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सेहत की बात: ऊनी कपड़ों से भी हो सकती है एलर्जी की समस्या, जानिए इसके लक्षण और बचाव के तरीके

Sun, 26 Dec 2021 05:53 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 26 Dec 2021 05:53 PM IST
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woolen clothes allergy causes and prevention, what expert says
सर्दियों में एलर्जी की समस्या - फोटो : iStock

गरम कपड़े सर्दी से बचाव के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण और मजबूत सुरक्षा कवच होते हैं। ये ठंडी हवाओं, तापमान में गिरावट आदि के हमले से शरीर को बचाते हैं लेकिन अगर यही कपड़े मुश्किल खड़ी करने लगें तो? सर्दियों में वूलन एलर्जी भी उतनी ही आम होती है जितनी ठंड से जुड़ी अन्य समस्याएं। खासकर छोटे बच्चों और सेंसेटिव स्किन वालों के लिए ये बड़ी समस्या बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि सर्दी के मौसम में इस एलर्जी को लेकर भी सतर्क रहा जाए।



सर्दियों में अगर गरम कपड़े पहनने के बाद आपको त्वचा पर खुजली, जलन या लाली आना, नाक बहना, आंखों से पानी आना, सांस लेने में तकलीफ जैसी दिक्क्तें होती हैं तो ये ऊनी कपड़ों से एलर्जी के शिकार के लक्षण हो सकते हैं। ऐसा केवल ऊनी कपड़ों से ही नहीं, सॉफ्ट टॉयज़ या कंबल आदि की वजह से भी हो सकता है। बात थोड़ी अजीब लगेगी लेकिन ये बहुत ही आम समस्या में से एक है। इस समस्या को क्लोदिंग डर्मेटाइटिस भी कहते हैं। यह तब होता है जब आपका शरीर पहने या अन्य उपयोग में लाए गए कपड़ों या अन्य वस्तुओं के फाइबर, डाई (रंग) या अन्य रसायनों को लेकर प्रतिक्रिया देता है। आइए इसके बारे में आगे की स्लाइडों में विस्तार से जानते हैं।

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त्वचा संबंधी समस्या - फोटो : Pixabay

सर्दियों में इन बातों को लेकर रहें सतर्क
यह जरूरी नहीं कि केवल एलर्जी की वजह से ही आपको यह समस्या हो। सेंसेटिविटी के मामले में असर उतना अधिक नहीं होता और केवल ऊपरी सतह तक ही होता है। सेंसिटिविटी पैदा करने वाली वस्तु को हटाते ही समस्या खत्म भी हो जाती है। इसके उलट एलर्जी का असर अधिक समय तक रहने वाला और गंभीर भी हो सकता है।

गंभीर लक्षणों में अस्थमा, सांस का दिक्कत, साइनोसाइटिस, कान या फेफड़ों का संक्रमण या ब्लड प्रेशर के असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ज्यादातर एलर्जी के मामलों में एक-दो बार के बाद लक्षणों के उभरने से यह समझ आने लगता है कि कौन सी चीज वजह बन रही है? डॉक्टर से जांच के अलावा कुछ सामान्य से टेस्ट भी यह स्पष्ट कर सकते हैं कि एलर्जी का कारण क्या है?

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त्वचा पर खुलजी या चकत्ते - फोटो : iStock

इन बातों का रखें ख्याल

ऊनी कपड़ों से होने वाली एलर्जी का कारण अधिकांशतः लेनोलिन होता है। लेनोलिन एक प्रकार की सुरक्षात्मक वैक्स परत होती है जो भेड़ों या अन्य स्तनपाइयों (जानवरों) के बालों पर पाई जाती है। चूंकि आजकल भेड़ों के ऊन के बजाय सिंथेटिक व अन्य आर्टिफिशियल मटेरियल भी गरम कपड़ों को बनाने में इस्तेमाल होता है इसलिए एलर्जी का कारण रंग और कैमिकल्स भी हो सकते हैं। इसलिए सबसे पहला तरीका है गरम कपड़े खरीदते समय इस बात का ख्याल रखना कि वह किस मटेरियल से बना है। आजकल बाजार में प्राकृतिक फाइबर के कपड़े भी बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं, वे एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। 

कई बार गर्म कपड़े धोने के लिए इस्तेमाल में आने वाला डिटर्जेंट भी एलर्जी का कारण बन जाता है। कपड़ों को एक बार बिना ज्यादा खुशबू और कैमिकल रहित डिटर्जेंट में धोकर देखें। यदि इसके बाद एलर्जी के लक्षण नहीं उभरते तो मतलब आपकी एलर्जी डिटर्जेंट से ही थी। यदि एलर्जी का असर सिर्फ त्वचा तक होता है तो कोशिश करें कि गरम कपड़ों के नीचे एक परत सिम्पल कॉटन के कपड़ों की पहन लें। ताकि ऊनी कपड़े त्वचा के सीधे सम्पर्क में न आएं।  त्वचा को अच्छी तरह मॉइश्चराइज़ करने से भी फायदा होता है।

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हाइजीन का रखें खास ख्याल - फोटो : Pixabay

बचाव के लिए क्या किया जाए?

  • त्वचा पर खुजली या दाने हों तो उन्हें खुजलाएं नहीं। डॉक्टर की सलाह से कोई लोशन लगा सकते हैं। ज्यादा गरम पानी से न नहाएं, न ही साबुन लगाएं। 
  • यदि आपको किसी खास रंग के कपड़े पहनने से एलर्जी होती है तो कोशिश करें कि प्राकृतिक रंगों के कपड़े ही खरीदें। 
  • यदि बच्चों के कपड़े या बिस्तर पर सॉफ्ट टॉय या अन्य मटेरियल के तकिए आदि हों तो उन्हें हटा दें। 
  • रोज नहाएं जरूर और हाइजीन का पूरा ध्यान रखें। 



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अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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