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Blood Pressure: क्या होता है सिस्टोलिक-डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर? कितनी रीडिंग का क्या मतलब, जानिए सबकुछ

Sun, 30 Jun 2024 01:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 30 Jun 2024 01:04 PM IST
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What Does the Diastolic Blood Pressure Number Mean know details about blood pressure
ब्लड प्रेशऱ की समस्या - फोटो : Freepik

रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर बढ़ने से हृदय रोग, स्ट्रोक सहित कई प्रकार की दिक्कतें हो सकती हैं। हाई ब्लड प्रेशर तंत्रिकाओं, किडनी सहित कई अंगों के लिए समस्याकारक स्थिति है, इस बारे में हम सभी लगातार सुनते-पढ़ते आ रहे हैं। पर क्या आप ब्लड प्रेशर के बारे में जानते हैं? सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर क्या होता है, कितनी रीडिंग का क्या मतलब है, आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।



जब हम अपने ब्लड प्रेशर की रीडिंग लेते हैं तो उसमें दो नंबर प्राप्त होते हैं। ऊपर का और नीचे का यानी सिस्टोलिक और डायस्टोलिक। ब्लड प्रेशर को समझने के लिए इन दोनों को जानना महत्वपूर्ण है। इनका क्या मतलब है, आइए जानते हैं।

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सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर की समस्या - फोटो : istock

क्या होता है सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर?

सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर उस दबाव को मापता है जो आपका रक्त, दिल की धड़कन के दौरान धमनी की दीवारों पर डालता है। यानी जब हमारा हृदय सिकुड़ता है (सिस्टोल) तो धमनियों में दबाव को सिस्टोलिक रक्तचाप कहा जाता है। आइए रीडिंग से इसे समझते हैं।

  • सामान्य: 120 से कम।
  • बढ़ा ब्लड प्रेशर: 120-129
  • चरण I: उच्च रक्तचाप 130-139
  • चरण II: उच्च रक्तचाप: 140 या अधिक
  • गंभीर स्थिति: 180 या अधिक।
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ब्लड प्रेशर - फोटो : istock

डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर के बारे में जानिए

डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर जिसे नीचे की संख्या के रूप में जाना जाता है, यह धड़कनों के बीच हृदय के आराम करने के दौरान धमनियों पर पड़ने वाले दबाव को कहा जाता है। आपके डायस्टोलिक रक्तचाप की रीडिंग का क्या मतलब है?

  • सामान्य: 80 से कम
  • चरण I: उच्च रक्तचाप: 80-89
  • चरण II: उच्च रक्तचाप: 90 या अधिक
  • उच्च रक्तचाप संकट: 120 या अधिक। 

यहां गौर करने वाली बात ये भी है कि भले ही आपकी डायस्टोलिक रीडिंग 80 से कम हो, लेकिन यदि सिस्टोलिक रीडिंग 130 या इससे अधिक बना हुआ है तो इसे हाई ब्लड प्रेशर माना जाता है।

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रक्तचाप की समस्या - फोटो : istock

सामान्य ब्लड प्रेशर की रीडिंग

सामान्य ब्लड प्रेशर का रेंज 120/80 से कम माना जाता है। यदि सिस्टोलिक और डायस्टोलिक दोनों में से कोई भी ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ या बहुत कम है तो समय रहते इस बारे में डॉक्टर से जरूर बात कर  लें। ब्लड प्रेशर का बढ़ा रहना तो खतरनाक है ही, इसका लगातार सामान्य से कम बने रहना भी कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। जीवनशैली और आहार में कुछ बदलाव करके रक्तचाप को कंट्रोल रखने में मदद मिल सकती है।

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ब्लड प्रेशर की स्थिति - फोटो : istock

कैसे रखें ब्लड प्रेशर को कंट्रोल?

ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने के लिए जरूरी है कि जीवनशैली और आहार को ठीक रखें। हालांकि जिन लोगों का ब्लड प्रेशर अक्सर सामान्य से कम या ज्यादा रहता है उन्हें इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर लेना चाहिए। आइए उन उपायों के बारे में जानते हैं कि जिससे रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।

  • सोडियम की कम रखें मात्रा: आहार में सोडियम (नमक) की मात्रा कम रखना ब्लड प्रेशर ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मददगार है। 
  • अध्ययनों से पता चलता है कि प्रतिदिन एरोबिक व्यायाम या हल्के स्तर अभ्यास की मदद से भी रक्तचाप को नियंत्रित रखा जा सकता है।
  • ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी है आप वजन को कंट्रोल में रखें। यदि आपका वजन अधिक है, तो इससे भी ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। 
  • आहार में हरी सब्जियां-फल, साबुत अनाज, लो फैट वाले वाले डेयरी उत्पादों को शामिल करके भी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखा जा सकता है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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