कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने के लिए दुनियाभर के शोधकर्ता लगे हुए हैं। एक ओर इसकी वैक्सीन और दवा तैयार करने के लिए शोध हो रहे हैं तो दूसरी ओर इसे खत्म करने के लिए वैज्ञानिक ओर शोधकर्ता नए तरीके इजाद करने में लगे हैं। घर, बाहर या दफ्तर में आपने स्पंज तो देखा ही होगा। खासकर कैश काउंटर पर एक छोटे से डब्बे में पानी सोखे हुए स्पंज जरूर होता है, जिसमें उंगलियां भिंगोकर नोट गिनने में आसानी होती है। लेकिन क्या पानी की तरह स्पंज वायरस को भी सोख सकता है? अमेरिकी शोधकर्ताओं ने ऐसे स्पंज कण (नैनोस्पंज) तैयार किए हैं, जो कोरोना वायरस को निष्क्रिय करता है और उसकी संक्रमण क्षमता 90 फीसदी तक कम कर देता है।
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Coronavirus Cure: बालों से 30 गुना महीन नैनोस्पंज से कोरोना को खींचकर मारने की तैयारी
Fri, 19 Jun 2020 12:34 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Fri, 19 Jun 2020 12:34 PM IST
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Coronavirus Cure
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
Coronavirus Cure Update
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
- कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इसे तैयार किया है। दावा है कि ये नैनो स्पंस कोविड-19 से जंग में एक थेरेपी की तरह काम कर सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये नैनो स्पंज फेफड़ों और इम्यून सेल्स को ढंकते हैं और कोरोना वायर यह इंसानी बाल से 30 गुना महीन है। ये नैनो स्पंज कोरोना वायरस और उसके जहरीले तत्व को सोखते हैं।
Coronavirus
- फोटो : Pixabay
- कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में रिसर्च करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि ये कण कोविड-19 से बचाने के लिए थेरेपी की तरह काम कर सकते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक रिसर्च में सामने आया है कि नैनोस्पंज कोरोना वायरस को न्यूट्रिलाइज करने में कारगर है। वायरस के न्यूट्रिलाइज होने की स्थिति में यह इंसानी कोशिकाओं को संक्रमित नहीं कर पाया।
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Coronavirus
- फोटो : Pixabay
- इस नैनो स्पंज को लैब में तैयार किया गया है, जो इम्यून सिस्टम और फेफड़े की कोशिकाओं के साथ मिलकर बनाया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह कोरोना वायरस के संक्रमण करने की क्षमता को 90 फीसदी तक कमजोर कर देता है। शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस के टारगेट को भी समझने में सफलता हासिल की है।
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रोग प्रतिरोधक क्षमता (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
- नैनो इंजीनियरिंग विशेषज्ञ लियानफैंग झैंग के मुताबिक, आमतौर पर दवा तैयार करने वाले वैज्ञानिक रोगाणु या विषाणु के उस टारगेट को ढूंढते हैं, जहां ड्रग असर कर सके। लेकिन इस शोध का तरीका अलग रहा। हमारी टीम ने यह पता लगाया कि कोरोना वायरस का टारगेट क्या है यानी वायरस किस कोशिका को संक्रमण के लिए टारगेट करता है, हमने उसी कोशिका को सुरक्षित करके का तरीका इजाद किया।