2 अक्टूबर को देश भर में बड़ी धूमधाम के साथ गांधी जयंती मनाई जाती है। इस दिन गांधी जी का जन्म सन् 1869 को गुजरात के पोरबंदर शहर में हुआ था। इनके पिता जी करमचंद गांधी थे। ये राजकोट में दीवान थे। गांधी जी ने अपना पूरा जीवन सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए व्यतीत किया। गांधी जी हमेशा अहिंसा के बल पर आंदोलन किया जिसके लिए कई बार उन्हें जेल भी जाना पड़ा। गांधी जी ने कठिन परिस्थितियों में भी पूरे देश को एकजुटता के धागे में पिरोकर रखा। देश के प्रति उनका प्रेम, देशवासियों के प्रति लगाव के कारण इतने सालों बाद भी गांधी जी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। गांधी जयंती के मौके पर उन्हें श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। गांधी जयंती के मौके पर जानते हैं कि कैसे बैरिस्टर बनने के सपने को छोड़कर उन्होंने अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया।
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gandhi jayanti 2020
- फोटो : BBC
गांधी जी मात्र 19 वर्ष की कम उम्र में ही लॉ की पढ़ाई करने लंदन चले गए थे। वहां जाकर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और लॉ की डिग्री प्राप्त की। बैरिस्टर बनने के बाद जब वे देश वापस लौटे तो उन्होंने यहां की स्थिति देखी। देश की ऐसी स्थिति देखकर गांधी जी ने अपने बैरिस्टर बनने के सपने को छोड़कर देश की सेवा करने को ज्यादा महत्वपूर्ण समझा और अपनी पूरा जीवन देश को अंग्रेजों से आजादी देने में लगा दिया। गांधी जी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। उन्होंने नें अपने जीवनकाल में देश के हित को ध्यान में रखते हुए कई आंदोलन किए। उन्होंने देश में हर जाति-धर्म के लोगों को एकजुट किया। उन्होंनें लोगों में भाई चारे की भावना जगाई। उनकी देश भक्ति और पूरा जीवन समस्त भारतवासियों के लिए प्रेरणास्त्रोत है।
क्या होता है बैरिस्टर का पद
जो लोग वकील बनना चाहते हैं वे 12वीं के बाद लॉ (LAW) की पढ़ाई करते हैं। लॉ की डिग्री मिलने के बाद वे लोग वकील बन जाते हैं जिससे कानूनी मामलों में सलाह और सहायता करने का काम कर सकते है लेकिन उन्हें कोर्ट में किसी भी तरह का मुकदमा लड़ने की अनुमति नहीं होती है। जब लॉ की डिग्री मिलने के बाद व्यक्ति BCI (Bar council of india) से सनद प्राप्त कर लेता है उसके बाद कोर्ट में केस लड़ने के लिए अधिकृत हो जाता है। बैरिस्टर का पद वकील की तरह ही होता है लेकिन जो लोग इंग्लैंड जाकर लॉ की पढ़ाई करते हैं और किसी न्यायलय में प्रैक्टिस करते हैं। वे बैरिस्टर बनते हैं।
गांधी जी ने अपनी लॉ की डिग्री पूरी कर ली थी। वे बैरिस्टर बनकर ही भारत लौटे थे। अगर वे चाहते तो बैरिस्टर बनकर एक आरामदायक जीवन बिता सकते थे। लेकिन उन्होंने देश को इससे ऊपर रखा। अंग्रेज भी गांधी जी को बहुत सम्मान के साथ बुलाते थे। उनके आदर्शों को अगर हर भारतीय अपने जीवन में आत्मसात कर ले तो भारत विश्व में हमेशा आगे रहेगा। एक ईमानदार भ्रष्टाचार मुक्त, स्वच्छ और स्वस्थ भारत का निर्माण होगा।