फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

वैसे लोग जो शौच के बाद भी हाथ नहीं धोते, उन्हें कितना भारी पड़ेगा कोरोना वायरस?

Sat, 02 May 2020 07:39 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: निलेश कुमार Updated Sat, 02 May 2020 07:39 PM IST
विज्ञापन
Why handwash is must to prevent coronavirus Hand wash 30 percent people dont
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सुझाए जा रहे तमाम नुस्खों में से एक ये भी है कि अपने हाथ नियमित रूप से साफ करें। मगर, आप ये जान कर हैरान रह जाएंगे कि दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा नियमित रूप से हाथ साफ नहीं करता। यहां तक कि बहुत से लोग हाजत के बाद भी हाथों को साबुन से नहीं धोते। अमरीकी न्यूज चैनल फॉक्स न्यूज के एंकर पीट हेगसेथ अपने विवादों की वजह से ज्यादा चर्चित रहे हैं। लेकिन, हेसगेथ ने पिछले साल ये कह कर हंगामा बरपा दिया था कि मुझे याद नहीं पड़ता कि पिछले दस सालों में मैंने कभी अपने हाथ धोए।



पीट हेसगेथ के इस बयान पर बहुत से लोगों ने नाक-भौं सिकोड़ी। किसी को घिन आई। और बहुत से लोगों ने तो इस पर लेख भी लिख मारे कि एक दशक तक हाथ न धोने के बाद आपके हाथों में क्या क्या हो सकता है। लेकिन, ऐसा करने वाले पीट हेसगेथ अकेले सेलेब्रिटी नहीं। 2015 में अमरीकी अभिनेत्री जेनिफर लॉरेंस ने कह कर बवाल खड़ा कर दिया था कि वो बाथरूम जाने के बाद कभी भी अपने हाथ नहीं धोतीं।

Why handwash is must to prevent coronavirus Hand wash 30 percent people dont
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

उसी साल, अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी के उत्तरी कैरोलिना राज्य के एक सीनेटर ने कहा कि रेस्टोरेंट में काम करने वालों पर बार-बार हाथ धोने का दबाव बनाना नियमों का दुरुपयोग है। हो सकता है कि 10 साल तक हाथ न धोने वालों की तादाद कम ही हो। जो लोग शौच के बाद नियमित रूप से हाथ धोते हैं, उन्होंने देखा होगा कि उनके आस-पास बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो शौच के बाद भी हाथ नहीं धोते। साल 2015 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया में करीब 26.2 फीसदी लोग, मल त्याग के बाद साबुन से हाथ नहीं धोते।

लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन ऐंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के विशेषज्ञ रॉबर्ट औंगर कहते हैं कि, 'शौच के बाद भी हाथ न धोना एक आम आदत है। आपको पता होना चाहिए कि हम लोग करीब 25 साल से लोगों को इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। लेकिन, अभी भी इस नियम का पालन करने वालों की तादाद बहुत कम है।'

Why handwash is must to prevent coronavirus Hand wash 30 percent people dont
Hand Wash

इसकी एक बड़ी वजह ये मानी जाती है कि दुनिया में बहुत से लोगों के पास हाथ धोने की बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। जैसे कि साबुन और पानी। दुनिया के सबसे कम विकसित देशों में केवल 27 प्रतिशत लोगों के पास ये सुविधाएं हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ का अनुमान है कि दुनिया भर में करीब तीन अरब लोग ऐसे हैं, जिनके पास हाथ धोने के लिए साबुन और पानी की बुनियादी सुविधा नहीं है।

मगर, हाथ न धोने की गंदी आदत का ताल्लुक सिर्फ संसाधनों की उपलब्धता की कमी से नहीं है। जिन देशों में पानी और साबुन दोनों ही पर्याप्त से भी ज्यादा मात्रा में उपलब्ध है। वहां भी आधे लोग ही टॉयलेट जाने के बाद उनका इस्तेमाल करते हैं। इन आंकड़ों के बाद तो शायद आप ये सोचें कि कोहनी छू कर ही अभिवादन करने को कोरोना काल के बाद भी स्थाई तरीका बना दिया जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
Why handwash is must to prevent coronavirus Hand wash 30 percent people dont
टॉयलेट - फोटो : pixabay

ये आंकड़े तब और हैरान करते हैं, जब आपको ये पता चलता है कि मानवता के इतिहास में हाथ धोने की आदत का आविष्कार, इंसानों की जान बचाने का सबसे कारगर नुस्खा साबित हुआ है। आज दुनिया के कई देशों, जैसे कि ब्रिटेन में इंसानों की औसत उम्र अगर 80 बरस है। जबकि 1850 में ब्रिटेन के लोगों की औसत उम्र चालीस वर्ष हुआ करती थी। ये वही दौर था, जब हाथ धोने के फायदों का सबसे पहले प्रचार शुरू हुआ था। 2006 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, अगर आप नियमित रूप से अपने हाथों को अच्छे से साफ करते हैं, तो इससे आपको सांस की बीमारियां होने की आशंका 44 प्रतिशत से घट कर केवल 6 फीसद रह जाती है।

कोविड-19 की महामारी के प्रकोप के बाद वैज्ञानिकों ने पाया है कि जिन देशों में हाथों को नियमित रूप से धोने की संस्कृति है, वहां पर इसका संक्रमण कम हुआ है। आखिर क्या कारण है कि हम में से कई लोग ऐसे हैं, जो हाथ साफ करने को लेकर इतने सजग रहते हैं कि इसके लिए ऊंची कीमत पर भी सैनिटाइजर खरीदने का हौसला रखते हैं। वहीं, बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें साबुन से हाथ धोने तक में परेशानी है। अब अगर नए वायरसों के प्रकोप और टीवी के रिमोट पर मल लगे होने जैसे उदाहरण भी उन्हें हाथ धोने के लिए प्रेरित नहीं कर पा रहे, तो फिर उन्हें किस तरह अपनी इस बुरी आदत से छुटकारा पाने के लिए राजी किया जा सकता है?

विज्ञापन
Why handwash is must to prevent coronavirus Hand wash 30 percent people dont
Hand Wash

ऐसा लगता है कि सिंक तक रुक कर हाथ धोने की आदत न होना सिर्फ आलस नहीं है। ये लोगों की सोच से लेकर, अति आत्मविश्वास तक पर निर्भर करता है। फिर उन्हें किन हरकतों से घिन आ सकती है। और अन्य मनोवैज्ञानिक कारण भी हैं, जो लोगों को साफ सफाई पसंद या इनसे परहेज करने वाला बनाते हैं। इन छुपे हुए कारणों का पता लगाने में जुटे विशेषज्ञों को लगता है कि वो इनके जरिए लोगों को साफ सफाई रखने के लिए राजी कर सकेंगे।

रॉबर्ट औंगर कहते हैं कि विकसित देशों में लोग हाथ न धोने की बुरी आदत के बावजूद बीमार होने से बच जाते हैं। अगर आप इसके कारण बीमार पड़ते भी हैं, तो कई दिनों बाद। तब तक लोगों के जहन से ये खयाल निकल जाता है कि हाथ न धोने और बीमारी के बीच ताल्लुक है। रॉबर्ट का कहना है कि, 'कोरोना वायरस के संक्रमण की बात करें तो भी इससे संक्रमित होने और इसके लक्षण सामने आने के बीच पांच छह दिनों का फासला होता है। ऐसे में साफ सफाई न रखने और संक्रमण के बीच संबंध के बारे में सोच पाना मुश्किल होता है।'

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed