वैश्विक स्तर पर कोरोना के मामले भले ही इन दिनों नियंत्रित दिख रहे हैं, पर संक्रमण का जोखिम अभी भी कम नहीं हुआ है। अध्ययनकर्ताओं ने चेताया है कि कोरोना वायरस में समय-समय पर म्यूटेशन देखा जा रहा है जिससे नए वैरिएंट्स के खतरा लगातार बना हुआ है। नए वैरिएंट्स आसानी से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देने वाले देखे जा रहे हैं ऐसे में इससे बचाव को लेकर लगातार सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
Covid-19: कोविड वैक्सीन को लेकर ये दो महत्वपूर्ण बातें जाननी बेहद जरूरी, सीडीसी ने जारी किए नए दिशानिर्देश
पहला- अपडेटेड कोविड वैक्सीन लेने की सलाह
द न्यूयार्क टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट में सीडीसी ने बताया, अधिकांश अमेरिकियों ने बार-बार संक्रमण या वैक्सीनेशन, या फिर दोनों से कोरोनावायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा हासिल कर ली है। हालांकि अध्ययनों में देखा गया है कि टीके केवल कुछ महीनों तक ही प्रभावी रहते हैं और समय के साथ इनकी प्रभाविकता कम हो जाती है। इस जोखिम को कम करने के लिए सभी लोगों को अपडेटेड कोविड शॉट्स लेने की जरूरत है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
सीडीसी की निदेशक डॉ. मैंडी कोहेन ने वैज्ञानिकों की सर्वसम्मत सलाह को स्वीकार करते हुए टीकाकरण के एक और डोज की सिफारिश की है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ नर्स-मिडवाइव्स में अधिकारी कैरोल हेस ने कहा, आम जनता यह नहीं समझ पा रही है कि इस वायरस में कितना परिवर्तन हुआ है। इस साल के वायरस के स्ट्रेन से बचाव के लिए हमें नए टीके की जरूरत है।
नोवावैक्स द्वारा अपडेट किया गया टीका JN.1 को लक्षित करने में बेहतर पाया गया है, जो पिछले कई महीनों तक सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला वैरिएंट रहा है। फाइजर और मॉडर्ना द्वारा अपडेट की गई वैक्सीन वायरस के KP.2 स्ट्रेन को लक्षित करने में बेहतर पाई गई है।
दूसरा- वैक्सीनेशन को लेकर अध्ययन में बड़ा खुलासा
इसी बीच वैक्सीनेशन को लेकर हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि टीके न सिर्फ कोरोना के जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकते हैं, साथ ही इससे कोविड संक्रमण के कारण होने वाली एक गंभीर समस्या के खतरे को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
अध्ययनकर्ताओं ने कहा, करीब 10 से 30% लोगों को वायरस के कारण किसी न किसी तरह की संज्ञानात्मक हानि का अनुभव किया है। संक्रमण के कारण लोगों को ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, ब्रेन फॉग या याददाश्त का कमजोरी की दिक्कतों का अनुभव हो रहा है। वैक्सीनेशन इन जोखिमों से बचाने में भी मददगार हो सकती है।
टीकाकरण से कम हो सकता है संज्ञानात्मक जोखिम
कोरोना संक्रमण के कारण मस्तिष्क में होने वाली समस्याओं के पीछे के तंत्र का पता लगाने के लिए अध्ययन किया। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों का संक्रमण के पहले टीकाकरण हो चुका था उनमें टीकाकरण न कराने वाले लोगों की तुलना में इस तरह के जोखिम कम देखे गए हैं।
नेचर इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट में कहा गया है कि टीकाकरण और स्मृति हानि जैसी संज्ञानात्मक समस्याओं के बीच एक आशाजनक संबंध पाया।
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स्रोत और संदर्भ
Vaccination reduces central nervous system IL-1β and memory deficits after COVID-19 in mice
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