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Pregnancy and Diabetes: गर्भावस्था में मधुमेह हो सकता है अधिक खतरनाक, मां को रखना चाहिए इन बातों का ध्यान

Sat, 12 Nov 2022 02:35 PM IST
स्वाति शैवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वाति शैवाल Updated Sat, 12 Nov 2022 02:35 PM IST
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World Diabetes Day 2022: Pregnancy and diabetes: uncontrolled sugar can be more dangerous
गर्भावस्था में डायबिटीज से बढ़ सकती है मुश्किल - फोटो : Istock

जीवनशैली जनित जिस बीमारी ने पिछले कुछ समय में सबसे तेजी से हमारे देश में पैर पसारे हैं, उनमें डायबिटीज का नाम सबसे ऊपर है। अब तो उम्र, वर्ग भी इसका मापदण्ड नहीं रह गया। किसी को भी यह बीमारी चपेट में आसानी से ले सकती है। उससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि शरीर में शकर के असन्तुलन से अन्य कई गम्भीर और जानलेवा बीमारियों का हमला भी आसान हो जाता है। 



डायबिटीज का एक खतरनाक स्वरूप गर्भावस्था के दौरान भी सामने आता है। जहां अनियंत्रित शुगर न केवल प्रसव में अड़चन पैदा कर सकती है बल्कि मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा स्थितियां भी बना सकती है। इसलिए जरूरी है कि इस दौरान भी शुगर के स्तर को लेकर सतर्क रहा जाए। डायबिटीज के बढ़ते खतरों को देखते हुए नवम्बर माह को डायबिटीज जागरूकता माह के रूप में घोषित किया गया है। इसी कड़ी में जानते हैं गर्भवती महिलाओं में इस बीमारी से क्या समस्याएं हो सकती हैं और किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। 

World Diabetes Day 2022: Pregnancy and diabetes: uncontrolled sugar can be more dangerous
शुगर के स्तर को नियमित रूप से जांचें - फोटो : iStock

कई प्रकार से हो सकती है समस्या

गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज कई रूपों में साथ रह सकती है। इसमें टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के अलावा जेस्टेशनल डाइबिटीज भी एक बड़ी चुनौती के रूप में शामिल हो सकती है। जेस्टेशनल डायबिटीज अर्थात खासतौर पर गर्भावस्था के दौरान होने वाला रक्त शर्करा यानी शुगर का असन्तुलन। चूँकि गर्भावस्था अपने आप में शरीर में हार्मोनल उथल पुथल पैदा करती है। ऐसे में शरीर के लिए इससे तालमेल बैठाना आसान नहीं होता। खून में शकर का असन्तुलन इसमें जुड़कर और खराब स्थिति पैदा कर सकता है।

World Diabetes Day 2022: Pregnancy and diabetes: uncontrolled sugar can be more dangerous
गर्भावस्था की शुरुआत से ही रखें ख़ास ध्यान - फोटो : istock

ये हो सकती हैं परेशानियां

गर्भावस्था के समय डायबिटीज़ का सामने आना या इसका पहले से शरीर मे मौजूद रहना, दोनों ही स्थितियों में यह मां और बच्चे दोनों की ज़िंदगी के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है। इसके कारण बच्चे में जन्मगत विकार की आशंका बढ़ने के साथ ही प्रसव के समय बच्चे की जान जाने, प्रसव प्रक्रिया में बाधा आने, गर्भपात होने, समय से पहले बच्चे का जन्म होने जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं। शरीर और उसमें विकसित हो रहे बच्चे के लिए यह जरूरी हो जाता है कि डायबिटीज का स्तर नियंत्रण में रहे। यही कारण है कि डॉक्टर सामान्य और स्वस्थ गर्भवती महिलाओं के लिए भी रक्त में शकर की मात्रा को प्रथम ट्राइमेस्टर से ही जांचना शुरू कर देते हैं। 

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World Diabetes Day 2022: Pregnancy and diabetes: uncontrolled sugar can be more dangerous
गर्भावस्था के दौरान भी हो सकती है डायबिटीज - फोटो : istock

गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज

जेस्टेशनल डायबिटीज या गर्भावस्था के दौरान सामने आने वाली डायबिटीज कई मामलों में टाइप-1 और टाइप-2 से अलग होती है। अधिकांश मामलों में बच्चे के जन्म के बाद शुगर का स्तर अपने आप सामान्य हो जाता है। लेकिन एक बार जेस्टेशनल डायबिटीज का होना टाइप-2 डायबिटीज की आशंका को बढ़ा सकता है। इतना ही नहीं ऐसी गर्भवस्था के साथ पैदा होने वाले शिशु में बचपन में या किशोरावस्था के दौरान मोटापे की आशंका और बड़े होने पर टाइप-2 डायबिटीज होने की आशंका अधिक हो सकती है। इसलिए इस स्थिति को नियंत्रण में रखने के पूर्ण प्रयास करें।

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World Diabetes Day 2022: Pregnancy and diabetes: uncontrolled sugar can be more dangerous
खान पान में सतर्कता बरतें - फोटो : Istock

इस तरह रख सकते हैं ध्यान

डायबिटीज के ज्यादातर मामले शुरुआती स्तर पर नियंत्रित किये जाने से मुश्किलों को कम करने में भी मदद कर सकते हैं। यदि आपको पहले से डायबिटीज है तो डॉक्टर से गर्भावस्था को लेकर पूरी जानकारी लें और बच्चा तब ही प्लान करें जब डायबिटीज पूरी तरह नियंत्रण में हो। 
 

  • यदि आप जेस्टेशनल डायबिटीज से बचना चाहती हैं तो गर्भावस्था की शुरुआत से ही अपने वजन, खान-पान और फिजिकल एक्टिविटी को लेकर सजग रहें। यदि आपका वजन अधिक है तो गर्भावस्था की ओर कदम बढ़ाने से पहले वजन नियंत्रित कर लें।
  •  पूर्व में डायबिटीज या प्री डायबिटीज का शिकार होने वाली महिलाओं को दवाई की सही मात्रा का उपयोग करना, पूरे समय शुगर के स्तर को नियंत्रित रखना और खान-पान, जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाने की जरूरत होती है। 
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