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विश्व स्वास्थ्य संगठन का दावा : कोरोना के नाम पर दिनभर सुस्ताने वाले लोगों पर मंडरा रहा है बड़ी बीमारियों का खतरा

Sat, 28 Nov 2020 05:11 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: तेजस्वी मेहता Updated Sat, 28 Nov 2020 05:11 PM IST
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the people who are not doing physical activities in this pandemic may suffer from big diseases said who
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्य को लेकर जारी की गाइडलाइंस - फोटो : Social media

कोरोना के प्रभाव को हम इस तरह से देख सकते हैं कि पिछले एक साल में कोरोना ने लोगों की पूरी जीवनशैली को बदलकर रख दिया है। लोगों ने अधिक से अधिक घर पर रहना शुरू कर दिया है, बाहर काम करने वाले अधिकांश लोग एक आरामदायक जीवन के आदि हो चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का दावा है कि कोरोनाकाल में लोग यदि शारीरिक सक्रियता पर जोर देते तो एक वर्ष में करीब पचास लाख मौत टाली जा सकती थीं। संगठन की नई गाइडलाइंस के अनुसार, एक व्यस्क के लिए सप्ताहभर में 150-200 मिनट शारीरिक श्रम करते हुए बिताना बहुत जरूरी हो चुका है नहीं तो विश्व का भविष्य सुरक्षित नहीं है। कई सारी मृत्यु सामान्य बीमारियों से तक हो सकती है। अगली स्लाइड्स जानते हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी गाइडलाइंस के बारे में। 

 

 

the people who are not doing physical activities in this pandemic may suffer from big diseases said who
कोरोनाकाल में लोग नहीं करते शारीरिक गतिविधियां - फोटो : Social media

चार में से एक व्यस्क नहीं करता कसरत
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, विश्व में 4 में से 1 व्यस्क किसी प्रकार की शारीरिक गतिविधि नहीं करते हैं, वहीं बड़ों के बात करें तो 5 में से 4 बड़े शारीरिक क्रियाओं में रूचि नहीं लेते हैं। जो लोग शारीरिक दुर्बलता से जूझ रहे हैं, उनके लिए तो बहुत जरूरी है कि उन्हें प्रतिदिन लगभग एक घंटा शारीरिक कसरत करवाई जाए। 

the people who are not doing physical activities in this pandemic may suffer from big diseases said who
कोरोनाकाल में हो सकती है बड़ी बीमारी - फोटो : iStock

शारीरिक श्रम न करने से होती हैं ये बीमारियां-
जो लोग दिनभर बैठे रहते हैं, आवश्यकता पड़ने पर ही उठते हैं या दिनभर आराम करते हैं, फिर वे किसी भी उम्र के क्यों न हों, उन्हें डायबिटीज, कैंसर, ह्दय संबंधी बीमारी, तनाव आदि होने का खतरा बना ही रहता है। कोरोना के कारण यही जीवनशैली अधिकतर लोगों ने अपना ली है और तनाव होना तो इसलिए आम समस्या बन चुका है, जो कि आगे चलकर बड़ी बीमारी में भी बदल जाता है। 

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प्रतिदिन करें 50-60 मिनट कसरत - फोटो : amar ujala

भारतीय डॉक्टरों का ये है कहना- 
विश्व स्वास्थ्य संगठन की बातों को ध्यान में रखते हुए भारतीय चिकित्सकों ने गाइडलाइन्स का स्वागत किया है लेकिन उनका कहना है कि भारतीयों के लिए इस कोरोनाकाल में जरूरी है कि प्रतिदिन वे 50-60 मिनट शारीरिक गतिविधियां करें क्योंकि इन दिनों डायबिटीज और अवसाद की समस्या भारत में चरम पर है। कोरोना से तो मरीज जूझ ही रहे हैं, साथ ही इन बीमारियों का बढ़ना अच्छा संकेत नहीं है। बेहतर है कि सब अभी से सचेत हो जाएं। 

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प्रतिदिन टहलें और स्वस्थ रहें - फोटो : PTI

इस तरह का शारीरिक श्रम करें-
युवा और वे लोग जिन्हें कोई समस्या नहीं है, वे तो हर तरह की शारीरिक गतिविधि कर सकते हैं। फिर चाहे वो कसरत, खेल या कोई डांस फॉर्म हो लेकिन जो महिलाएं गर्भवती हैं वे टहलना, बागबानी करना, योग आदि करें। बुजुर्ग भी अपनी क्षमता के अनुसार ही शारीरिक श्रम करें, लेकिन करें जरूर। साइक्लिंग, थोड़ी बहुत दौड़ आदि भी सेहत के लिए अच्छा विकल्प है। 

 

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