भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। देश में अब तक 400 से ज्यादा लोगों में इस नए वैरिएंट से संक्रमण की पहचान की जा चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस गति से ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले बढ़ते जा रहे हैं, वह निश्चित ही चिंता बढ़ाने वाले हैं। इस खतरे से बचे रहने के लिए लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। कोरोना के इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार रात के अपने संबोधन में लोगों से कोविड-19 से बचाव के उपाय करते रहने की अपील की है। साथ ही प्रधानमंत्री ने बताया कि जल्द ही देश में डीएनए आधारित वैक्सीन की शुरुआत होने वाली है, जिसे कोरोना के खिलाफ काफी असरदार माना जा रहा है।
Covid-19: पीएम ने जिस डीएनए वैक्सीन का किया था जिक्र जानिए उसके बारे में विस्तार से, ये चीजें बनाती हैं इसे खास
दुनिया की पहली डीएनए आधारित कोविड-19 वैक्सीन
भारत ने दुनिया की पहली डीएनए आधारित कोविड-19 वैक्सीन तैयार कर ली है। अहमदाबाद स्थित फार्मास्युटिकल प्रमुख कंपनी जायडस कैंडिला ने जायकोब-डी नाम से इस वैक्सीन को तैयार किया है। अगस्त 2020 में जायकोब-डी को भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (डीसीजीआई) से आपातकालीन उपयोग की मंजूरी भी मिल चुकी है। कंपनी का दावा है कि यह वैक्सीन कोरोना के तमाम वैरिएंट्स के खिलाफ सुरक्षा दे सकती है।
डीएनए वैक्सीन क्या होती है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक जायकोब-डी एक प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन है जो प्लास्मिड नामक डीएनए अणु के गैर-प्रतिकृति वर्जन का उपयोग करके तैयार की गई है। अन्य वैक्सीनों से अलग यह निडील फ्री वैक्सीन भी है, यानि कि इसके शॉट के लिए निडिल से इंजेक्ट करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह वैक्सीन शरीर में वायरस के मेंब्रेन पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन का एक हानिरहित वर्जन तैयार करने का काम करती है जिससे बाद में होने से संक्रमण से आसानी से सुरक्षित रहा जा सकता है।
निडिल नहीं, जेट इंजेक्टर से दी जाएगी वैक्सीन
रिपोर्ट्स के मुताबिक जायकोब-डी वैक्सीन देने के लिए निडिल नहीं, जेट इंजेक्टर तकनीक को प्रयोग में लाया जाएगा। जेट इंजेक्टर एक ऐसा उपकरण है जिसमें गैस या स्प्रिंग से बने दवाब के माध्यम से त्वचा में इसके शॉट दिए जाते हैं। इस शॉट में लोगों को दर्द का एहसास नहीं होगा। अध्ययनों में इस वैक्सीन को कोरोना के कई बहुत संक्रामक वैरिएंट्स के खिलाफ असरदार पाया गया है। हालांकि ओमिक्रॉन पर इसके प्रभाव को जानने के लिए अभी अध्ययन होना शेष है।
बच्चों पर भी पाई गई है असरदार
देश में फिलहाल बच्चों के लिए वैक्सीन कब तक उपलब्ध होगी, इसपर लगातार चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 15-18 साल तक के लिए वैक्सीन उपलब्ध कराने की बात कही है, हालांकि 12 साल से कम उम्र के बच्चों का टीकाकरण अब भी नहीं हो सका है। अध्ययनों में पाया गया है कि डीएनए वैक्सीन जायकोब-डी बच्चों पर भी असरदार हो सकती है। कंपनी द्वारा ड्रग नियामक को सौंपे गए डेटा के मुताबिक कोरोना के खिलाफ इस वैक्सीन की प्रभाविकता 66.6 फीसदी से अधिक की मानी जा रही है।
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स्रोत और संदर्भ:
नोट: यह लेख वैक्सीन की निर्माता कंपनी जायडस कैडिला द्वारा साझा की गई जानकारियों के अलावा तमाम मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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