देश कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से परेशान है। इसके बाद सामने ब्लैक और व्हाइट फंगस के मामले ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ब्लैक फंगस को कई राज्यों में महामारी भी घोषित कर दिया गया है, इसकी चपेट में अब तक 9 हजार से ज्यादा लोग आ चुके हैं। इन सबके बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक ऐसे खतरे के बारे में लोगों को आगाह किया है जो ब्लैक और व्हाइट फंगस से कहीं ज्यादा संक्रामक और डरावना हो सकता है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक देश के कुछ हिस्सों में अब येलो फंगस के मामले सामने आ रहे हैं। आइए जानते हैं कि येलो फंगस कितना नुकसानदायक हो सकता है?
सावधान: ब्लैक और व्हाइट फंगस से कहीं ज्यादा खतरनाक हैं येलो फंगस, इलाज में देरी मतलब 'मौत'
येलो फंगस के मामले की पुष्टि
उत्तर प्रदेश के गाजियाबद में 45 वर्षीय व्यक्ति में येलो फंगस संक्रमण की पुष्टि हुई है। इस मरीज को कोविड के साथ ब्लैक और व्हाइट फंगस का भी संक्रमण था। पिछले दिनों उसके चेहरे में सूजन देखी गई जिसके चलते वह आंखें नहीं खोल पा रहा था। इसके अलावा मरीज के नाक और पेशाब से खून भी आ रहा था, इस अधार पर जांच के बाद डॉक्टरों ने येलो फंगस की पुष्टि की है। येलो फंगस को म्यूकोर सेप्टिकस के नाम से जाना जाता है।
क्यों ज्यादा घातक है येलो फंगस?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक और व्हाइट फंगस की तरह ही येलो फंगस भी संक्रमण कारक हैं, लेकिन यह अन्य दोनों की तुलना में ज्यादा घातक हो सकता है। ब्लैक और व्हाइट फंगस के लक्षण जहां स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं वहीं येलो फंगस शरीर के भीतर-भीतर नुकसान पहुंचाता है। यही कारण है कि येलो फंगस संक्रमण की पहचान और निदान में काफी समय लग सकता है। ब्लैक और व्हाइट फंगस के मुकाबले येलो फंगस की प्रकृति के चलते संक्रमण को रोकना भी काफी कठिन हो सकता है।
कैसी की जा सकती है इसकी पहचान
ईएनटी विशेषज्ञों के मुताबिक म्यूकोर सेप्टिकस की पहचान करना वैसे तो कठिन होता है,फिर भी रोगी के कुछ लक्षणों के आधार पर जांच करके इसका पता जा सकता है। इसमें संक्रमित को सुस्ती, कम या बिल्कुल भूख न लगने और वजन घटने की समस्या हो सकती है। येलो फंगस के गंभीर मामलों में लाल या धंसी हुई आंखें, घावों के देर से भरने और कुछ मामलों में मवाद के गंभीर रिसाव की दिक्कतों को भी देखा जा सकता है।
साफ-सफाई का रखना होगा विशेष ख्याल
अहमदाबाद में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ हार्दिक शाह बताते हैं कि इस तरह के अधिकांश फंगल संक्रमण अस्वच्छता के कारण पनपते हैं। घर में साफ-सफाई न होना, दूषित भोजन या वस्तुओं, स्टेरॉयड और एंटीबैक्टीरियल दवाओं के ज्यादा प्रयोग और ऑक्सीजन उपकरणों के गलत तरीके से इस्तेमाल के कारण फंगल संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है।