मच्छर जनित रोग जीका के मामले देश के कई राज्यों में बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। महाराष्ट्र में इस संक्रामक रोग के सबसे ज्यादा मामले रिपोर्ट किए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने मीडिया को बताया कि बुधवार (7 अगस्त) तक राज्य में जीका वायरस संक्रमण के कारण 88 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अकेले पुणे शहर में जीका के कुल 73 मामले सामने आए हैं, बुधवार को ही आठ नए मरीज भर्ती हुए हैं।
Zika Virus: जीका के 'डंक' ने डराया, ऐसे लोग हो रहे हैं सबसे ज्यादा शिकार; जानिए कैसे करें संक्रमण से बचाव
गर्भवती महिलाओं में खतरा अधिक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया मानसून के दिनों में वैसे तो कई प्रकार के मच्छर जनित रोगों का जोखिम रहता है, जीका भी उनमें प्रमुख है। गर्भवती और बच्चों में संक्रमण की स्थिति गंभीर रोगों का कारण बन सकती है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के विशेषज्ञों ने बताया, जीका वायरस गर्भवती महिला से उसके गर्भ में पल रहे बच्चे में भी फैल सकता है। गर्भावस्था के दौरान संक्रमण से कई प्रकार के जन्मजात दोष हो सकते हैं।
समय पर अगर इसका उपचार न हो पाए तो इसके कारण मौत का खतरा भी बढ़ जाता है।
भ्रूण की सेहत पर असर
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जीका के कारण न सिर्फ गर्भवती की सेहत पर नकारात्मक असर होता है साथ ही ये भ्रूण के लिए भी खतरनाक हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान जीका वायरस संक्रमण बच्चों में मस्तिष्क या आंख से संबंधित जन्मजात दोष पैदा कर सकता है। इसके कारण बच्चों के सिर का आकार छोटा होना (माइक्रोसेफली) सबसे आम है।
इसके अलावा बच्चों के मस्तिष्क के विकास की समस्याएं, खाने की समस्याएं जैसे निगलने में कठिनाई, सुनने-देखने की समस्या होना, जोड़ों की गति में कमी और मांसपेशियों में अकड़न जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
लक्षणों की समय रहते करें पहचान
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महाराष्ट्र-पुणे सहित कई शहरों में जीका के साथ डेंगू के मामले भी बढ़ रहे हैं। मच्छर जनित इन दोनों रोग के अधिकतर लक्षण एक जैसे होते हैं जिनको पहचानने में लोगों को भ्रम हो सकता है।
जीका वायरस के अधिकांश मामले आमतौर पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं में देखे जाते हैं। लक्षणों के आधार पर इसमें अंतर कर पाना कठिन है लेकिन कुछ बातें इन्हें अलग बनाती हैं। जीका का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे में हो सकता है हालांकि डेंगू का संक्रमण इस तरह से नहीं फैलता है। लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना और समय पर इलाज कराना सबसे जरूरी है।
एक से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है जीका
डेंगू और मलेरिया जैसे रोग जहां संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलते हैं वहीं जीका का खतरा एक से दूसरे व्यक्ति में भी हो सकता है। जीका से बचाव के लिए मच्छरों के काटने से खुद को खुद को सुरक्षित रखने के साथ सुरक्षित संभोग का भी ध्यान रखना जरूरी है। संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों की तुलना में वीर्य में वायरस अधिक समय तक रह सकता है, ऐसे में संक्रमण से बचाव के लिए सुरक्षित संभोग का ध्यान रखना बहुत आवश्यक हो जाता है।
डेंगू के जीका और डेंगू दोनों से बचाव के लिए मच्छरों के काटने से बचने के उपाय करना, सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना भी आपको इस रोग से सुरक्षित रखने में सहायक है।
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स्रोत और संदर्भ
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