क्या आप जानते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कुछ प्रकार की बीमारियों का खतरा अधिक होता है? महिलाओं में हड्डियों से संबंधित विकार और गठिया के मामले भी ज्यादा रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों का घनत्व कम होने (लो बोन मास) का खतरा बहुत अधिक देखा जाता रहा, इसका मुख्य कारण मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का तेजी से कम होना माना जाता है।
बोन हेल्थ: महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कब सबसे ज्यादा बढ़ जाता है? आप कैसे करें बचाव
महिलाओं में उम्र बढ़ने, खासकर मेनोपॉज के बाद हड्डियों के कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, कम शारीरिक गतिविधि, कम वजन, धूम्रपान और कुछ दवाएं भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या
ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी बीमारी है जिसका कई मामलों में तब पता चल पाता है जब आपको कोई फ्रैक्चर हो जाता है। इसमें हड्डियों का घनत्व और मजबूती बहुत कम हो जाती है, जिससे वे बेहद नाजुक और फ्रैक्चर के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं।
- महिलाओं में इसका खतरा खास तौर पर उम्र बढ़ने और मेनोपॉज के आसपास बढ़ जाता है। इस समय एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है।
- इसके अलावा शरीर में कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी, शारीरिक गतिविधियों में कमी, धूम्रपान-शराब जैसी आदतें भी खतरा बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
मेनोपॉज के बाद बढ़ जाता है खतरा
महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। मेनोपॉज के आसपास एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने से हड्डियों का नुकसान तेज हो जाता है। यही वजह है कि मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
- जिन महिलाओं का वजन ज्यादा होता है या जिन्हें पहले से हड्डियों में कमजोरी की समस्या है उनमें ऑस्टियोपोरोसिस और आर्थराइटिस का जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है।
कैल्शियम और विटामिन की कमी
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी दोनों जरूरी हैं।
- कैल्शियम हड्डियों की संरचना के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि विटामिन डी शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करता है।
- दूध-दही जैसे खाद्य पदार्थ, कैल्शियम वाली दूसरी चीजें इन पोषक तत्वों की पूर्ति करने में मदद करती हैं।
- हड्डियों के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। वॉकिंग जैसी गतिविधियां हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।
- वहीं लंबे समय तक बैठे रहना, धूम्रपान और शराब भी हड्डियों के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।
फिर कैसे रखें हड्डियों को मजबूत?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ऑस्टियोपोरोसिस को साइलेंट बीमारी कहा जाता है, क्योंकि शुरुआत में आमतौर पर इसके कोई खास लक्षण नहीं होते। यही कारण है कि मामूली चोट या गिरने पर हड्डियों के टूटने या रीढ़ की हड्डी में झुकाव जैसे बदलाव दिखाई दे सकते हैं।
उम्र, मेनोपॉज और फैमिली हिस्ट्री जैसी स्थितियां आपके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है। जिन महिलाओं का जोखिम कारक अधिक है उन्हें डॉक्टर की सलाह पर समय रहते उपाय शुरू कर देने चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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