हर साल कई प्रकार की गंभीर बीमारियों के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है। हृदय रोग, डायबिटीज, कैंसर जैसी बीमारियां इनमें प्रमुख हैं। सेप्सिस भी ऐसी ही समस्या है जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता बढ़ा रही है। सेप्सिस एक जानलेवा बीमारी है जो संक्रमण के प्रति आपके शरीर की प्रतिक्रिया के कारण होती है। वैसे तो प्रतिरक्षा प्रणाली हमें कई बीमारियों और संक्रमणों से बचाती रहती है, लेकिन संक्रमण के प्रति प्रतिक्रिया में इसके अत्यधिक सक्रिय होने की भी आशंका रहती है।
World Sepsis Day 2024: सेप्सिस के कारण हर साल लाखों लोगों की हो जाती है मौत, जानिए इसका कारण और बचाव के तरीके
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सेप्सिस के बारे में जानिए
सेप्सिस तब होता है जब कोई मौजूदा संक्रमण आपके शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया को अत्यधिक ट्रिगर कर देता है।
जब हमें कोई संक्रमण होता है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली उससे लड़ने के लिए प्रोटीन और अन्य रसायन रिलीज करके प्रतिक्रिया करती है। जब यह प्रतिक्रिया नियंत्रण से बाहर हो जाती है तो ऐसी स्थिति में सेप्सिस हो सकता है। बैक्टीरिया के संक्रमण सेप्सिस का प्रमुख कारण माने जाते हैं। हालांकि अन्य संक्रमण जैसे कोविड-19, इन्फ्लूएंजा और फंगल संक्रमण में भी सेप्सिस का जोखिम रहता है।
सेप्सिस के कारण और जटिलताएं
सेप्सिस के कारण बुखार, हृदय गति बढ़ने और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण होते हैं। हालांकि ध्यान देना जरूरी है कि यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें तुरंत चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है। गंभीर स्थितियों में सेप्सिस के कारण सेप्टिक शॉक हो सकता है, जिसे जानलेवा माना जाता है। सेप्टिक शॉक के कारण रक्तचाप में गिरावट, अंगों के फेल होने का खतरा और कई अन्य प्रकार की जटिलताएं हो सकती हैं।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के कारण भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करने वाली बीमारियों के शिकार लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जा रहा है।
सेप्सिस के क्या लक्षण होते हैं?
यदि आपको सेप्सिस के कोई भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। सेप्सिस के लक्षणों में आपको बुखार और ठंड लगने, भ्रम की स्थिति होने, सांस लेने में कठिनाई, हृदय गति तेज होने या लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) और पसीना आने जैसी दिक्कतें होती हैं। गंभीर स्थितियों में लक्षण और बिगड़ सकते हैं।
- त्वचा का नीला पड़ना, खास तौर पर होंठ, उंगलियां, पैर की उंगलियां।
- शरीर के तापमान में गिरावट के कारण ठंड लगना।
- पेशाब कम होना-चक्कर आना।
- प्लेटलेट काउंट कम होना (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया)
- बेहोशी जैसी स्थिति।
सेप्सिस से कैसे बचें?
आप संक्रमण से बचाव करके सेप्सिस के जोखिमों को कम कर सकते हैं।
- कोविड-19, फ्लू, निमोनिया और अन्य सामान्य संक्रमणों के लिए टीका लगवाएं।
- सोशल डिस्टेंसिंग कई संक्रामक रोगों से बचाव में मददगार है।
- मास्क पहनें, मास्क आपको और दूसरों को श्वसन संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं।
- अच्छी स्वच्छता का अभ्यास करें। इसका मतलब है घाव की उचित देखभाल, हाथ धोते रहना आदि।
- सेप्सिस के इलाज के लिए हर मिनट मायने रखता है। जितनी जल्दी आप इलाज करवाएंगे, परिणाम उतना ही बेहतर होगा।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।