Medically reviewed by-
कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन दिए जाने का काम तेजी से चल रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैक्सीनेशन ही कोरोना के गंभीर संक्रमण और इसके कारण होने वाली मौत के खतरे से सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है। वैक्सीन लगवाने के बाद कुछ लोगों को साइड-इफेक्ट्स के रूप में बुखार, हाथों में दर्द या थकान की समस्या हो सकती है, हालांकि इससे घबराने की जरूरत नहीं है, यह सामान्य है। वैक्सीनेशन के बाद होने वाले साइड-इफेक्ट्स एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं, इसमें भी कुछ आसामान्य नहीं है।
वैक्सीनेशन से जुड़े स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि सामान्य तौर पर बुजुर्गों और युवा लोगों में टीके के साइड-इफेक्ट्स अलग हो सकते हैं। आइए इस लेख में विस्तार से इनके कारणों को समझने की कोशिश करते हैं, साथ ही जानते हैं कि दोनों आयुवर्ग के लोगों में साइड-इफेक्ट्स किस तरह से भिन्न हो सकते हैं?
टीकाकरण अभियान: युवाओं में हो सकते हैं वैक्सीनेशन के अधिक साइड-इफेक्ट्स, जानिए क्या है वजह?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वैक्सीनेशन के कारण होने वाले साइड-इफेक्ट्स
विशेषज्ञों के मुताबिक टीके के साइड-इफेक्ट्स लिंग, उम्र और वैक्सीन के प्रकार के आधार पर भी भिन्न हो सकते हैं। माना जाता है कि युवाओं को बुजुर्गों की तुलना में अधिक तीव्रता वाले दुष्प्रभावों का अनुभव हो सकता है। वैक्सीनेशन के कारण होने वाले साइड-इफेक्ट्स को जानने के लिए यूके के एक प्रमुख विश्वविद्यालय ने एमआरएनए और पारंपरिक वैक्सीन के दुष्प्रभावों का अध्ययन किया। आइए इस अध्ययन के आधार पर विभिन्न आयु वर्ग में होने वाले साइड-इफेक्ट्स के बारे में जानते हैं।
बुजुर्गों में होने वाले वैक्सीनेशन के साइड-इफेक्ट्स
माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती जाती है। शरीर में वैक्सीन के इंजेक्ट होते ही प्रतिरक्षा कोशिकाएं प्रतिक्रिया में लग जाती हैं। वृद्धावस्था में सामान्यतौर पर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया धीमी होती है, यही कारण है कि ज्यादा उम्र वाले लोगों में वैक्सीनेशन के अधिक तीव्र प्रभाव देखने को नहीं मिलते हैं। 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों पर किए गए परीक्षण में वैज्ञानिकों को यह बातें जानने को मिली हैं। अनुसंधान के मुताबिक वृद्ध लोगों में वैक्सीनेशन के कारण इंजेक्शन लगे स्थान पर दर्द, लालिमा, सूजन, शरीर में दर्द और थकान की समस्या हो सकती है। ज्यादा उम्र के लोगों में वैक्सीनेशन के बाद बुखार की शिकायत कम देखी गई है।
युवाओं में वैक्सीनेशन के साइड-इफेक्ट्स
विशेषज्ञों के मुताबिक युवावस्था में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता काफी मजबूत और सक्रिय रहती है। यही कारण है कि 65 साल वाले लोगों की तुलना में युवाओं में वैक्सीनेशन के साइड-इफेक्ट्स काफी हद तक अधिक प्रभावी हो सकते हैं। वैक्सीनेशन के बाद युवाओं को मुख्यरूप से थकान, हल्का बुखार, ठंड लगने, जोड़ों और पीठ दर्द के साथ बुखार की समस्या हो सकती है। युवा महिलाओं में टीकाकरण के बाद मतली, पेट में दर्द, ऐंठन और मासिक धर्म चक्र में अस्थायी परिवर्तन जैसी समस्या भी हो सकती है।
किन लोगों में एनाफिलेक्सिस का खतरा अधिक होता है?
वैक्सीनेशन के बाद कुछ लोगों में एनाफिलेक्सिस या एलर्जी की प्रतिक्रिया के मामले भी देखने को मिले हैं। एनाफिलेक्सिस के कारण एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैक्सीनेशन के बाद इस तरह की समस्या होना वैसे तो दुर्लभ है। फिर भी जिन लोगों को पहले से किसी चीज से गंभीर एलर्जी की दिक्कत रह चुकी हो, उन्हें वैक्सीनेशन के बाद एलर्जी की दिक्कत हो सकती है। यही कारण है वैक्सीनेशन के बाद सभी लोगों को सेंटर पर कम से कम 30 मिनट तक जरूर बैठना चाहिए, क्योंकि एनाफिलेक्सिस जैसे एलर्जी के लक्षण वैक्सीन लगने के कुछ मिनटों बाद ही दिखने लगते हैं। इस स्थिति में वैक्सीनेशन सेंटर पर मौजूद डॉक्टर इसे नियंत्रित करने के लिए दवाइयां दे सकते हैं।
----------------
नोट: यह लेख उजाला सिग्नस के डायरेक्टर डॉ शुचिन बजाज से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।