शराब और धूम्रपान को अध्ययनों में हृदय रोग, फेफड़ों की समस्याओं से लेकर कैंसर जैसी कई प्रकार की गंभीर बीमारियों के कारण के तौर पर जाना है। फेफड़ों के बढ़ते कैंसर के लिए धूम्रपान और कोलन कैंसर के लिए शराब पीने वालों में जोखिम सबसे अधिक देखा गया है। पर क्या आप जानते हैं कि शारीरिक समस्याओं के अलावा शराब-धूम्रपान कई प्रकार के गंभीर मनोरोगों को बढ़ाने वाला भी एक कारक हो सकता है? अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि शराब और धूम्रपान मस्तिष्क की कोशिकाओं को गंभीर रूप से प्रभावित करके तनाव-चिंता और अवसाद जैसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाने वाला कारक हो सकता है।
World Mental Health Day: अध्ययन- बढ़ती मानसिक समस्याओं के लिए शराब-धूम्रपान बड़ा कारक, जानिए इसके दुष्प्रभाव
क्या कहते हैं मनोरोग विशेषज्ञ?
भोपाल में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं, यह बड़ी मिथ है कि शराब पीने से टेंशन कम होती है, जबकि असलियत यह है कि शराब आपके लिए टेंशन को और भी बढ़ाने वाली हो सकती है। चिंता-अवसाद जैसे विकारों में शराब पीने से कुछ समय के लिए तो आप नशे में चीजें भूल जाते हैं पर इसकी आदत बनना, स्थिति के सही निदान होने में देरी कर देती है जिससे चिंता विकार गंभीर रूप लेकर अवसाद तक पहुंच सकता है।
इसके अलावा शराब के कारण मस्तिष्क को होने वाले दुष्प्रभावों की स्थिति में कई प्रकार की और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं का जोखिम हो सकता है। इसलिए ध्यान रखें, चिंता-परेशानी होने पर कभी भी शराब की सहारा न लें।
शराब का मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
मानसिक स्वास्थ्य विकारों के निदान को देर करने के अलावा शराब कई और प्रकार से मानसिक स्वास्थ्य के लिए समस्या कारक है। शोध में अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि शराब आपके मस्तिष्क के उस हिस्से को प्रभावित करती है, जो अवरोधकों को नियंत्रित करता है। इसलिए आप शराब पीने के बाद कुछ समय के लिए कथित तौर पर आराम, चिंता में कमी महसूस कर सकते हैं। लेकिन ये प्रभाव जल्दी खत्म हो जाते हैं। शराब के सेवन की आदत मस्तिष्क में रासायनिक परिवर्तन का भी कारण बनती है जिसके कारण क्रोध, अवसाद या चिंता और नकारात्मक भावनाओं की समस्या बढ़ जाती है।
धूम्रपान से होने वाले नुकसान
मेंटल हेल्थ फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक धूम्रपान करने वालों में अन्य लोगों की तुलना में डिप्रेशन का खतरा दोगुना तक अधिक होता है। धूम्रपान से निकलने वाला निकोटीन मस्तिष्क में डोपामाइन न्यूरोट्रांसमीटर को रिलीज करने की प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने वाला पाया गया है। डोपामाइन, खुशियों को एहसास कराने में मदद करता है, ऐसे में इसका स्राव कम होने के कारण आपको समय के साथ मूड विकार, नकारात्मकता, तनाव-चिंता जैसी समस्या बनी रह सकती है। धूम्रपान के मस्तिष्क की कोशिकाओं पर भी दुष्प्रभाव देखे गए हैं जो न्यूरोलॉजिलकल समस्याओं को भी बढ़ा देते हैं।
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?
मनोरोग विशेषज्ञ कहते हैं, तनाव-चिंता या किसी अन्य प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से बचे रहने के लिए शराब-धूम्रपान से बिल्कुल दूरी बना लें। मानसिक स्वास्थ्य के साथ इसका कई प्रकार से शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर भी गंभीर दुष्प्रभाव देखा गया है। मानसिक स्वास्थ्य मौजूदा समय में हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से होना चाहिए। हर उस चीज से दूरी बनाएं जो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हैं। अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और सकारात्मकता पूर्ण माहौल बनाने की कोशिश करें।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।