरणों में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता। बीमारी बढ़ने पर नजर के किनारों से दिखाई देना कम हो सकता है और धीरे-धीरे स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। डायबिटीज वाले लोगों में ओपन-एंगल ग्लूकोमा का खतरा लगभग जाता पाया गया है। यही कारण है कि डायबिटीज के साथ आंखों की नियमित जांच जरूरी है।
हाई ब्लड प्रेशर भी हो सकता है कारण
डायबिटीज के अलावा यदि लंबे समय तक ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में न रहे तो इसका असर भी आंखों पर पड़ सकता है। आंख के पीछे मौजूद रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाएं लगातार बढ़े हुए ब्लड प्रेशर से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इस स्थिति को हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी कहा जाता है।
इसमें धुंधला दिखने, नजर में बदलाव या देखने में परेशानी हो सकती है। गंभीर मामलों में रेटिना को नुकसान पहुंचने से दृष्टि भी प्रभावित हो सकती है। आंखों की रोशनी ठीक रखने के लिए शुगर और बीपी दोनों को कंट्रोल रखना जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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