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विशेषज्ञ की सलाह: बढ़ते प्रदूषण के कारण इन चार बीमारियों का खतरा सबसे अधिक, सभी लोग बरतें सावधानी

Sat, 05 Nov 2022 02:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 05 Nov 2022 02:20 PM IST
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What are the health effects of air pollution, it cause lung heart and eye problems
वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम - फोटो : istock

राजधानी दिल्ली और एनसीआर सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण का खतरा लोगों के लिए बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 470 से अधिक बना हुआ है, जिसे विशेषज्ञ बहुत गंभीर मान रहे हैं। इस प्रकार के हवा के संपर्क में रहने कारण कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने का खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायु प्रदूषण का गंभीर असर शरीर के कई अंगों पर नकारात्मक रूप में हो सकता है। सामान्यतौर पर प्रदूषण को सिर्फ सांस की बीमारियों तक ही जोड़कर देखा जाता रहा है, पर वास्तव में इसके कारण और भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।





वायु प्रदूषण के कारण होने वाले दुष्प्रभावों को जानने के लिए किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि खराब वायु गुणवत्ता में लंबे समय तक रहना क्रोनिक और जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है। वायु प्रदूषण के कारण आंखों, त्वचा पर दिखने वाले प्रारंभिक दुष्प्रभावों के अलावा फेफड़ों और हृदय के साथ न्यूरोलॉजिकल और मानसिक स्वास्थ्य विकारों का भी जोखिम हो सकता है जिसको लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।

आइए जानते हैं कि प्रदूषण किस तरह से शरीर को प्रभावित कर सकता है?

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प्रदूषण का फेफड़ों पर असर - फोटो : iStock

फेफड़ों और श्वसन विकारों का खतरा

वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों और श्वसन विकारों का खतरा सबसे अधिक देखा जाता रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, प्रदूषण में सांस लेने से हानिकारक तत्व आपके वायुमार्ग से होते हुए फेफड़ो में चले जाते हैं। इसके कारण वायुमार्ग में जलन, सांस की तकलीफ, खांसी, घरघराहट और सीने में दर्द हो सकती है। वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण फेफड़ों के कैंसर, दिल का दौरा पड़ने, स्ट्रोक का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। प्रदूषण से फेफड़ों को सबसे अधिक प्रभावित होने वाले अंग के तौर पर जाना जाता है।

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प्रदूषण के कारण आंखों में खुजली-जलन - फोटो : iStock

आंखों पर दुष्प्रभाव

फेफड़ों के अलावा वायु प्रदूषण के कारण आंखों पर भी सीधा दुष्प्रभाव हो सकता है। यही कारण है कि प्रदूषित माहौल में जाने से आंखों में खुजली-जलन, लालिमा, दर्द जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लंबे समय तक इस प्रकार की दूषित हवा के संपर्क में रहने के कारण कंजक्टिवाइटिस, ग्लूकोमा, मोतियाबिंद और ऐज रिलेटेड मैक्युलर डिजनरेशन (एएमडी) जैसे कई नेत्र रोगों के विकसित होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

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प्रदूषण का तंत्रिकाओं पर असर - फोटो : pixabay

न्यूरोलॉजिकल विकारों का जोखिम

वायु प्रदूषण को अध्ययनों में न्यूरोलॉजिकल विकारों को भी बढ़ावा देने वाला माना जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रदूषित हवा, मस्तिष्क के लिए भी नुकसानदायक हो सकती है। अध्ययन में वायु प्रदूषण के उच्च स्तर में रहने वाले बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमताओं में गिरावट की दिक्कत देखी गई है। इसके अलावा वायु प्रदूषण के कारण कई प्रकार के आवश्यक हार्मोन्स का स्राव कम हो जाता है, इसके अलावा यह तंत्रिकाओं की क्षति का भी कारण बनती है। जिसके कारण समय के साथ अल्जाइमर और डेमेंशिया जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।

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अवसाद का बढ़ता खतरा - फोटो : Pixabay

मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि वायु प्रदूषण मस्तिष्क में कई प्रकार के परिवर्तन का कारण बनती है जो मानसिक बीमारियों के जोखिम को भी बढ़ा देती है। ओजोन और वायु प्रदूषण के अन्य घटक, शरीर में सूजन का कारण बनते हैं, जिसे चिंता विकार और गंभीर स्थितियों में अवसाद के खतरे को बढ़ाने वाला माना जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि किशोर इन दुष्प्रभावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं क्योंकि वे अधिक समय घर से बाहर बिताते हैं। वायु प्रदूषण से बचाव करते रहना सभी उम्र के लोगों के लिए आवश्यक है। 



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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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