डायबिटीज को एक दशक पहले तक उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारियों के रूप में जाना जाता था, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में यह 40 से भी कम उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। कम उम्र में डायबिटीज के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें लाइफस्टाइल और आहार की गड़बड़ी, मोटापा और आनुवंशिकता प्रमुख है। पर क्या आप जानते हैं कि यह बच्चों में भी हो सकती है, इतना ही नहीं जन्म के कुछ साल बाद भी बच्चे में डायबिटीज का निदान किया जा सकता है। बच्चों में डायबिटीज की समस्या को काफी गंभीर और चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जो उनकी जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती है।
World Diabetes Day 2022: बच्चों में भी बढ़ गया है डायबिटीज का खतरा, जानिए क्या है इसकी वजह और लक्षण?
बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज
बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज, एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे का शरीर इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाता है। बच्चे के जीवित रहने से लेकर शरीर के अंगों को ठीक से काम करते रहने के लिए इस हार्मोंन की आवश्यकता होती है। शरीर में इसका उत्पादन न हो पाने की स्थिति में ऐसे रोगियों को जीवनभर इंसुलिन का इंजेक्शन लगाते रहने की आवश्यकता होती है। बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज का कोई इलाज नहीं है, इसे बस प्रबंधित किया जा सकता है। इसके लक्षणों पर ध्यान देना सभी माता-पिता के लिए जरूरी है।
- बच्चे को सामान्य से अधिक प्यास लगना।
- बार-बार पेशाब जान।
- वजन तेजी से कम होना।
- अक्सर थकान और कमजोरी रहना।
- चिड़चिड़ापन या व्यवहार में परिवर्तन
बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज
बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज एक क्रोनिक समस्या है जो ऊर्जा के लिए ग्लूकोज को सही तरीके से संसाधित करने के तरीके को प्रभावित करती है। शारीरिक निष्क्रियता, आहार में गड़बड़ी जैसी आदतों और मोटापे वाले बच्चों में इसका खतरा अधिक देखा जाता है। बच्चे में इस प्रकार के डायबिटीज का खतरा काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा गया है। बच्चे को स्वस्थ भोजन खाने के लिए प्रोत्साहित करने, व्यायाम और स्वस्थ वजन बनाए रखकर इस जोखिम को कम किया जा सकता है।
टाइप-1 की ही तरह सामान्य से अधिक प्यास लगना और बार-बार पेशाब जाने, थकान, धुंधला दिखाई देने, त्वचा पर काले धब्बे होना, बार-बार संक्रमण होना और घावों का जल्दी ठीक न होना इस प्रकार के डायबिटीज का संकेत हो सकता है।
बच्चों में डायबिटीज के कारण
बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज क्यों होती है, इसका सटीक कारण पता नहीं है। अध्ययनों में पाया गया है कि आटो-इम्यून विकारों के कारण इसका जोखिम हो सकता है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली, जो आम तौर पर हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस से लड़ती है वह अग्न्याशय में इंसुलिन-उत्पादक (आइलेट) कोशिकाओं को नष्ट करने लगती है। इस प्रक्रिया में आनुवंशिकी और पर्यावरणीय कारकों को जिम्मेदार माना जाता है।
हालांकि टाइप-2 डायबिटीज के लिए अधिक वजन, शारीरिक निष्क्रियता, पारिवारिक इतिहास, आहार में गड़बड़ी आदि को कारक माना जाता है।
डायबिटीज से बचाव के लिए क्या करें?
टाइप-1 डायबिटीज से बचाव नहीं किया जा सकता है, इसका सिर्फ प्रबंधन ही किया जाता है। हालांकि स्वस्थ जीवनशैली के विकल्प बच्चों में टाइप 2 मधुमेह को रोकने में जरूर मदद कर सकते हैं। बच्चे को लो फैट और लो कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ दें। फलों, सब्जियों और साबुत अनाज की मात्रा बढ़ाएं। बच्चे को सक्रिय रहने लिए प्रोत्साहित करें, खेल-व्यायाम बच्चों के लिए बहुत आवश्यक हैं। डायबिटीज का अगर पारिवारिक इतिहास रहा है तो इन सावधानियों पर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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