वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना संक्रमण और इसके कारण होने वाली जटिलताएं फिलहाल कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। भारत सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना के मामलों में एक बार फिर से उछाल देखा जा रहा है। हाल ही में सामने आए कोरोना के नए वैरिएंट्स और उनकी प्रकृति चिंता बढ़ाने वाली है। XE जैसे वैरिएंट्स को अत्याधिक संक्रामक बताया जा रहा है, जिससे बचाव के लिए विशेषज्ञ लोगों को और अधिक सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। कोरोना संक्रमण के साथ लॉन्ग कोविड के बढ़ते मामले भी इस समय विशेषज्ञों के लिए बड़ी चुनौती का कारण बने हुए हैं।
Latest Study: 30 फीसदी कोरोना संक्रमितों में हो सकती लॉन्ग कोविड की समस्या, ये स्थितियां बढ़ा देती हैं जटिलताएं
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लॉन्ग कोविड के खतरे को जानिए
जर्नल ऑफ जनरल इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि कुछ स्थितियां संक्रमितों में लॉन्ग कोविड या पोस्ट एक्यूट सीक्वेल ऑफ कोविड-19 (पीएएससी) विकसित होने का कारण बन सकती हैं। इसमें संक्रमण के दौरान जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत रही हो, पहले से मधुमेह या हाई बॉडी मास इंडेक्स की समस्या के शिकार रहे हों, उनमें इसका खतरा अधिक हो सकता है।
लॉन्ग कोविड के कुछ मामले एसिम्टोमैटिक संक्रमितों में भी देखने को मिले हैं, हालांकि ऐसे केस काफी कम हैं।
अध्ययन में क्या पता चला?
अप्रैल 2020 से फरवरी 2021 के बीच किए गए इस अध्ययन में 1,038 कोरोना संक्रमितों को शामिल किया गया, उनमें से 309 में लॉन्ग कोविड के मामले सामने आए। इन 309 लोगों में शोधकर्ताओं ने अलग-अलग तरह के लक्षण और रोग की जटिलताओं का अनुभव किया।
संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती रह चुके 31 फीसदी लोगों ने लॉन्ग कोविड में थकान और 15 प्रतिशत ने सांस की तकलीफ की जटिलताओं के बारे में बताया। जिन लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं थी, उनमें से 16 प्रतिशत लोगों ने लंबे समय तक गंध न आने की समस्या के बारे में सूचित किया।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इस अध्ययन के बारे में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य विज्ञान के सहायक प्रोफेसर सन यू कहते हैं, इस शोध से पता चलता है कि कोरोना संक्रमण के साथ-साथ हमें लॉन्ग कोविड के लक्षणों और रोगियों में इसकी जटिलताओं को लेकर भी विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।
कई कारक जैसे कोमोरबिडीटी, सोशियोडेमोग्राफिक फैक्टर, वैक्सीनेशन और वह किस वैरिएंट से संक्रमित रह चुका है, ये सभी लॉन्ग कोविड को पैदा करने में विशेष भूमिका निभाते हैं। संक्रमण से ठीक होने के बाद भी रोगियों और चिकित्सकों को स्थिति का फॉलोअप जरूर करते रहना चाहिए।
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ता कहते हैं, यह बड़ा विषय है कि संक्रमण के दौरान रोगी ने किस प्रकार के लक्षणों का अनुभव किया है, इसके आधार पर आगे की जटिलताओं का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। चूंकि रोग के लक्षण वैरिएंट की प्रकृति और रोगी की शारीरिक स्थिति, दोनों पर निर्भर करते हैं, ऐसे में लॉन्ग कोविड के उभरते वैश्विक जोखिमों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों को विशेष सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है। कुछ स्थितियों में लॉन्ग कोविड के कारण भी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, इस चुनौती को भी ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।
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स्रोत और संदर्भ
About 30 percent of COVID patients develop 'Long COVID,' research finds
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