World Sight Day 2025 : 'वर्ल्ड साइट डे' हर साल अक्तूबर महीने के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। इस वर्ष यह दिन आज यानी 9 अक्तूबर को मनाया जा रहा है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को आंखों के स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करना है, ताकि वे अपनी आंखों की देखभाल को प्राथमिकता दें।
Eye Problems: सभी माता-पिता ध्यान दें, बच्चों की आंखों को हेल्दी रखने के लिए करें ये काम
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में करीब 30% बच्चे आंखों की किसी न किसी समस्या से जूझ रहे हैं, और इनमें से आधे बच्चों की दिक्कतों की पहचान देर से हो पाती है।
30% बच्चे आंखों की समस्या का शिकार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में करीब 30% बच्चे आंखों की किसी न किसी समस्या से जूझ रहे हैं और इनमें से आधे बच्चों की दिक्कतों की पहचान देर से हो पाती है। यही वजह है कि आंखों की छोटी-सी परेशानी को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों का बार-बार आंखें मिचलना, किताब बहुत पास से पढ़ना या अक्सर सिरदर्द बना रहना अच्छे संकेत नहीं हैं। माता-पिता को इन स्थितियों पर गंभीरता से ध्यान देते हुए नेत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेना चाहिए। ये सभी लक्षण आंखों की रोशनी घटने या चश्मे की जरूरत के संकेत हो सकते हैं। अगर इन संकेतों को समय रहते पहचान न किया जाए, तो आगे चलकर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
आइए जानते हैं कि कैसे पता लगाया जा सकता है कि कहीं आपके बच्चे को भी तो आंखों की समस्या नहीं शुरू हो रही है?
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ समीर अवस्थी कहते हैं, बच्चों में आंखों की समस्याओं का पता लगाने के लिए सभी माता-पिता को कुछ स्थितियों पर ध्यान देना चाहिए।
नजर कमजोर होने के लक्षण
अगर बच्चा टीवी देखने, किताब पढ़ने या दूर की वस्तुएं देखने के लिए बार-बार आंखें मिचमिचाता है, तो यह नजदीक या दूर की नजर कमजोर होने का संकेत हो सकता है। शोध बताते हैं कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने और आउटडोर गतिविधियों की कमी से बच्चों में मायोपिया तेजी से बढ़ रहा है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी के अनुसार, बच्चों का लगातार आंखें मिचमिचाना इस बात का संकेत है कि उनकी आंखें ठीक से फोकस नहीं कर पा रही हैं। यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए तो ये आंखों की रोशनी कमजोर होने का कारण बन सकती है।
बहुत पास से टीवी या किताब पढ़ना
अगर बच्चा हमेशा टीवी के बहुत पास बैठता है या किताब आंखों के बिल्कुल पास रखकर पढ़ता है, तो यह भी नजर कमजोर होने का शुरुआती लक्षण है।
नेशनल आई इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट बताती है कि छोटे बच्चों में आंखों की रोशनी का कम होना अक्सर माता-पिता की नजर से छिपा रह जाता है, लेकिन उनका व्यवहार संकेत दे सकता है। जब आंखें दूर की वस्तुओं को साफ नहीं देख पातीं, तो बच्चा पास से देखने की कोशिश करता है। समय रहते पहचान कर इलाज कराने से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
अक्सर सिरदर्द और आंखों में दर्द बना रहना
अगर बच्चा पढ़ाई के बाद, मोबाइल-कंप्यूटर इस्तेमाल करने के बाद या टीवी देखने के बाद बार-बार सिरदर्द की शिकायत करता है, तो यह आंखों पर ज्यादा दबाव पड़ने का लक्षण हो सकता है। ऑप्थाल्मोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने से बच्चों की आंखें जल्दी थक जाती हैं, जिससे डिजिटल आई स्ट्रेन बढ़ता है। इसके कारण सिरदर्द, आंखों में जलन और धुंधला दिखने की समस्या हो सकती है।
आंखों को बार-बार मलना
छोटे बच्चे अगर बार-बार आंखें मलते हैं, तो इसपर भी माता-पिता को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। यह एलर्जी, ड्राई आई सिंड्रोम या नजर कमजोर होने का संकेत हो सकता है। अध्ययनों से पता चलता है किआंखों को बार-बार मलने से कॉर्निया पर दबाव पड़ता है और लंबे समय तक ऐसा करने सेकेराटोकोनस जैसी समस्या हो सकती है, जिसमें आंख का आकार बदलने लगता है और नजर और खराब हो सकती है।
अगर समय रहते इन समस्याओं का सही निदान और इलाज हो जाए तो बच्चों की आंखों को किसी गंभीर समस्या से बचाया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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