पिछले दो महीनों से जारी कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के संक्रमण से पूरा देश परेशान है। हालांकि कुछ दिनों से रोजाना के कम होते संक्रमण के मामले थोड़ी राहत देने वाले है, इस बीच एक नई बीमारी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल के कुछ हिस्सों से क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (केएफडी) संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए गए हैं। आम भाषा में इसे मंकी फीवर के नाम से भी जाना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में वन विभाग से संबंधित एक व्यक्ति ने बुखार और बदन दर्द जैसे लक्षणों की शिकायत की, जिसकी जांच में मंकी फीवर का मामला सामने आया है। आसपास के 20 और लोगों की भी जांच की गई है, फिलहाल उनकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
What is Monkey Fever: कोरोना संक्रमण के बीच सामने आई ये नई मुसीबत, लक्षण से लेकर उपचार तक जानिए सबकुछ विस्तार से
मंकी फीवर क्या है?
क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (केएफडी) या मंकी फीवर एक वायरल रक्तस्रावी बुखार है, जो फ्लेविविरिड फैमिली से संबंधी वायरस से संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी है। कई तरह के कीड़ों को इस वायरस का वाहक माना जाता है, इंसानों को इन कीड़ों के काटने से संक्रमण हो सकता है। मंकी फीवर एक वेक्टर जनित रोग है जो मुख्य रूप से बंदरों और मनुष्यों को प्रभावित करता है। आमतौर पर यह संक्रमण उन लोगों में फैलता है जो जंगलों से संबंधित व्यवसाय से जुड़े हैं या फिर संक्रमित बंदरों के संपर्क में रहते हैं।
मंकी फीवर के क्या लक्षण होते हैं?
अध्ययनों मे पाया गया है कि संक्रमितों में इसके लक्षण हल्के से गंभीर स्तर को हो सकते हैं। मनुष्यों में, शुरुआती तीन से आठ दिनों में तेज बुखार और सिरदर्द की दिक्कत होती है। इसके बाद आंतरिक रक्तस्राव के कुछ लक्षण जैसे नाक, गले, मसूड़ों या आंतों से रक्तस्राव की समस्या देखी जा सकती है। संक्रमितों को उल्टी, सुस्ती, कंपकंपी, बेचैनी और चिंता का भी अनुभव होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह रोग हमेशा घातक नहीं होता है। हर साल, लगभग 500 लोग इससे संक्रमित होते हैं, जिनमें से 15 से 50 लोगों की मृत्यु हो जाती है।
संक्रमण का प्रसार कैसे होता है?
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक संक्रमित गिलहरी, चूहे या अन्य कीड़ों के काटने से यह संक्रमण इंसानों में हो सकता है। हालांकि यह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से नहीं फैलता है। मृत संक्रमित बंदरों की देखरेख करने वाले लोगों में भी इस संक्रमण का खतरा हो सकता है। अधिकांश संक्रमित 15 से 20 दिनों में ठीक हो जाते हैं। हालांकि कुछ लोगों के उपचार की अवधि लंबी हो सकती है।
मंकी फीवर का क्या इलाज है?
मंकी फीवर का वैसे तो कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। हालांकि लक्षणों की पुष्टि हो जाने पर रोगी तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी जाती है। रोगियों में आम तौर पर डिहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है, इससे बचाव के लिए ड्रिप्स लगाई जाती है। इसके साथ हेमरेजिक ब्लीडिंग की समस्या को नियंत्रित करने के लिए कुछ अन्य आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय भी किए जाते हैं। डॉक्टर आमतौर पर बुखार से पीड़ित रोगियों को पूर्ण आराम करने के साथ खूब पानी या तरल पदार्थ, प्रोटीन युक्त आहार लेने की सलाह देते हैं।