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Health Tips: क्या होता है कफ, पित्त और वात? आपके स्वास्थ्य से क्या है इसका संबंध

Wed, 16 Jul 2025 12:11 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Wed, 16 Jul 2025 12:11 PM IST
सार

आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर वात, पित्त और कफ इन तीन ऊर्जाओं से मिलकर बना है। ये दोष हमारे शरीर के सभी कामों को नियंत्रित करते हैं, और इनका संतुलन ही हमें स्वस्थ रखता है। आइए इस लेख में हम इसी के बारे में जानते हैं।

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What is Kapha Pitta and Vata know their relation with your health
क्या होता है कफ, पित्त और वात? - फोटो : Freepik.com

Ayurveda Doshas in Detail: आज की आधुनिक जीवनशैली में हम अक्सर शरीर के भीतरी संतुलन को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि हमारा प्राचीन भारतीय चिकित्सा विज्ञान 'आयुर्वेद' हमें स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने के गहरे रहस्य सिखाता है। आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर केवल हड्डियां और मांसपेशियां नहीं, बल्कि तीन मूलभूत जैविक ऊर्जाओं या 'दोषों'- वात, पित्त और कफ से मिलकर बना है।



ये तीनों दोष हमारे शरीर की हर छोटी-बड़ी क्रिया को नियंत्रित करते हैं- चाहे वह सांस लेने की प्रक्रिया हो, भोजन का पाचन हो, या हमारे विचार और भावनाएं हों। प्रत्येक व्यक्ति में इन दोषों का एक अनूठा संतुलन होता है, जो उसकी खास शारीरिक बनावट, मानसिक स्वभाव और यहां तक कि बीमारियों के प्रति संवेदनशीलता को निर्धारित करता है।

आयुर्वेद का मूल सिद्धांत यही है कि जब ये दोष आपस में संतुलित रहते हैं, तो हम पूरी तरह स्वस्थ रहते हैं। लेकिन जैसे ही इस संतुलन में कोई गड़बड़ी आती है, शरीर में बीमारी के लक्षण प्रकट होने लगते हैं। आइए इस लेख में हम इन तीन दोषों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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सांस से संबंधित समस्या - फोटो : freepik

वात दोष
वात दोष वायु (हवा) और आकाश (स्थान) तत्वों से मिलकर बना है। यह हमारे शरीर में सभी प्रकार की गति को नियंत्रित करता है, जैसे सांस लेना, रक्त संचार, दिल की धड़कन, मांसपेशियों का हिलना और तंत्रिका तंत्र के संदेश। वात प्रधान लोग आमतौर पर दुबले-पतले, फुर्तीले और रचनात्मक होते हैं।

संतुलित वात होने पर व्यक्ति में उत्साह, तेजी से सोचने की क्षमता और अच्छी ऊर्जा होती है। लेकिन, जब वात असंतुलित होता है, तो व्यक्ति को जोड़ों में दर्द, कब्ज, गैस, त्वचा में सूखापन, अनिद्रा (नींद न आना), चिंता और घबराहट जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ठंडा, सूखा या हल्का भोजन, ज्यादा तनाव और अनियमित दिनचर्या वात को बढ़ा सकते हैं।


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पाचन तंत्र - फोटो : Freepik.com

पित्त दोष
पित्त दोष अग्नि (आग) और जल (पानी) तत्वों से मिलकर बना है। यह हमारे शरीर में पाचन, चयापचय और सभी प्रकार के परिवर्तन को नियंत्रित करता है। यह भोजन को ऊर्जा में बदलने, बुद्धि और भावनाओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पित्त प्रधान लोग अक्सर मध्यम कद-काठी के, तीव्र बुद्धि वाले और दृढ़ निश्चयी होते हैं।

संतुलित पित्त वाले लोग अच्छा पाचन, तेज दिमाग और नेतृत्व क्षमता रखते हैं। लेकिन, पित्त के असंतुलित होने पर एसिडिटी, पेट में जलन, त्वचा पर दाने या मुंहासे, गुस्सा, चिड़चिड़ापन और ज्यादा पसीना आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। तीखा, खट्टा, बहुत गर्म भोजन और ज्यादा गुस्सा पित्त को बढ़ा सकते हैं।


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कफ दोष: जोड़ों में समस्या - फोटो : Freepik.com

कफ दोष
कफ दोष पृथ्वी (मिट्टी) और जल (पानी) तत्वों से मिलकर बना है। यह हमारे शरीर को स्थिरता, संरचना, चिकनाई और प्रतिरक्षा प्रदान करता है। यह जोड़ों को चिकना रखता है, शरीर को शक्ति देता है और कोशिकाओं का विकास करता है। कफ प्रधान लोग आमतौर पर मजबूत और सहनशील होते हैं।

संतुलित कफ होने पर व्यक्ति में स्थिरता, धैर्य, अच्छी नींद और मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है। लेकिन, कफ के असंतुलित होने पर वजन बढ़ना, सुस्ती, आलस, सर्दी-खांसी, बलगम, साइनस की समस्या और डिप्रेशन जैसी परेशानियां हो सकती हैं। मीठा, भारी, तैलीय भोजन, कम शारीरिक गतिविधि और ज़्यादा सोना कफ को बढ़ा सकता है।

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पौष्टिक खानपान - फोटो : Adobe
संतुलन ही स्वस्थ जीवन की कुंजी
आयुर्वेद सिखाता है कि हर व्यक्ति में ये तीनों दोष मौजूद होते हैं। स्वस्थ रहने के लिए इन दोषों को संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। यह संतुलन खानपान, जीवनशैली, योग, ध्यान और आयुर्वेदिक उपचारों के माध्यम से बनाए रखा जा सकता है। अपनी प्रकृति को समझना और उसके अनुसार अपनी दिनचर्या व आहार में बदलाव करना बीमारियों से बचने और लंबे, स्वस्थ जीवन जीने के लिए जरूरी होता है। 

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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