देश में डेंगू के जारी प्रकोप के बीच जीका वायरस के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। कानपुर में अब तक 11 लोगों में जीका संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जीका के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। मच्छरों के कारण फैलने वाले इस रोग के गंभीर मामलों को काफी घातक माना जाता है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं में जीका वायरस का संक्रमण गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है, इससे भ्रूण को भी नुकसान पहुंच सकता है।
बड़ी मुसीबत: आपको लकवाग्रस्त बना सकता है जीका वायरस, ऐसे लोगों को विशेष सावधान रहने की जरूरत
जीका वायरस संक्रमण क्या है?
जीका वायरस का संक्रमण, एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है। ये मच्छर दिन और रात कभी भी काट सकते हैं। ज्यादातर मामलों में जीका का संक्रमण हल्के लक्षणों वाला होता है हालांकि इसके गंभीर मामले शरीर के कुछ अंगों जैसे मस्तिष्क या तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जीका की सबसे ज्यादा जटिलताएं गर्भवती महिलाओं में होती हैं, यह मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। शोधकर्ता जीका वायरस के टीके पर काम कर रहे हैं। अभी के लिए, संक्रमण को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है- मच्छरों के काटने से बचाव।
जीका वायरस के क्या लक्षण हैं?
जीका वायरस से संक्रमित अधिकांश लोगों में या तो कोई लक्षण नहीं होते हैं या फिर इसके लक्षण काफी मध्यम स्तर के हो सकते हैं। कुछ लोगों को हल्का बुखार, त्वचा पर चकत्ते और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। दुर्लभ मामलों में जीका वायरस मस्तिष्क या तंत्रिका तंत्र की जटिलताओं का कारण बन सकता है। गंभीर मामलो में इसके कारण गुइलेन-बैरे सिंड्रोम जैसी दिक्कत होती है, जिसमें शरीर लकवाग्रस्त हो सकता है। ऐसे लक्षणों से जीका की पहचान की जा सकती है।
- हल्का बुखार, त्वचा पर चकत्ते।
- जोड़ों, विशेष रूप से हाथों या पैरों में दर्द
- आंखों का लाल हो जाना।
- मांसपेशियों, सिर और आंखों में दर्द।
- थकान या बेचैनी।
ऐसे लोगों में होता है ज्यादा जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैसे तो जीका के ज्यादातर मामले जटिलता पैदा नहीं करते हैं, हालांकि कुछ विशेष स्थितियों में यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान जीका वायरस से संक्रमित महिलाओं में गर्भपात, समय से पहले बच्चे के जन्म और जन्म के समय बच्चे की मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था के दौरान जीका वायरस के संक्रमण से शिशुओं (जन्मजात जीका सिंड्रोम) में गंभीर जन्म दोषों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे बच्चों को कई दिक्कतें भी हो सकती हैं।
- खोपड़ी का आंशिक विकास, सिर के आकार बहुत छोटा होना (मिरोसेफली)
- ब्रेन डैमेज और मस्तिष्क के ऊतकों में कमी
- आंखों से संबंधित दिक्कत।
इसके अलावा जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, जीका उनमें भी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
जीका का क्या इलाज है?
जीका की पुष्टि के लिए ब्लड या यूरिन टेस्ट की सलाह दी जा सकती है। रोग की पहचान होने के बाद इलाज की प्रक्रिया शुरू होती है। मेडिकल रिपोर्टस के मुताबिक फिलहाल जीका का कोई विशिष्ट उपाचार उपलब्ध नहीं है, रोगियों के लक्षणों के आधार पर इसका इलाज किया जाता है। जीका में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है, ऐसे में रोगियों को अधिक से अधिक मात्रा में तरल के सेवन की सलाह दी जाती है। बुखार में खुद से ही दवाइयां लेने की गलती नहीं करनी चाहिए।