लंग्स कैंसर, वैश्विक स्तर पर कैंसर के गंभीर प्रकारों में से एक है। हर साल इसके कारण लाखों लोगों को मौत हो जाती है। फेफड़ों में होने वाला कैंसर वयस्कों में अधिक देखा जाता रहा है। वैसे तो हमारे शरीर में एक प्राकृतिक रक्षा प्रणाली होती है जो फेफड़ों की रक्षा करने, गंदगी और कीटाणुओं को दूर रखने के लिए डिज़ाइन की गई है। लेकिन लाइफस्टाइल की गड़बड़ आदतों के कारण दुनियाभर में फेफड़ों के कैंसर के रोगी बढ़ते जा रहे हैं।
World Lung Cancer Day: ये तीन चीजें बढ़ा देती हैं फेफड़ों के कैंसर का खतरा, आप भी तो नहीं करते हैं ये गलतियां?
लंग्स कैंसर के लक्षण और जोखिम
डॉक्टर कहते हैं, यदि आपको अक्सर खांसी या निमोनिया की समस्या रहती है जो उपचार के बाद भी वापस आ जाती है तो इसे फेफड़ों के कैंसर का प्रारंभिक संकेत माना जा सकता है।फेफड़ों के कैंसर के सबसे आम लक्षणों में लगातार या गंभीर होती खांसी, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, आवाज बैठना या अस्पष्टीकृत वजन कम होना शामिल है।
जीवनशैली की कई आदतें इस कैंसर को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिनसे सभी लोगों को बचाव करने की आवश्यकता होती है।
धूम्रपान के कारण खतरा सबसे अधिक
सिगरेट या धूम्रपान को फेफड़ों के कैंसर और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) का प्रमुख कारण माना जाता है। सिगरेट का धुआं वायुमार्ग को संकीर्ण कर देता है और सांस लेना अधिक कठिन बना सकता है। यह फेफड़ों में क्रोनिक सूजन का कारण बनता है। समय के साथ सिगरेट का धुआं फेफड़ों के ऊतकों को भी क्षति पहुंचाने लगता है जिसके कारण कैंसर होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
इनडोर प्रदूषण भी जोखिम कारक
इनडोर वायु गुणवत्ता (IAQ) ठीक न होने को भी लंग्स कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। हम सभी दिन का ज्यादातर वक्त घरों-ऑफिस में बिताते हैं ऐसे में अगर हवा की गुणवत्ता ठीक नहीं है तो इससे भी फेफड़ों को क्षति होने का जोखिम रहता है। घर के अंदर की हवा बाहर की हवा से भी अधिक प्रदूषित हो सकती है, इसके लिए जरूरी है कि कमरे में साफ-स्वच्छ हवा के प्रवेश को सुनिश्चित किया जाए।
दूषित पानी पीने से भी रहता है खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि दूषित जल, विशेषतौर पर पीने के पानी में आर्सेनिक के उच्च स्तर के कारण फेफड़ों के कैंसर का खतरा अधिक हो सकता है। अधिकांश अध्ययनों में, पानी में आर्सेनिक का स्तर संयुक्त राज्य अमेरिका में अधिक देखा जाता रहा है। कैंसर के खतरे से बचाव के लिए शुद्ध जल का सेवन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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