कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर अबतक स्पष्ट तथ्य सामने नहीं आए हैं। कभी इसके चमगादड़, कभी पैंगोलिन से फैलने की बात कही जाती है तो कभी लैब में इसे तैयार करने के आरोप लगाए जाते हैं। खैर इसके पीछे के तथ्यों और तर्कों से इतर यह पहले से एक बात ये कही जा रही है कि यह जानवरों के मुकाबले इंसानी शरीर को आसानी से जकड़ता है। अब ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने भी अपने शोध में यह दावा किया है कि कोरोना वायरस जानवरों की अपेक्षा इंसानों में आसानी से प्रवेश कर जाता है। ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है।
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जानवरों के मुकाबले इंसानी शरीर में क्यों आसानी से प्रवेश कर जाता है कोरोना वायरस?
Fri, 22 May 2020 05:01 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Fri, 22 May 2020 05:01 PM IST
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जानवरों के मुकाबले इंसानी शरीर को आसानी से जकड़ता है कोरोना वायरस
- फोटो : PTI
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pixabay
- शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना वायरस का 'स्पाइक प्रोटीन' इंसानों में पाए जाने वाले रिसेप्टर ACE-2 से मिलकर कोशिका को बहुत तेजी से संक्रमित करता है। पैंगोलिन और चमगादड़ के मुकाबले कोरोना वायरस इंसानी कोशिका में आसानी से और तेजी से प्रवेश कर जाता है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
- शोधकर्ता और वायरस विशेषज्ञ निकोलाई पैत्रोव्स्की के मुताबिक, कोरोना वायरस नई प्रजाति को आसानी से संक्रमित नहीं कर पाता। लेकिन यह इंसानी कोशिका को पहले भी संक्रमित कर चुका है, इसलिए इंसानी शरीर में इसका प्रवेश करना आसान होता है।
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कोरोना का वाहक कौन है, पता नहीं
- फोटो : Amar Ujala
स्पष्ट नहीं कि कोरोना आया कहां से?
- निकोलाई कहते हैं कि वायरस शायद पहले भी इंसानी कोशिका को संक्रमित कर चुका है। हो सकता है ऐसा किसी जैविक लैब में प्रयोग के दौरान हुआ हो। निकोलाई के मुताबिक, कोरोना आया कहां से, यह पता नहीं चला है। सार्स से लेकर इबोला वायरस के वाहक के बारे में पता है, लेकिन कोरोना का वाहक कौन है, पता नहीं।
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रिसर्च (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
- निकोलाई का कहना है कि चीन के वुहान में पैंगोलिन और चमगादड़ को इसका सोर्स माना जा रहा है। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि लैब में इन दोनों के क्रॉस कंटामिनेशन से नई तरह का वायरस पैदा हुआ है। हालांकि निकोलाई का कहना है कि इसकी उत्पत्ति पर अभी और रिसर्च की जरूरत है।