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Conjunctivitis: आई फ्लू संक्रमण के दौरान ये गलती बढ़ा सकती है अंधेपन का खतरा, विशेषज्ञों ने किया सावधान

Sat, 05 Aug 2023 07:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 05 Aug 2023 07:05 PM IST
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ग्लूकोमा का बढ़ता जोखिम - फोटो : iStock

राष्ट्रीय राजधानी में कंजंक्टिवाइटिस के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। आंखों में संक्रमण की स्थिति के कारण लालिमा, दर्द और जलन की समस्या हो सकती है। वैसे तो संक्रमण की स्थिति कुछ दिनों में ही ठीक हो जाती है, पर कुछ स्थितियों में इसके गंभीर रूप लेने का खतरा भी देखा गया है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि संक्रमण की स्थिति में कुछ लोगों ने खुद से ही आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था, जिनमें स्टेरॉयड की अधिकता हो सकती है। इससे स्थाई तौर पर तो संक्रमण में आराम मिल जाता है पर दीर्घकालिक रूप से स्टेरॉयड के कारण आंखों में गंभीर समस्याओं के विकसित होने का खतरा रहता है।

डॉक्टर कहते हैं, आई फ्लू संक्रमण के मामलों का समय रहते पता चलना और इसका उपचार संक्रमण के गंभीर लक्षणों के जोखिमों को कम कर सकता है। पर जिस तरह से कई लोगों ने खुद से ही स्टेरॉयड वाले आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, इसके कारण भविष्य में आंखों में गंभीर समस्याओं यहां तक कि अंधेपन के बढ़ने का खतरा भी अधिक हो सकता है।

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कंजंक्टिवाइटिस की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : istock

कई प्रकार का हो सकता है कंजंक्टिवाइटिस 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों में कंजंक्टिवाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं, यह सेल्फ लिमिटिंग डिजीज है जिसका मतलब है कि कुछ समय में यह खुद से ही ठीक हो सकती है। हर बार कंजंक्टिवाइटिस के मामले में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती है। कई बार यह संक्रमण वायरल भी हो सकती है, इसलिए स्थिति का सही और समय रहते निदान होना आवश्यक हो जाता है। 

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स्टेरॉयड आई ड्राप्स से हो सकती है आंखों की समस्या - फोटो : Pixabay

सभी के लिए स्टेरॉयड की जरूरत नहीं

आई फ्लू संक्रमण की स्थिति के लिए वैसे तो कोई प्रमाणित उपचार नहीं है पर कुछ स्थितियों में बीमारी की स्थिति को देखते हुए डॉक्टर कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स वाले आई ड्रॉप्स लेने की सलाह दे सकते हैं। यह एडेनोवायरल कंजंक्टिवाइटिस संक्रमण के उपचार में सहायक हो सकती है। हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स की जरूरत सभी रोगियों को नहीं होती है, इसके उपयोग को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

इसका अधिक या अनावश्यक इस्तेमाल न सिर्फ संक्रमण को बढ़ाने वाला हो सकता है साथ ही आंखों को भी इससे दीर्घकालिक जोखिमों का खतरा हो सकता है।

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आंखों में संक्रमण की समस्या - फोटो : iStock

स्टेरॉयड के कारण आंखों में गंभीर समस्याओं का खतरा

पीटीआई की रिपोर्ट में एम्स के आरपी सेंटर के प्रमुख डॉ जे एस टिटियाल कहते हैं, आई फ्लू के लगभग 20-30 प्रतिशत मामलों में सकारात्मक बैक्टीरियल कल्चर देखे गए हैं, जो सुपरएडेड बैक्टीरियल संक्रमण की ओर इशारा करता है।

डॉक्टर कहते हैं, स्टेरॉयड वाले आई ड्रॉप्स के अधिक इस्तेमाल से जुड़े कई जोखिम हो सकते हैं। जो मरीज लंबे समय तक कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स का उपयोग करते हैं, उनमें ग्लूकोमा (जो संभावित रूप से अंधा करने वाली स्थिति है) और मोतियाबिंद विकसित होने का खतरा होता है। डॉक्टर और रोगी दोनों को इस बात पर गंभीरता से ध्यान देते रहने आवश्यकता है।

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आंखों को संक्रमण से कैसे बचाएं - फोटो : iStock

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

कंजंक्टिवाइटिस के जोखिमों को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने और आंखों के संक्रमण से बचाव के उपाय करते रहने की आवश्यकता है। बीमारी का समय रहते सही निदान किया जाना आवश्यक होता है। आंखों में संक्रमण की स्थिति में बिना किसी डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवा को प्रयोग में नहीं लाना चाहिए। ज्यादातर मामलों में ठंडी सेकाई और आराम करने से भी आंखों में संक्रमण को ठीक किया जा सकता है।  



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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