आर्थराइटिस, जोड़ों में दर्द और सूजन की गंभीर समस्या है, जिसके मामले भारत में साल-दर-साल बढ़ते जा रहे हैं। आर्थराइटिस को गठिया के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर आर्थराइटिस को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या के तौर पर जाना जाता रहा है, हालांकि कम आयु वाले लोगों में भी अब इस समस्या का जोखिम बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को उन उपायों को करते रहने की सलाह देते हैं जिससे इस गंभीर रोग के खतरे को कम किया जा सके। गठिया की समस्या जोड़ों में तेज दर्द, सूजन और जकड़न का कारण बनती है जिसके कारण लोगों के लिए चलना और सीढ़ियां चढ़ना तक काफी कठिन हो जाता है।
Health Tips: किसी को भी हो सकता है आर्थराइटिस, ऐसी गड़बड़ आदतें समय से पहले बढ़ा देती हैं खतरा, रहें सावधान
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शारीरिक निष्क्रियता के कारण बढ़ रहा है गठिया का जोखिम
व्यायाम न करना या ऑफिस में लंबे समय तक बैठे रहने की आदत आपमें गठिया की समस्या के जोखिम को बढ़ा सकती है। शारीरिक निष्क्रियता के कारण जोड़ों की मांसपेशियां कठोर होने लगती हैं, जो आगे चलकर आर्थराइटिस के जोखिम को बढ़ाने का कारण बनती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यदि आप नियमित रूप से जिम नहीं जा पा रहे हैं तो भी हल्के स्तर के व्यायाम जैसे साइकिलिंग, वॉकिंग और तैराकी के माध्यम से भी शारीरिक रूप से सक्रियता बढ़ाकर गठिया के खतरे को कम कर सकते हैं।
पीठ पर भारी बोझ लेकर चलना
पीठ पर भारी बोझ लेकर चलना चाहे वह बैकपैक हो या ऑफिस बैग, आपकी गर्दन, कंधों और पीठ पर बहुत अधिक तनाव डाल सकता है। जब आप भारी वजन उठाते हैं, तो यह आपके संतुलन और यहां तक कि आपके चलने के तरीके को भी प्रभावित करता है। इसका परिणाम यह होता है कि शरीर के उस तरफ की मांसपेशियों और जोड़ों पर दबाव अधिक हो जाता है। यह स्थिति उन मांसपेशियों के लिए तनाव की समस्या को बढ़ा देती है, जिससे जोड़ों में दर्द और सूजन हो सकता है, इस तरह की आदतों से बचें।
धूम्रपान और तंबाकू के कारण बढ़ता खतरा
तंबाकू उत्पाद न केवल फेफड़ों और हृदय की बीमारियों के जोखिम को बढ़ाते हैं, साथ ही इसके कारण जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या होने का भी खतरा हो सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि धूम्रपान से निकलने वाला निकोटीन आपकी रीढ़ की हड्डी, ऊतकों और डिस्क में रक्त के प्रवाह को कम कर देता है। निकोटीन, कैल्शियम के अवशोषण को भी कम कर देता है। सिगरेट पीने से हड्डी के नए ऊतकों के बनने में रुकावट आती है जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। धूम्रपान की आदत छोड़कर गठिया की समस्या के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
बैठने-सोने के तरीके में करें सुधार
बैठने के तरीके में गड़बड़ी, खराब पोश्चर के कारण भी समय के साथ गठिया की समस्या विकसित होने का खतरा हो सकता है। खराब पोस्चर होने से आपके जोड़ों पर तनाव अधिक होने का खतरा रहता है इसके अलावा रक्त के संचार में कमी और मांसपेशियों में जकड़न की समस्या भी अधिक रहती है। यह सभी स्थितियां जोड़ों में दर्द और गठिया की समस्या को बढ़ाने वाली मानी जाती हैं। बैठने-सोने के तरीके में गड़बड़ी जोड़ों के साथ पीठ और रीढ़ की समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ाने वाली मानी जाती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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