भारत सहित दुनियाभर में इस समय कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण जारी है। अध्ययनों में कोरोना के इस वैरिएंट में 35 से अधिक म्यूटेशनों के बारे में पता चलता है जो इसे काफी अधिक संक्रामक बनाती हैं, यही कारण है जिन लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है उनको भी संक्रमित पाया जा रहा है। ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर हुए अब तक के अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने इसके तमाम तरह के जोखिम कारकों के बारे में पता लगाया है। इसी से संबंधित हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने संक्रमण के जोखिम को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है।
Omicron Variant: दो तिहाई संक्रमितों को पहले रह चुकी है ऐसी दिक्कत, अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा
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66 फीसदी लोग पहले भी रह चुके हैं संक्रमित
ओमिक्रॉन के संक्रमण जोखिम कारकों को जानने के लिए 5 से 20 जनवरी के बीच इंग्लैंड में एकत्र किए गए एक लाख से अधिक पीसीआर परीक्षणों का अध्ययन किया गया। इसके आधार पर वैज्ञानिकों ने पाया कि लगभग 66% प्रतिभागी पहले भी वायरस से संक्रमित रह चुके थे। इसके अलावा 7.5 फीसदी संक्रमित प्रतिभागियों ने बताया कि उन्हें पहले लगता था कि वह वायरस से संक्रमित हैं लेकिन परीक्षण में इसकी पुष्टि नहीं हो पाई थी। इस आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले से कोरोना संक्रमित रह चुके लोगों को ओमिक्रॉन संक्रमण को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
कोरोना के रिइंफेक्शन का खतरा
अध्ययन के लेखकों ने जारी एक पेपर में बताया कि ओमिक्रॉन संक्रमण ने इंग्लैंड सहित दुनिया के तमाम हिस्सों को गंभीर तौर पर प्रभावित किया है। इतना ही नहीं बहुत ही कम समय में इस वैरिएंट ने डेल्टा को लगभग रिप्लेस कर दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लोगों को कोरोना की दूसरी लहर में डेल्टा वैरिएंट का संक्रमण हो चुका है उन्हें ओमिक्रॉन का खतरा अधिक हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना के रिइंफेक्शन को लेकर भी लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
वैक्सीनेशन सभी के लिए बहुत आवश्यक
दुनियाभर के विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण अब तक कोरोनावायरस के खिलाफ सबसे अच्छा हथियार है। यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का कहना है कि टीकाकरण आपको ओमिक्रॉन के कारण होने वाली गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है। अध्ययनों में पाया गया है कि वैक्सीन की बूस्टर डोज देकर लोगों को ओमिक्रॉन जैसे संक्रामक वैरिएंट्स से सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष
अध्ययन के निष्कर्ष में विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के रिइंफेक्शन का खतरा बरकरार है, इसे हम कोविड में बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं कर सकते, चाहे वह किसी भी प्रकार का हो। यहां तक कि अगर हाल ही में आप ओमिक्रॉन संक्रमण से ठीक हुए हैं और कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन नहीं कर रहे हैं तो ऐसे लोगों में भी रिइंफेक्शन का खतरा हो सकता है। कोरोना से बचाव के उपायों को तब तक प्रयोग में लाते रहने की आवश्यकता है, जब तक पूरी तरह से कोरोना का वायरस अप्रभावी नहीं हो जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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