अंगदान को महादान कहा जाता है, जिसकी मदद से दुनियाभर में हर साल लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। हालांकि भारत में दुर्भाग्यवश अंगों की जरूरत और अंगदान के बीच बड़ी खाई बनी हुई है। विशेषज्ञ कहते हैं, लोगों में अंगदान को लेकर जागरूकता की कमी और इससे जुड़ी मिथकों के कारण चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
World Organ Donation Day: भारत में अंगदान को लेकर कई सारी चुनौतियां, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
अंगदान को लेकर चुनौतियां
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मिथकों और लोगों में सही जानकारी की कमी के कारण हर साल लगभग बड़ी संख्या में किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंग नष्ट हो जाते हैं। अस्पतालों में ब्रेन डेड लोगों की समय पर पहचान नहीं हो पाती है, जिसकी वजह से संभावित दाताओं की उपलब्धता के बावजूद देश में अंग दान की दर में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में ये बड़ी विडंबना है कि हर साल हजारों जीवन रक्षक अंग या तो बर्बाद हो जाते हैं या फिर समय रहते उन्हें प्राप्त नहीं किया जाता है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में पुणे स्थित एक अस्पताल में हेमेटोलॉजिस्ट और सर्जन डॉ एन. आर पाठक बताते हैं, देश में उपलब्ध अंगों और जरूरतमंद मरीजों की संख्या के बीच का अंतर बहुत बड़ा है। लॉजिस्टिक और सिस्टमिक चुनौतियों के कारण अंगों की बर्बादी भी एक गंभीर मुद्दा है, जिसमें सुधार की आवश्यकता है।
जिन राज्यों में इस दिशा में काम किया गया है वहां के परिणाम काफी अच्छे रहे हैं। गुजरात में अंगदान के आंकड़े काफी बेहतर रहे हैं जिससे दूसरे राज्यों को भी सीख लेने की जरूरत है। अंगदान को लेकर दाताओं को प्रोत्साहित करना इस दिशा में काफी मददगार साबित हो सकता है।
गुजरात में बढ़ा अंगदान का आंकड़ा
स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन गुजरात के आंकड़ों के अनुसार कोविड-पूर्व समय की तुलना में 2023 में राज्य में अंगदान में 275% की प्रभावशाली वृद्धि हुई है। इसके अलावा, चालू वर्ष (2024) में अंगदान पछले वर्ष के कुल अंगदान का लगभग 50% तक पहुंच चुका है। डेटा से पता चलता है कि 2019 में 170 अंगदान हुए थे, जो 2023 में बढ़कर 469 हो गए। इसके अलावा, 2024 में अब तक 231 अंगदान हो चुके हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य राज्यों को भी इन आंकड़ों से प्रेरणा लेकर अंगदान को बढ़ावा देने के तरीकों के बारे में विचार करना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की एसओपी
अंगदान को बढ़ावा देने और अंगों के बेहतर रखरखाव को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में यात्रा के विभिन्न साधनों के माध्यम से मानव अंगों के परिवहन के लिए पहली एसओपी जारी की है। इसके तहत अंगों को ले जाने वाली एयरलाइनों को प्राथमिकता के आधार पर उड़ान भरने और उतरने के लिए की व्यवस्था करने की अनुमति होगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने कहा, अंगों के परिवहन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करके, हम बहुमूल्य अंगों के उपयोग को बढ़ाने और इसके खराब होने की दिशा में बेहतर सुधार कर सकते हैं।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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