दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों को रोकने के लिए वैज्ञानिक वैक्सीनेशन को ही सबसे प्रभावी उपाय के रूप में देख रहे हैं। वैक्सीनेशन की मांग को पूरा करने के लिए कई कंपनियां टीकों के निर्माण में लगी हुई हैं। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक देश को जल्द ही एक और वैक्सीन मिलने वाली है। अहमदाबाद स्थित फार्मास्युटिकल प्रमुख कंपनी जायडस कैडिला ने अपनी वैक्सीन ज़ायकोब-डी के आपातकालीन उपयोग के लिए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से मंजूरी की गुहार लगाई है। अगर डीसीजीआई इसे मंजूरी दे देती है तो यह देश की पांचवी वैक्सीन हो सकती है। इसके पहले देश में स्वदेशी कोविशील्ड और कोवैक्सीन तथा रूस की वैक्सीन स्पुतनिक वी को प्रयोग में लाया जा रहा है। हाल ही में डीसीजीआई ने अमेरिका की मॉडर्ना वैक्सीन को मंजूरी दी है, यानी कि कुल मिलाकर देश में अब तक चार वैक्सीन उपलब्ध हैं।
कोरोना से जंग: देश को जल्द मिल सकती है तीसरी स्वदेशी वैक्सीन, जानिए इससे जुड़ी हर खास बात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वैक्सीन के बारे में जानिए-
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक ज़ायकोब-डी, भारतीय दवा निर्माता जायडस कैडिला द्वारा तैयार की गई वैक्सीन है। डीसीजीआई से मंजूरी मिलने के बाद यह देश की तीसरी स्वदेशी वैक्सीन हो सकती है। यह दुनिया की पहली डीएनए प्लाजमिड वैक्सीन होगी। इतना ही नहीं देश में लग रही कोरोना की बाकी तीन वैक्सीनों से अलग ज़ायकोब-डी के तीन डोज देने की जरूरत होगी। भारत के वातारणीय संदर्भ में भी इसे काफी अच्छा माना जा रहा है, इस वैक्सीन का रखरखाव भी अन्य वैक्सीनों से आसान होगा। इसे रूम टंप्रेचर पर आसानी से ऱखा जा सकता है।
डीएनए तकनीक आधारित वैक्सीन
वैक्सीन निर्माताओं का कहना है कि यह दुनिया की पहली डीएनए तकनीक आधारित कोरोना की वैक्सीन है। नैदानिक परीक्षणों में इसके प्रभावशाली परिणाम देखने को मिले हैं। कंपनी का कहना है कि वैक्सीन को मंजूरी मिलते ही इसके तेजी से उत्पादन को बढ़ा दिया जाएगा। हर साल इस वैक्सीन के 10-12 करोड़ डोज के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य के आधार पर देश में टीके की मांग को आसानी से पूरा किया जा सकेगा।
बच्चों के लिए भी हो सकती है असरदार
देश में बच्चों की वैक्सीन कब उपलब्ध होगी, इसको लेकर लगातार चर्चा हो रही है। ज़ायकोब-डी निर्माताओं का दावा है कि यह वैक्सीन बच्चों के लिए भी असरदार साबित हो सकती है। इतना ही नहीं इसे दुनियाभर के लिए चिंताकारक डेल्टा वैरिएंट्स पर भी काफी असरदार होने का दावा किया जा रहा है। निर्माताओं का कहना है कि दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण में वैक्सीन के काफी जबरदस्त प्रभाव सामने आए हैं। उनका कहना है कि वैक्सीन की डीएनए तकनीक काफी सुरक्षित और प्रभावी है। परीक्षणों में इस वैक्सीन को सिम्टोमैटिक मामलों में 67 फीसदी तक असरदार पाया गया है।
निडिल की जरूरत नहीं
कंपनी द्वारा दी गई जानकारियों के मुताबिक वैक्सीन का निडील फ्री होना भी इसे खास बनाता है। निडिल की बजाय जेट इंजेक्टर के माध्यम से इसके टीके दिया जाएंगा। जेट इंजेक्टर एक विशेष प्रकार का उपकरण है जिसमें गैस या स्प्रिंग से बने दवाब के माध्यम से त्वचा में इसके टीके दिए जाते हैं। इस टीके को लेने में दर्द का अनुभव नहीं होगा। निर्माताओं की दावा है कि यह वैक्सीन कई मामलों में बेहद असरदार हो सकती है, फिलहाल इसके मंजूरी मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
--------------
स्रोत और संदर्भ:
Zydus applies to the DCGI for EUA to launch ZyCoV-D, the world’s first Plasmid DNA vaccine for COVID-19
अस्वीकरण नोट: यह लेख जायडस कैडिला कंपनी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।