आजकल आप उखड़े-उखड़े रहते हैं। दिन भर आपको चिड़चिड़ापन घेरे रहता है और हर बात में आपको गुस्सा आता है तो सावधान हो जाएं। हो सकता है ऐसा आपके सोने के नियम की वजह से हो। कई बार सोने और जागने का एक नियम न होने की वजह से लोगों को मूड स्विंग के साथ ही और भी शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
बार-बार बदलने लगा है मूड तो ध्यान दें, कहीं आपके सोने का समय तो नहीं जिम्मेदार
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कुछ दिनों पहले हुए शोध में इस बात का पता चला है कि रात में कम सोने वाले लोग किसी भी बात पर बहुत जल्दी परेशान होने लगते हैं। इसके साथ ही इस तरह के लोगों में तनाव और डिप्रेशन की समस्या भी हो जाती है।
बहुत से लोग जो अनिद्रा के शिकार होते हैं वो सीधे तौर पर डिप्रेशन से घिरे होते हैं। लेकिन डिप्रेशन के शिकार लगभग 15 प्रतिशत लोग बहुत ज्यादा सोते हैं। जिसकी वजह से भी उनकी मानसिक सेहत पर असर पड़ता है।
अगर आपको ऐसा लगता है कि आपका शरीर पहले की तुलना में कुछ ज्यादा कमजोर या फिर सेंसेटिव हो गया है तो जरूरत है कि आप अपने सोने के तरीकों पर गौर करें। बहुत बार लगातार लंबे समय तक कम सोने की वजह से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है जिससे शरीर संवेदनशील हो जाता है।
शरीर का अपना बायोलॉजिकल क्लॉक होता है। अगर आपके सोने का वक्त और नींद के घंटे निर्धारित नहीं होंगे तो शरीर का इंसुलिन का स्तर गड़बड़ा जाएगा। जिसकी वजह से टाइप-टू डायबिटीज के होने का खतरा हो जाता है।