ऑफिस को दूसरा घर कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि नौकरी करने वालों का घर से ज्यादा समय दफ्तर में निकलता है। रोजाना 9 घंटे की शिफ्ट के बाद भी दफ्तर में बैठना कभी बोझिल नहीं लगता। इसकी वजह है हमारे साथ काम करने वाले सहकर्मी।
कुछ कलीग्स तो इतने अच्छे होते हैं कि उनके साथ परिवार जैसा लगने लगता है। घर से दूर रह रहे लोगों के लिए तो उनकी अहमियत और ज्यादा हो जाती है। वे अपनी सारी परेशानियां उनसे शेयर करते हैं।
हाल ही में एक रिसर्च में ये सामने आया है कि दफ्तर में सहकर्मियों को एक साथ वर्क रिपोर्ट दिखाने की तुलना में साथ खाना खाने से उनमें रिश्ते मजबूत होते हैं और काम की गुणवत्ता बढ़ती है। यह रिसर्च कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर केविन ने की थी।
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lunch
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विन ने यह रिसर्च 15 महीनों तक 50 फायरहाउस पर की थी, जिसमें सामने आया कि अकेले खाना खाने वाले लोगों की तुलना में साथ मिलकर खाना बनाने और खाने वाले लोगों में आत्मीय लगाव होता है और वह काम बेहतर तरीके से कर पाते हैं।
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ऑफिस रोमांस
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केविन ने बताया- जो फायरमैन साथ मे खाना खाते थे, उनका काम भी अच्छा होता था और उनकी प्रॉडक्टिविटी में पहले से इजाफा भी हुआ। इसके अलावा ये लोग जल्दी थका हारा महसूस नहीं करते थे। इतना ही नहीं दूसरी टीम के लोगों के साथ खाना खाने पर उनसे भी रिश्ते मजबूत होते हैं। कैविन ने यह भी बताया कि इस प्रवृत्ति को कंपनियों सहित सभी संगठनों में लागू किया जा सकता है।