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World Asthma Day 2025: अस्थमा रोगियों के लिए अच्छी खबर, ये दो तरीके सांस की दिक्कतें कर सकते हैं दूर

Tue, 06 May 2025 08:47 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 06 May 2025 08:47 AM IST
सार

  • World Asthma Day 2025: अस्थमा फेफड़ों की बीमारी है, जो वायु मार्ग (श्वास नली) में सूजन का कारण बनती है।
  • सूजे हुए वायु मार्ग से सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न, खांसी और घरघराहट हो सकती है।
  • इसके इलाज के लिए बायोलॉजिक्स और ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी थेरेपी की काफी चर्चा है।

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सांस की समस्या- अस्थमा - फोटो : Adobe Stock

World Asthma Day 2025: अस्थमा फेफड़ों की बीमारी है, जो वायु मार्ग (श्वास नली) में सूजन का कारण बनती है। सूजे हुए वायु मार्ग से सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न, खांसी और घरघराहट हो सकती है। इसका इलाज आमतौर पर इनहेलर और अन्य दवाओं से किया जाता है, लेकिन पिछले कई वर्षों में इसकी जांच और चिकित्सा पद्धति में हुए विकास ने इसके इलाज को आसान बनाया है।



अगर गंभीर श्रेणी का अस्थमा है तो वायु मार्ग में सूजन को कम करने के लिए नियमित रूप से अस्थमा की दवाएं लेनी पड़ सकती हैं। अस्थमा में आमतौर पर नियमित दवाओं या इनहेलर का उपयोग किया जाता है। लेकिन अब बायोलॉजिक्स और ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी जैसी थेरेपी ने मध्यम से गंभीर अस्थमा के उपचार को आसान बना दिया है।

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अस्थमा की इलाज - फोटो : Freepik.com

बायोलॉजिक्स थेरेपी क्या है?

बायोलॉजिक्स थेरेपी में अस्थमा का इलाज उन कोशिकाओं को बाधित करके या अणुओं को रोककर करते हैं, जो कुछ खास ट्रिगर्स के संपर्क में आने के बाद वायु मार्ग में सूजन पैदा करते हैं। ट्रिगर एक्सपोजर प्रतिरक्षा तंत्र में अणुओं को वायु मार्ग में सूजन पैदा करने के लिए एक साथ काम करने का कारण बनता है।

बायोलॉजिक्स इन अणुओं से जुड़ते हैं और उन्हें सूजन और लक्षण पैदा करने से रोकते हैं। चिकित्सक लक्षणों, ली जा रही दवा के प्रकार और रक्त परीक्षण के परिणामों को देखकर तय करते हैं कि अस्थमा के उपचार में बायोलॉजिक्स थेरेपी मददगार होगी या नहीं।

बायोलॉजिक्स त्वचा के नीचे इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन और आईवी इन्फ्यूजन में दिया जाता है। हालांकि कुछ दुर्लभ मामलों में लोगों को एलर्जिक दिक्कतें भी हो सकती हैं।

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अस्थमा को कैसे ठीक किया जाए - फोटो : Freepik.com

ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी थेरेपी

 ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी थेरेपी में गर्मी का उपयोग करके वायु मार्ग के आसपास की अतिरिक्त मांसपेशियों को कम किया जाता है। इससे सांस लेना आसान हो जाता है और अस्थमा के दौरे में कमी आ सकती है। यह थेरेपी गंभीर अस्थमा के इलाज में मदद कर सकती है।

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सांस की समस्या से कैसे पाएं आराम - फोटो : Adobe Stock

सांस लेना होगा आसान

कई मरीज इनहेलर थेरेपी के बावजूद अस्थमा को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं। अस्थमा के गंभीर मामलों में बायोलॉजिक्स थेरेपी या ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। ये दोनों ही थेरेपी नई हैं।

  • बायोलॉजिक्स थेरेपी अस्थमा का कारण बनने वाले विभिन्न एंटीबॉडी, कोशिकाओं या अणुओं को लक्षित करके काम करती है।
  • ये अस्थमा के लक्षणों को कम करके फेफड़ों के कार्य को बेहतर बनाती है।
  • वहीं ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी थेरेपी में गर्मी का उपयोग करके वायु मार्ग के आसपास की अतिरिक्त मांसपेशियों को कम किया जाता है।
  • इससे सांस लेना आसान हो जाता है और अस्थमा के दौरे में कमी आने लगती है।
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अस्थमा रोगी बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com

खान-पान और लाइफस्टाइल का भी रखें ध्यान

प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ, फास्ट फूड, चिप्स और पैकेज्ड स्नैक्स में प्रिजर्वेटिव, कृत्रिम होते हैं, जो अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। डेयरी उत्पाद, जैसे- दूध, पनीर और दही कुछ लोगों में बलगम को बढ़ा सकते हैं। इसलिए खान-पान कैसा होना चाहिए इसके लिए डॉक्टर से जरूर बात करें।

  • अल्कोहल भी अस्थमा के दौरे को ट्रिगर कर सकते हैं। प्रोसेस्ड मांस, डिब्बाबंद सूप और नमकीन स्नैक्स से सूजन बढ़ सकती है।
  • अम्लीय खाद्य पदार्थ, जैसे- टमाटर, खट्टे फल से अस्थमा के लक्षण बिगड़ सकते हैं।
  • आइसक्रीम, ठंडे पेय पदार्थ और अन्य ठंडे पदार्थ कुछ अस्थमा पीड़ितों में ब्रोन्कियल ऐंठन पैदा कर सकते हैं।

अस्थमा के रोगियों को इन चीजों के सेवन से बचना चाहिए।


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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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