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Zika Virus: जीका के 'डंक' ने डराया, ऐसे लोग हो रहे हैं सबसे ज्यादा शिकार; जानिए कैसे करें संक्रमण से बचाव

Thu, 08 Aug 2024 12:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 08 Aug 2024 12:40 PM IST
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मच्छर जनित रोगों का खतरा - फोटो : amarujala

मच्छर जनित रोग जीका के मामले देश के कई राज्यों में बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। महाराष्ट्र में इस संक्रामक रोग के सबसे ज्यादा मामले रिपोर्ट किए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने मीडिया को बताया कि बुधवार (7 अगस्त) तक राज्य में जीका वायरस संक्रमण के कारण 88 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अकेले पुणे शहर में जीका के कुल 73 मामले सामने आए हैं,  बुधवार को ही आठ नए मरीज भर्ती हुए हैं।



स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि जीका प्रभावित सबसे ज्यादा मामले गर्भवती महिलाओं में है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि संक्रमित लोगों में 26 गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर का स्वास्थ्य ठीक है। जीका संक्रमित चार लोगों की मौत भी चुकी है, रिपोर्ट्स के मुताबिक ये सभी कोमोरबिडिटी के शिकार थे। चारों मरीजों की उम्र 68 से 78 के बीच थी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को जीका से बचाव को लेकर अलर्ट किया है। 

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गर्भावस्था में जीका का संक्रमण - फोटो : istock

गर्भवती महिलाओं में खतरा अधिक

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया मानसून के दिनों में वैसे तो कई प्रकार के मच्छर जनित रोगों का जोखिम रहता है, जीका भी उनमें प्रमुख है। गर्भवती और बच्चों में संक्रमण की स्थिति गंभीर रोगों का कारण बन सकती है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के विशेषज्ञों ने बताया, जीका वायरस गर्भवती महिला से उसके गर्भ में पल रहे बच्चे में भी फैल सकता है। गर्भावस्था के दौरान संक्रमण से कई प्रकार के जन्मजात दोष हो सकते हैं।

समय पर अगर इसका उपचार न हो पाए तो इसके कारण मौत का खतरा भी बढ़ जाता है।

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भ्रूण से संबंधित समस्याओं का खतरा - फोटो : istock

भ्रूण की सेहत पर असर

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जीका के कारण न सिर्फ गर्भवती की सेहत पर नकारात्मक असर होता है साथ ही ये भ्रूण के लिए भी खतरनाक हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान जीका वायरस संक्रमण बच्चों में मस्तिष्क या आंख से संबंधित जन्मजात दोष पैदा कर सकता है। इसके कारण बच्चों के सिर का आकार छोटा होना (माइक्रोसेफली) सबसे आम है।

इसके अलावा बच्चों के मस्तिष्क के विकास की समस्याएं, खाने की समस्याएं जैसे निगलने में कठिनाई, सुनने-देखने की समस्या होना, जोड़ों की गति में कमी और मांसपेशियों में अकड़न जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। 

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जीका रोग के मामले - फोटो : istock

लक्षणों की समय रहते करें पहचान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महाराष्ट्र-पुणे सहित कई शहरों में जीका के साथ डेंगू के मामले भी बढ़ रहे हैं। मच्छर जनित इन दोनों रोग के अधिकतर लक्षण एक जैसे होते हैं जिनको पहचानने में लोगों को भ्रम हो सकता है। 

जीका वायरस के अधिकांश मामले आमतौर पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं में देखे जाते हैं। लक्षणों के आधार पर इसमें अंतर कर पाना कठिन है लेकिन कुछ बातें इन्हें अलग बनाती हैं। जीका का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे में हो सकता है हालांकि डेंगू का संक्रमण इस तरह से नहीं फैलता है। लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना और समय पर इलाज कराना सबसे जरूरी है।

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मच्छरों से करें बचाव - फोटो : freepik.com

एक से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है जीका

डेंगू और मलेरिया जैसे रोग जहां संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलते हैं वहीं जीका का खतरा एक से दूसरे व्यक्ति में भी हो सकता है। जीका से बचाव के लिए मच्छरों के काटने से खुद को खुद को सुरक्षित रखने के साथ सुरक्षित संभोग का भी ध्यान रखना जरूरी है। संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों की तुलना में वीर्य में वायरस अधिक समय तक रह सकता है, ऐसे में संक्रमण से बचाव के लिए सुरक्षित संभोग का ध्यान रखना बहुत आवश्यक हो जाता है।

डेंगू के जीका और डेंगू दोनों से बचाव के लिए मच्छरों के काटने से बचने के उपाय करना, सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना भी आपको इस रोग से सुरक्षित रखने में सहायक है।


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स्रोत और संदर्भ
About Zika


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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