यूं तो डायबिटीज बड़ी समस्या है, लेकिन कई बार इस समस्या से बचने के लिए लोग अन्य दिक्कतों को खुद ही आमंत्रित कर बैठते हैं। कई लोग बिना सोचे-समझे कृत्रिम मिठास का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। उन्हें लगता है कि इससे वह डायबिटीज से बचे रहेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है। कई बार कृत्रिम मिठास के इस्तेमाल से लोगों के शरीर में पाचन क्रिया पर विपरीत असर पड़ता है। इसका इस्तेमाल आंतों में मौजूद बैक्टीरिया पर नकारात्मक असर डालता है। यह आपकी भूख, पाचनशक्ति और शारीरिक क्षमता को प्रभावित करता है।
डॉ. पायल शर्मा, सीनियर डाइटीशियन बताती हैं कृत्रिम मिठास से जुड़े उत्पादों का सच समझना बेहद आवश्यक है। इनके कई स्वास्थ्य संबंधी खतरे हैं। इनसे सिरदर्द, एंजाइटी, डिप्रेशन और पेट में तकलीफ जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इनका प्रयोग करने से पहले चिकित्सीय सलाह लेना आवश्यक है, क्योंकि शुगर शरीर के लिए नुकसानदायक नहीं होती है। शुगर प्रोडेक्ट की अधिकता शरीर को नुकसान पहुंचाती है, इसलिए इसका इस्तेमाल सोच समझकर करना चाहिए।
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सिरदर्द
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स्वस्थ रहने के मकसद से लोग चीनी की जगह आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करते हैं। इसका प्रयोग मोटापे और दिल संबंधी बीमारियों को न्योता दे सकता है। आमतौर पर काफी मात्रा में प्रयोग में लाए जा रहे कृत्रिम मिठासों में एस्पार्टेम, सुक्रलोज और स्टेविया जैसे तत्व शामिल होते हैं। इनमें पोषक तत्वों की कमी होती है और उपापचय की क्रिया ठीक ढंग से नहीं हो पाती है। इनके इस्तेमाल से दिल की बीमारी, हाई ब्लडप्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है।
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artificial sweeteners
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शुगर फ्री गोलियां बनाते समय सेक्रीन का इस्तेमाल किया जाता है। यह पेट और लिवर दोनों पर बुरा असर डालता है और इससे कैंसर होने का खतरा भी काफी बढ़ सकता है। वहीं, आर्टिफिशियल स्वीटनर के इस्तेमाल से लोगों के पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। इसका सेवन करने से व्यक्ति को भूख नहीं लगती। जिससे जरूरी कैलोरी की कमी होने लगती है। वहीं दिल की बीमारी से परेशान लोगों को शुगर फ्री गोलियों का इस्तेमाल करने से कई तरह की दिक्कतें हो जाती हैं। ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए भी यह हानिकारक हो सकता है क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है। साथ ही इसके साइड इफेक्ट से आंखों की रोशनी कम होने की संभावना भी रहती है।
शरीर का मेटाबॉलिजम भी इससे प्रभावित होता है। आजकल खाने के बहुत से उत्पाद जैसे कोल्डड्रिंक, बिस्कुट, केक आदि शुगर फ्री बाजार में मिलते हैं। कई लोगों को लगता है कि इनका इस्तेमाल करना आम उत्पादों के इस्तेमाल से बेहतर होगा, जबकि हर केस में ऐसा जरूरी नहीं होता है। आपके उत्पाद में कौन सी कृत्रिम शुगर ली गई है। आपके शरीर को किन चीजों की कितनी मात्रा में आवश्यकता है। इसके आधार पर ही शरीर पर किसी उत्पाद का प्रभाव पड़ता है।