आने वाले समय में भारत में कोरोना के दुष्प्रभाव और भी भयानक हो सकते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि नवंबर में उत्तरी गोलार्ध में फ्लू की शुरूआत हो जाती है। गौरतलब है कि भारत भी उत्तरी गोलार्ध का ही हिस्सा है। ऐसे में यदि फ्लू और कोरोना का टकराव हुआ तो यह किसी विस्फोट से कम नहीं होगा। नवंबर से फैलने वाला फ्लू फरवरी तक गोलार्ध में बना रहता है। चीन और अमेरिका में तो अबतक ऐसे कुछ मामले भी सामने आए हैं जिसमें मरीज एकसाथ कोरोना और इंफ्लूएंजा वायरस से होने वाले ‘फ्लू’ का शिकार हुए हैं। अगली स्लाइड्स से जानते हैं इन दोनों वायरस के टकराने से इंसान पर किस तरह पड़ेगा प्रभाव।
फ्लू और कोरोना साथ मिलकर शरीर को पहुंचा रहा है ज्यादा नुकसान, बढ़ जाता है मौत का खतरा
इस तरह होगा कोइंफेक्शन का परिणाम
वे चिकित्सक जो अबतक इस तरह के मामलों का इलाज कर चुके हैं, उनका कहना है कि कोरोना और फ्लू के वायरस में यह समानता है कि दोनों ही शरीर को इस तरह प्रभावित करते हैं कि रोगी को श्वास संबंधी समस्याओं और ब्लड- ऑक्सीजन लेवल में कमी की समस्याओं से जूझना पड़ता है। विदेश में इस तरह के मामले सामने आना शुरू हो चुके हैं। सामान्यत: दिसंबर और जनवरी माह में भारत में भी अधिकतर लोग, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, फ्लू का शिकार हो जाते हैं।
इस तरह मिलते हैं वायरस
स्टेनफोर्ड हेल्थकेयर के संक्रमण विशेषज्ञ डीन विन्सलॉ के मुताबिक, यह एक बहुत छोटा अंतराल है जब एक वायरस के शरीर में मौजूद होने के वक्त ही छोटी सी जगह से दूसरा वायरस कोशिकाओं तक प्रवेश कर जाए। पहले वायरस ने वैसे ही मरीज की रोग- प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर ही दिया होता है, जिस कारण दूसरा वायरस आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकता है।
मरने की संभावना हो जाती है दोगुनी
हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति पर दोनों वायरस ने एक साथ हमला किया तो उसके मरने की संभावना एक सामान्य कोरोना मरीज के मुकाबले दोगुनी हो जाएगी। इस तरह के मरीजों का उपचार आईसीयू और वेंटीलेटर पर ही संभव हो पायेगा। चीन में भी जिन मरीजों का पर्यवेक्षण किया गया, उनकी स्थिति कुछ इसी तरह पाई गई।
इन लोगों को रहना होगा बचकर
बुजुर्गों के लिए ये कोइंफेक्शन किसी खतरे से खाली नहीं है। बुजुर्गों की रोग- प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है। बहुत जरूरी है कि आने वाले दिनों में उनका अधिक ख्याल रखा जाए। वे लोग जो फेफड़ों के बीमारियों, कैंसर, मोटापे आदि से पीड़ित हैं, उनके लिए भी इस कोइंफेक्शन से बच पाना थोड़ा मुश्किल है।