World Asthma Day 2025: अस्थमा फेफड़ों की बीमारी है, जो वायु मार्ग (श्वास नली) में सूजन का कारण बनती है। सूजे हुए वायु मार्ग से सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न, खांसी और घरघराहट हो सकती है। इसका इलाज आमतौर पर इनहेलर और अन्य दवाओं से किया जाता है, लेकिन पिछले कई वर्षों में इसकी जांच और चिकित्सा पद्धति में हुए विकास ने इसके इलाज को आसान बनाया है।
World Asthma Day 2025: अस्थमा रोगियों के लिए अच्छी खबर, ये दो तरीके सांस की दिक्कतें कर सकते हैं दूर
- World Asthma Day 2025: अस्थमा फेफड़ों की बीमारी है, जो वायु मार्ग (श्वास नली) में सूजन का कारण बनती है।
- सूजे हुए वायु मार्ग से सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न, खांसी और घरघराहट हो सकती है।
- इसके इलाज के लिए बायोलॉजिक्स और ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी थेरेपी की काफी चर्चा है।
बायोलॉजिक्स थेरेपी क्या है?
बायोलॉजिक्स थेरेपी में अस्थमा का इलाज उन कोशिकाओं को बाधित करके या अणुओं को रोककर करते हैं, जो कुछ खास ट्रिगर्स के संपर्क में आने के बाद वायु मार्ग में सूजन पैदा करते हैं। ट्रिगर एक्सपोजर प्रतिरक्षा तंत्र में अणुओं को वायु मार्ग में सूजन पैदा करने के लिए एक साथ काम करने का कारण बनता है।
बायोलॉजिक्स इन अणुओं से जुड़ते हैं और उन्हें सूजन और लक्षण पैदा करने से रोकते हैं। चिकित्सक लक्षणों, ली जा रही दवा के प्रकार और रक्त परीक्षण के परिणामों को देखकर तय करते हैं कि अस्थमा के उपचार में बायोलॉजिक्स थेरेपी मददगार होगी या नहीं।
बायोलॉजिक्स त्वचा के नीचे इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन और आईवी इन्फ्यूजन में दिया जाता है। हालांकि कुछ दुर्लभ मामलों में लोगों को एलर्जिक दिक्कतें भी हो सकती हैं।
ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी थेरेपी
ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी थेरेपी में गर्मी का उपयोग करके वायु मार्ग के आसपास की अतिरिक्त मांसपेशियों को कम किया जाता है। इससे सांस लेना आसान हो जाता है और अस्थमा के दौरे में कमी आ सकती है। यह थेरेपी गंभीर अस्थमा के इलाज में मदद कर सकती है।
सांस लेना होगा आसान
कई मरीज इनहेलर थेरेपी के बावजूद अस्थमा को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं। अस्थमा के गंभीर मामलों में बायोलॉजिक्स थेरेपी या ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। ये दोनों ही थेरेपी नई हैं।
- बायोलॉजिक्स थेरेपी अस्थमा का कारण बनने वाले विभिन्न एंटीबॉडी, कोशिकाओं या अणुओं को लक्षित करके काम करती है।
- ये अस्थमा के लक्षणों को कम करके फेफड़ों के कार्य को बेहतर बनाती है।
- वहीं ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी थेरेपी में गर्मी का उपयोग करके वायु मार्ग के आसपास की अतिरिक्त मांसपेशियों को कम किया जाता है।
- इससे सांस लेना आसान हो जाता है और अस्थमा के दौरे में कमी आने लगती है।
खान-पान और लाइफस्टाइल का भी रखें ध्यान
प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ, फास्ट फूड, चिप्स और पैकेज्ड स्नैक्स में प्रिजर्वेटिव, कृत्रिम होते हैं, जो अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। डेयरी उत्पाद, जैसे- दूध, पनीर और दही कुछ लोगों में बलगम को बढ़ा सकते हैं। इसलिए खान-पान कैसा होना चाहिए इसके लिए डॉक्टर से जरूर बात करें।
- अल्कोहल भी अस्थमा के दौरे को ट्रिगर कर सकते हैं। प्रोसेस्ड मांस, डिब्बाबंद सूप और नमकीन स्नैक्स से सूजन बढ़ सकती है।
- अम्लीय खाद्य पदार्थ, जैसे- टमाटर, खट्टे फल से अस्थमा के लक्षण बिगड़ सकते हैं।
- आइसक्रीम, ठंडे पेय पदार्थ और अन्य ठंडे पदार्थ कुछ अस्थमा पीड़ितों में ब्रोन्कियल ऐंठन पैदा कर सकते हैं।
अस्थमा के रोगियों को इन चीजों के सेवन से बचना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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