Medically Reviewed by Dr. I.N. Vajpai
न्यूरो सर्जन
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.एस (जनरल सर्जरी), एमसीएच (न्यूरो सर्जरी), उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
अनुभव- 45 वर्ष
अगर दिमाग सही है, तो सबकुछ ठीक है। ये तो आपने सुना ही होगा, लेकिन आज के समय में लोगों की जीवनशैली ऐसी हो गई है कि उनकी याददाश्त धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। वैसे याददाश्त कमजोर होने की समस्या ज्यादातर बुजुर्गों में देखने को मिलती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कई बार डाइट सही नहीं होने से भी लोगों की याददाश्त कमजोर होने लगती है। इसलिए सही डाइट बहुत जरूरी होता है। इससे सिर्फ दिमाग ही नहीं बल्कि शरीर को भी स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिलती है। रोजमेरी, जिसे गुलमेहंदी के नाम से भी जाना जाता है, याददाश्त में सुधार लाने और बुद्धि व ध्यान बढ़ाने में मदद करती है। यह अल्जाइमर या डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के मरीजों के लिए भी लाभकारी होती है। दरअसल, रोजमेरी अद्भुत स्वाद और सुगंधित जड़ी-बूटियों में से एक है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होती है। आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में...
आज का हेल्थ टिप्स: याददाश्त में सुधार कर दिमाग को करती है तेज, रोजमेरी के ये हैं पांच जबरदस्त फायदे
इम्यूनिटी को बनाती है मजबूत
- अगर शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होगी तो विभिन्न रोगों से बचाव संभव है और रोजमेरी के इम्यूनिटी यानी प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले गुणों को काफी प्रभावशाली माना जाता है। दरअसल, इसमें कई महत्वपूर्ण एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं।
पेट के लिए भी है फायदेमंद
- रोजमेरी को खराब पेट, कब्ज, सूजन, दस्त आदि के लिए प्राकृतिक उपायों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें सूजन कम करने वाले और उत्तेजक गुण पाए जाते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि हफ्ते में एक बार इसका सेवन जरूर करना चाहिए।
बढ़ाती है ब्लड सर्कुलेशन
- रोजमेरी में पाए जाने वाले गुण लाल रक्त कोशिकाओं (रेड ब्लड सेल्स) के बनने और ब्लड सर्कुलेशन (रक्त परिसंचरण) को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके अलावा यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी मदद करती है।
तनाव को दूर करने में उपयोगी
- विशेषज्ञ कहते हैं कि रोजमेरी की सुगंध मूड में सुधार, मन को शांत रखने और चिंता या तनाव से राहत दिलाने में मदद कर सकती है। इसके तेल का इस्तेमाल तनाव को दूर भगाने में किया जाता है। रोजमेरी की पत्तियों को पानी में उबाल कर उस पानी से गरारा करने पर सांसों की बदबू से भी राहत मिल सकती है।
नोट: डॉ. आईएन वाजपई अत्यधिक योग्य और अनुभवी न्यूरो सर्जन हैं। इन्होंने लखनऊ के केजीएमसी से अपना एमबीबीएस किया है। इसके बाद इन्होंने जनरल सर्जरी में एमएस किया और न्यूरो सर्जरी में एमसीएच की पढ़ाई की है। इन्होंने 1996 में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम किया और 2012 में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में रिटायर हुए। डॉक्टर आईएन वाजपाई आईएमए एंड न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉक्टर वाजपई को 45 वर्षों का अनुभव है।
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