चीन-अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में तेजी से बढ़ता कोरोना का संक्रमण एक बार फिर से लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से अध्ययनों में नए वैरिएंट्स की संक्रामता दर देखी जा रही है, वह निश्चित ही डराने वाली है। इससे बचाव के लिए हम सभी को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर का लगातार पालन करते रहने के साथ इम्युनिटी को मजबूत करने वाले उपायों पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
Covid Outbreak: कमजोर इम्युनिटी वाले हो सकते हैं संक्रमण का शिकार, ऐसे लक्षणों का मतलब आपमें भी है खतरा
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क्या कहते हैं सीडीसी के विशेषज्ञ?
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, आपमें कोरोना संक्रमण के खतरे को बढ़ा देती है। जब वायरस श्वसन मार्ग से शरीर में प्रवेश करता है तब प्रतिरक्षा प्रणाली इससे मुकाबला करके वहीं निष्क्रिय कर देती है। वहीं जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है उनमें संक्रमण बढ़ जाता है और गंभीर रूप लेने का खतरा हो सकता है।
हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसी स्थितियों में स्वाभाविक तौर पर प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, यही कारण है कि ऐसे लोगों में संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है।
आइए जानते हैं इम्युनिटी पावर की कमजोरी का अंदाजा कैसे लगाया जा सकता है?
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के संकेत
वयस्कों में साल में 2-3 बार सामान्य सर्दी-जुकाम होना सामान्य है, हालांकि अगर मौसम बदलते ही आपको छींक आना या बुखार शुरू हो जाता है तो आपको सावधान हो जाने की जरूरत है। यह आपकी कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली का संकेत हो सकती है। जिन लोगों की इम्युनिटी पावर कमजोर होती है, उनमें अन्य लोगों के मुकाबले मौसमी बुखार और संक्रमण का खतरा अधिक होती है। ऐसे लोगों को प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने वाले उपायों पर ध्यान देना आवश्यक हो जाता है।
कमजोरी और थकान की समस्या
प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी की स्थिति में आपमें अक्सर थकान और कमजोरी की समस्या बनी रह सकती है। जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है उनमें किसी प्रकार के रोग की स्थिति में शरीर को मुकाबले के लिए अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है, यही कारण है कि आपमें कमजोरी की दिक्कत बनी रह सकती है। नींद पूरी होने के बावजूद अगर आप थका हुआ महसूस करते हैं, तो इसे इम्युनिटी की कमजोरी का संकेत माना जा सकता है।
घावों को ठीक होने में लगता है अधिक समय
त्वचा में होने वाली कट या घावों को ठीक होने में अगर ज्यादा समय लग रहा है तो इसे भी इम्युनिटी पावर की कमजोरी का एक संकेत माना जाता है। आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली बीमारी से बचाने के साथ घावों को तेजी से भरने के लिए भी आवश्यक है। मधुमेह के शिकार लोगों में इसी वजह से घावों को ठीक होने में सामान्य से अधिक समय लगता है। ऐसे लोगों में भी कोविड-19 और अन्य तरह के संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।