गरम कपड़े सर्दी से बचाव के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण और मजबूत सुरक्षा कवच होते हैं। ये ठंडी हवाओं, तापमान में गिरावट आदि के हमले से शरीर को बचाते हैं लेकिन अगर यही कपड़े मुश्किल खड़ी करने लगें तो? सर्दियों में वूलन एलर्जी भी उतनी ही आम होती है जितनी ठंड से जुड़ी अन्य समस्याएं। खासकर छोटे बच्चों और सेंसेटिव स्किन वालों के लिए ये बड़ी समस्या बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि सर्दी के मौसम में इस एलर्जी को लेकर भी सतर्क रहा जाए।
सेहत की बात: ऊनी कपड़ों से भी हो सकती है एलर्जी की समस्या, जानिए इसके लक्षण और बचाव के तरीके
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सर्दियों में इन बातों को लेकर रहें सतर्क
यह जरूरी नहीं कि केवल एलर्जी की वजह से ही आपको यह समस्या हो। सेंसेटिविटी के मामले में असर उतना अधिक नहीं होता और केवल ऊपरी सतह तक ही होता है। सेंसिटिविटी पैदा करने वाली वस्तु को हटाते ही समस्या खत्म भी हो जाती है। इसके उलट एलर्जी का असर अधिक समय तक रहने वाला और गंभीर भी हो सकता है।
गंभीर लक्षणों में अस्थमा, सांस का दिक्कत, साइनोसाइटिस, कान या फेफड़ों का संक्रमण या ब्लड प्रेशर के असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ज्यादातर एलर्जी के मामलों में एक-दो बार के बाद लक्षणों के उभरने से यह समझ आने लगता है कि कौन सी चीज वजह बन रही है? डॉक्टर से जांच के अलावा कुछ सामान्य से टेस्ट भी यह स्पष्ट कर सकते हैं कि एलर्जी का कारण क्या है?
इन बातों का रखें ख्याल
ऊनी कपड़ों से होने वाली एलर्जी का कारण अधिकांशतः लेनोलिन होता है। लेनोलिन एक प्रकार की सुरक्षात्मक वैक्स परत होती है जो भेड़ों या अन्य स्तनपाइयों (जानवरों) के बालों पर पाई जाती है। चूंकि आजकल भेड़ों के ऊन के बजाय सिंथेटिक व अन्य आर्टिफिशियल मटेरियल भी गरम कपड़ों को बनाने में इस्तेमाल होता है इसलिए एलर्जी का कारण रंग और कैमिकल्स भी हो सकते हैं। इसलिए सबसे पहला तरीका है गरम कपड़े खरीदते समय इस बात का ख्याल रखना कि वह किस मटेरियल से बना है। आजकल बाजार में प्राकृतिक फाइबर के कपड़े भी बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं, वे एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं।
कई बार गर्म कपड़े धोने के लिए इस्तेमाल में आने वाला डिटर्जेंट भी एलर्जी का कारण बन जाता है। कपड़ों को एक बार बिना ज्यादा खुशबू और कैमिकल रहित डिटर्जेंट में धोकर देखें। यदि इसके बाद एलर्जी के लक्षण नहीं उभरते तो मतलब आपकी एलर्जी डिटर्जेंट से ही थी। यदि एलर्जी का असर सिर्फ त्वचा तक होता है तो कोशिश करें कि गरम कपड़ों के नीचे एक परत सिम्पल कॉटन के कपड़ों की पहन लें। ताकि ऊनी कपड़े त्वचा के सीधे सम्पर्क में न आएं। त्वचा को अच्छी तरह मॉइश्चराइज़ करने से भी फायदा होता है।
बचाव के लिए क्या किया जाए?
- त्वचा पर खुजली या दाने हों तो उन्हें खुजलाएं नहीं। डॉक्टर की सलाह से कोई लोशन लगा सकते हैं। ज्यादा गरम पानी से न नहाएं, न ही साबुन लगाएं।
- यदि आपको किसी खास रंग के कपड़े पहनने से एलर्जी होती है तो कोशिश करें कि प्राकृतिक रंगों के कपड़े ही खरीदें।
- यदि बच्चों के कपड़े या बिस्तर पर सॉफ्ट टॉय या अन्य मटेरियल के तकिए आदि हों तो उन्हें हटा दें।
- रोज नहाएं जरूर और हाइजीन का पूरा ध्यान रखें।
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